Allahabad High Court
WRIC/41070/2026 of SMT. AANCHAL AND ANOTHER Vs STATE OF U.P. AND 3 OTHERS on 8 October 2026
JUDICATURE AT ALLAHABAD WRIT - C No. - 41070 of 2026 Court No. - 73 HON'BLE DR. GAUTAM CHOWDHARY, J. 1- याचीगण के िवद्वान अिधवक्ता एवं िवद्वान स्थायी अिधवक्ता को सुना तथा
HIGH COURT OF JUDICATURE AT ALLAHABAD WRIT - C No. - 41070 of 2026 Court No. - 73 HON'BLE DR. GAUTAM CHOWDHARY, J. 1- याचीगण के विद्वान अधिवक्ता एवं विद्वान स्थायी अधिवक्ता को सुना तथा पत्रावली का परिशीलन किया।
2- याचीगण की ओर से इस याचिका के माध्यम से, याचीगण एक परमादेश रिट जारी करने की माँग कर रहे है, जिसमें प्रत्युत्तरदातागण को, याचीगण के पति और पत्नी के रूप में शान्तिपूर्ण वैवाहिक जीवन में हस्तक्षेप न करने का निर्देश दिया जाय तथा संबंधित अधिकारियों को यह निर्देश देने की मांग की गयी है कि वे याचीगण को सुरक्षा प्रदान करें।
3- याचीगण के विद्वान अधिवक्ता ने तर्क प्रस्तुत किया कि याचीगण वयस्क है और उन्होंने अपनी मर्जी और सहमति से बिना किसी दबाव के एक दूसरे के साथ विवाह कर लिया है और दोनों पति-पत्नी के रूप में दाम्पत्य जीवन व्यतीत कर रह रहे हैं, याची सं. 01 ने हाईस्कूल की मार्कशीट की प्रतिलिपि एवं याची सं. 02 ने पैन कार्ड की प्रतिलिपि, याचिका के साथ संलग्न किया है. जिनके अवलोकन से यह स्पष्ट है कि दोनों याचीगण बालिग हैं याचिका में दिए गए कथन याचीगण के संयुक्त हलफनामों द्वारा समर्थित हैं। इसके अलावा यह भी अनुरोध किया गया है कि निजी प्रत्युत्तरदाता और परिवार के अन्य सदस्य याचीगण द्वारा किए गए इस विवाह से नाराज हो गए है और उनके द्वारा याचीगण को धमकी दी जा रही है और उन्हें परेशान किया जा रहा है जिसके कारण याचीगण के जीवन को गंभीर खतरा है।
4- याचीगण के विद्वान अधिवक्ता का यह भी कथन है कि याचीगण ने अपने विवाह का पंजीकरण के लिए आवेदन कर दिया है जो याचिका के साथ संलग्न है।
5- याचीगण ने याचिका में कहा है कि वे पति-पत्नी के रूप में रह रहे है तथा उन्हें आशंका है कि निजी प्रत्युत्तरदाता अपने परिवार के सम्मान के लिए घोर उपहति कारित अथवा उन्हें खत्म कर Versus Counsel for Petitioner(s) : Santosh Kumar Jaiswal, Satya Pal Singh, Vivek Shukla Counsel for Respondent(s) : C.S.C. Smt. Aanchal And Another .....Petitioner(s) State Of U.P. And 3 Others .....Respondent(s)
सकते है, यदि यह न्यायालय उन्हें सुरक्षा प्रदान नहीं करता है तो उनका जीवन खतरे में पड़ सकता है।
6- प्रस्तावित आदेश पारित किए जाने के दृष्टिगत निजी प्रत्युत्तरदाता को नोटिस जारी करने की कोई आवश्यकता नहीं है, पक्षकारों की ओर से उपस्थित विद्वान अधिवक्ताओं की सहमति से इस रिट याचिका को न्यायालय के नियमों के अनुसार इस स्तर पर अन्तिम रूप से निस्तारण किया जा रहा है।
