Rajasthan High Court
CW/4347/2002 of MST CHAMELI Vs RANGLAL and ORS on 25 July 2003
िसिवल िरट यािचका संख् या-4347/2006 िदनेश कुमार गांधी बनाम यूिनविसर्टी ऑफ राज. व अन् य िदनांक-01.10.2007 माननीय न्
Citations and Judicial Treatment
Cited by
0
Decisions in the index citing it
Cites
0
Decisions referred to
In this index
0
Of the decisions it cites
Overruled / Questioned
0
No negative treatment found
Loading the citing and cited decisions…
This judgment in the centre: on the left the decisions it cites, on the right the decisions citing it. Colour is the treatment; choose a decision to open it.
एकलपीठिसिवल िरट यािचका-4347/2006संख् या
. िदनेश कुमार गांधी बनाम यूिनविसर्टी ऑफ राजव अन् य िदनांक-01.10.2007
माननीयन यायािधपितौी मोह मद रफीक
ौी िवनोद गोयल , - याची की ओर।अिधवक् ता
, ौीमती अनुपमा चतुव दी, अिधवक् ता िवप्षी संख् या-1 की ओर सेौी आर एम जैन, अिधवक् ता वाः ते , , - -2 की ओर सेौी ए के भागर्वअिधवक् तािवप्षी संख् या -- यािचकाकतार् िदनेश कुमार ने यह िरट यािचका अयाचीगण के िवरू -2 केइस आशय का समादेश जारी करने हेतु ूः तुत की है िक वे अयाची संख् याइंजीिनयिरंग कॉलेज “ारा जारी िकये गये परी्षा ूपऽ िजसके बाबत उसने परी्षा04 अूेल,06 को ही जमा करा िदया था,को ः वीकार करते हए उसे ि”तीयशुल् क ( ) 29 मई, 06 को ूायोिजत कीवषर् के चोथे सेमेः टरथ् योरीकी परी्षा जो िक जा रही है में अनुमित िदये जाने की ूाथर्ना की है।
26 मई, 2006 को नोिटस जारीइस न् यायालय के ारा अयाचीगण को करते समय िनद िशत िकया गया था िक वे याची को उक् त परी्षा में अः थाई तौरपर बैठने की अनुमित देंगे परन् तु परी्षा पिरणाम इस िरट यािचका के िनणर्यअ यधीन रहेगा।
यािचकाकतार् के िव ान अिधवक् ता का कथन है िक परी्षा शुल् क यघिप उसने 04 अूेल,06 12को ही जमा करवा िदया था परन् तु यािचकाकतार् अूेल,06 को अपने घर से महािवधालय आते समय ः कूटर से दघर्टनामः त हो गयाथा एवं उसके गंभीर चोटें आयी िजसके पिरणाम ः वरूप उसे ल बे समय तक15अः पताल में भत रहना पड़ा। परी्षा शुल् क जमा कराने की अिन् तम ितिथ अूेल,06 20 अूेल,06 तक जमा करवाया जा सकताथी तथा िवल ब शुल् क से 25 अूेल,06 था एवं दगने शुल् क से तक जमा करवा सकता था। यािचकाकतार् जब30 अूेल,06 को जमाचलने िफरने की िः थित में आया तो उसने परी्षा फीस करवा दी ।
यािचकाकतार् के िव ान अिधवक् ता ौी िवनोद गोयल ने अचायी -2 इंजीिनयिरंग कॉलेज, 20 मई, 06 एवं 21संख् याकोटा के ूाचायर् व डीन ारा मई,06 को भेजे गये पऽ की ओर आकृं ट करते हए यह कथन िकया िक महािवधालय ूशासन ारा यािचकाकतार् का परी्षा फामर् ितगुनी परी्षा शुल् क केसाथ ः वीकार करने की अनुसंशा की गयी थी।
-1 अचायी संख् याके िव ान अिधवक् ता ौीमती अनुपमा चतुव दी का 25 अूेल,06 कथन है िक परी्षा फामर् ूपऽ िदनांक तक ही मय दगनी शुल् क केसाथ ः वीकार िकये जा सकता था उसके पँ चात ितगुनी परी्षा शुल् क के साथ उसेः वीकार िकये जाने का कोई ूावधान नहीं है।
, ूकरण के समः त तथ् यों एवं पिरिः थितयों मेंमैं यह पाता हं िक न् यायालय “ारा अयाचीगण को नोिटस जारी करते समय यािचकाकतार् को अः थाईरूप से परी्षा में बैठने की अनुमित ूदान की गयी थी तथा यािचकाकतार् कोत” पँ चात ने िसफर् उक् त परी्षा में सि मिलत करवाया गया वरन उसके बाद उसेपांचवे व छठे सेमः टर में िनयिम त रूप से अ ययन भी करने िदया गया।
ऐसी पिरिः थितयों में अयाचीगण को यह िनद श िदया जाना उिचत समझता हं िक वे यािचकाकतार् के परी्षा ूपऽ को ितगुनी फीस के साथ ूकरणकी िविशं ट पिरिः थितयों में ः वीकृत करें तथा उसने जो परी्षा इस न् यायालय के26 मई, 2006 , उसका ारा पािरत अन् तिरम आदेश िदनांक की अनुपालना में दी हैपिरणाम घोिषत करते हए उसके पँ चात उसे िनयमानुसार भिवं य में ूायोिजतहोने वाली परी्षा में बैठने की अनुमित देवें।
तदनुसार इस यािचका का िनः तारण िकया जाता है।
( न या0 मोह मद रफीक )