Allahabad High Court
NA528/20282/2026 of RAJU YADAV Vs STATE OF U.P. AND ANOTHER on 8 October 2026
JUDICATURE AT ALLAHABAD APPLICATION U/S 528 BNSS No. - 20282 of 2026 Court No. - 73 HON'BLE DR. GAUTAM CHOWDHARY, J. 1. आवेदक की ओर से धारा 528 बी.एन.एस. के अन्तगर्त यह आवेदन पत्र, मु०अ०सं०
HIGH COURT OF JUDICATURE AT ALLAHABAD
APPLICATION U/S 528 BNSS No. - 20282 of 2026
Court No. - 73
HON'BLE DR. GAUTAM CHOWDHARY, J.
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1. आवेदक की ओर से धारा 528 बी.एन.एस. के अन्तर्गत यह आवेदन पत्र, मु०अ०सं० 359/2024, अन्तर्गत धारा 3/5ए/8 गौ हत्या निवारण अधिनियम उ.प्र. एवं धारा 11 पशुओं के प्रति क्रूरता का निवारण अधिनियम, थाना आजमगढ़, जिला महाराजगंज में प्रेषित आरोप पत्र दिनांक 15.10.2024 जिसमें एडिशनल चीफ जूडीसियल मजिस्ट्रेट, कोर्ट न. 11 आजमगढ़ द्वारा पारित प्रसंज्ञान/तलबी आदेश दिनांक 22.11.2024 के द्वारा दिये गये आदेश के विरूद्ध दायर किया गया है।
2. आवेदक के विद्वान अधिवक्ता एवं विद्वान अपर शासकीय अधिवक्ता को सुना तथा पत्रावली का परिशीलन किया।
3. आवेदक के विद्वान अधिवक्ता ने तर्क प्रस्तुत किया कि आवेदक के विद्वान अधिवक्ता द्वारा तर्क प्रस्तुत किया गया कि आवेदक के खिलाफ कोई अपराध नही बनता है और वर्तमान अभियोग आवेदक का उत्पीड़न करने के उद्देश्य से दुर्भावनापूर्ण इरादे से शुरू किया गया है। उन्होंने अपने दावे के समर्थन में कुछ दस्तावेज़ और बयान प्रस्तुत किए, आवेदक के विरुद्ध कोई दस्तावेजी साक्ष्य नहीं है। उनका यह भी कथन है कि वह प्रार्थना खण्ड में की गई अन्य प्रार्थनाओं पर बल नहीं देना चाहते हैं, बल्कि अवर/विचारण न्यायालय में उन्मोचन प्रार्थना पत्र दाखिल करने की अनुमति चाहते हैं तथा उनके द्वारा दाखिल किए गए उन्मोचन प्रार्थना पत्र का निस्तारण करने को संबंधित अवर न्यायालय को निर्देश दिया जाय।
4. विद्वान अपर शासकीय अधिवक्ता ने उनके तर्को का प्रबल विरोध किया। मैंने विद्वान अधिवक्ताओं के तर्कोंं के परिप्रेक्ष्य में पत्रावली पर उपलब्ध साक्ष्य एवं प्रश्नगत आदेश का परिशीलन किया।
5. मैंने उभयपक्ष के विद्वान अधिवक्ताओं के तर्को पर विचार किया।
6. उभय पक्ष के विद्वान अधिवक्ताओं के तर्को पर विचारोपरान्त एवं अभिलेख के अवलोकन से इस स्तर पर यह नहीं कहा जा सकता है कि आवेदक के खिलाफ उपरोक्त धाराओं के अन्तर्गत कोई अपराध गठित नहीं होता है। आवेदक की ओर से जो तर्क प्रस्तुत किए गए हैं वे विवादित ताथ्यिक प्रश्न से संबंधित हैं, जिनके विषय में इस न्यायालय द्वारा धारा 528 बी.एन.एस.एस. के आवेदन पत्र पर कोई फैसला देना संभव नहीं है, चूंकि उक्त ताथ्यिक प्रश्नों का विनिश्चय विचारण न्यायालय द्वारा ही साक्ष्य आने के बाद किया जा सकता है। इस संबंध में माननीय उच्चतम न्यायालय द्वारा R.P. Kapur Vs. State of Punjab, AIR 1960 SC 866, State of Haryana Vs. Bhajan Lal, 1992 SCC (Cri.) 426, State of Bihar Vs. P.P. Sharma, 1992 SCC (Cri.) 192 and lastly Zandu Pharmaceutical Versus Counsel for Applicant(s) : Akhila Nand Pandey, Arvind Kumar Singh, Sharad Kumar Pandey Counsel for Opposite Party(s) : G.A. Raju Yadav .....Applicant(s) State of U.P. and Another .....Opposite Party(s)
Works Ltd. Vs. Mohd. Saraful Haq and another, (Para-10) 2005 SCC (Cri.) 283 में दिए गए निर्णयों में यह अवधारित किया गया है कि इस स्तर पर केवल प्रथम दृष्टया ही केस देखा जाना है। मुलजिमान का जो विवादित बचाव कथन है उस पर इस स्तर पर विचार नहीं किया जा सकता है। आवेदक/अभियुक्त का जो विवादित बचाव कथन है उस पर इस स्तर पर विचार नहीं किया जा सकता है।
6. इस स्तर पर, आवेदक के विद्वान अधिवक्ता द्वारा यह कथन किया गया कि आवेदक को उन्मोचन प्रार्थना पत्र दाखिल करने की अनुमति दी जाये।
7. यह कहने या निर्देश पारित करने की आवश्यकता नहीं है, आवेदक विधि अनुसार उपलब्ध उपायों का लाभ उठाने के लिए स्वतंत्र हैं।
8. उक्त पर्यवेक्षण के साथ यह प्रार्थना पत्र अन्तिम रूप से निस्तारित किया जाता है। October 9, 2026 S.Mishra NA528 No. 20282 of 2026 2 (Dr. Gautam Chowdhary,J.) Digitally signed by :- SHASHI MISHRA High Court of Judicature at Allahabad