7- माननीय उच्चतम न्यायालय ने कई निर्णयों में यह कानून तय किया है कि जहाँ एक लड़का और लड़की बालिग हैं और वे अपनी स्वतंत्र इच्छा से एक साथ रह रहे हैं तो उनके माता-पिता सहित किसी को भी उनके साथ रहने में हस्तक्षेप करने का अधिकार नहीं है। माननीय उच्चतम न्यायालय द्वारा इस संबंध में Gian Devi v. The Superintendent, Nari Niketan, Delhi and others, (1976) 3 SCC 234; Lata Singh v. State of U.P. and another, (2006) 5 SCC 475; and Bhagwan Dass v. State (NCT of Delhi), (2011) 6 SCC 396, which have consistently been followed by the Supreme Court and this court, as well as of this Court in Deepika and another v. State of U.P. And others, 2013 (9) ADJ 534. The Supreme Court in Gian Devi (supra) has held as under:
"Whatever may be the date of birth of the petitioner, the fact remains that she is at present more than 18 years of age. As the petitioner is sui juris no fetters can be placed upon her choice of the person with whom she is to stay, nor can any restriction be imposed regarding the place where she should stay. The court or the relatives of the petitioner can also not substitute their opinion or preference for that of the petitioner in such a matter."
8- मामले के तथ्यों एवं परिस्थितियों के दृष्टिगत इस न्यायालय का मत है कि याचीगण एक साथ रहने की लिए स्वतंत्र है तथा किसी भी व्यक्ति को उनके शान्तिपूर्ण जीवन निर्वाह करने में हस्तक्षेप करने की अनुमति नहीं दी जाएगी। यदि याचीगण के शान्तिपूर्ण जीवन निर्वाह में कोई व्यवधान उत्पन्न होता है तो याचीगण संबंधित वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक/पुलिस अधीक्षक (प्रत्युत्तरदाता सं० 2) से इस आदेश की प्रमाणित प्रतिलिपि के साथ संपर्क करेंगे, और उक्त प्रत्युत्तरदाता सं० 2 को निर्देशित किया जाता है कि वे याचीगण को तत्काल सुरक्षा प्रदान करेंगे।
9- निजी प्रत्युत्तरदाता को यह स्वतंत्रता प्रदान की जाती है कि यदि याचीगण द्वारा अभिलेख पर WRIC No. 41070 of 2026
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लाए गए दस्तावेज मनगढ़न्त या फर्जी हैं तो वे इस आदेश को वापस लेने के लिए रिकॉल आवेदन दायर करने के लिए स्वतंत्र होंगे।
10- चूंकि (2006) 2 SCC 578 and (2008) 1 SCC 180 Seema (Smt.) Vs Ashwani Kumar, मामले में माननीय उच्चतम न्यायालय के निर्णय के अनुसार विवाह का पंजीकरण अनिवार्य है, इसलिए याचीगण आज से 02 माह के अन्दर अपने विवाह का पंजीकरण कराने का वचन देते हैं।
11- यदि याचीगण उपरोक्त निर्धारित अवधि के भीतर अपने विवाह का पंजीकरण नहीं करा पाते हैं तो इस आदेश के तहत दी गयी सुरक्षा स्वतः ही समाप्त हो जाएगी।
12- यह स्पष्ट किया जाता है कि इस न्यायालय ने याचीगण के कथित विवाह पर कोई निर्णय नहीं दिया है और यह आदेश किसी भी तरह से याचीगण के विवाह की वैधता के बारे में कोई राय नहीं व्यक्त करता है।
13- उपरोक्त टिप्पणियों के साथ यह रिट याचिका निस्तारित की जाती है। मूल्य के बारे में कोई आदेश नहीं पारित किया जा रहा है। October 9, 2026 S.Mishra WRIC No. 41070 of 2026
(Dr. Gautam Chowdhary,J.) Digitally signed by :- SHASHI MISHRA High Court of Judicature at Allahabad
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