Allahabad High Court
NA528/43154/2026 of MOHD. TARIKH MANSOORI Vs STATE OF U.P. AND ANOTHER on 6 October 2026
JUDICATURE AT ALLAHABAD APPLICATION U/S 528 BNSS No. - 43154 of 2026 Court No. - 73 HON'BLE DR. GAUTAM CHOWDHARY, J. 1. आवेदक की ओर से धारा 528 भारतीय सुरक्षा संिहता के अंतगर्त यह आवेदन
HIGH COURT OF JUDICATURE AT ALLAHABAD
APPLICATION U/S 528 BNSS No. - 43154 of 2026
Court No. - 73
HON'BLE DR. GAUTAM CHOWDHARY, J.
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1. आवेदक की ओर से धारा 528 भारतीय सुरक्षा संहिता के अंतर्गत यह आवेदन पत्र, मु०अ०सं० 14/2024, अंतर्गत धारा 120बी, 420 व 66डी आई.टी. एक्ट, थाना साइबर क्राइम, जिला रामपुर में प्रेषित आरोप पत्र, दिनांकित 28.04.2026 से उद्भूत दाण्डिक वाद सं० 185/2026 (State Vs. Mohd. Tariq Mansoori), जो न्यायिक मजिस्ट्रेट, रामपुर के न्यायालय में लंबित है, में पारित तलबी आदेश दि० 04.07.2026 तथा इस वाद की संपूर्ण कार्यवाही को निरस्त करने हेतु योजित किया गया है।
2. आवेदक के विद्वान अधिवक्ता एवं विद्वान अपर शासकीय अधिवक्ता को सुना तथा पत्रावली का परिशीलन किया।
3. आवेदक के विद्वान अधिवक्ता का तर्क है कि आवेदक के विरुद्ध कोई अपराध प्रकट नहीं होता है और वर्तमान अभियोजन दुर्भावनापूर्ण इरादे से उत्पीड़न करने के उद्देश्य से संस्थित किया गया है। यहां प्रासंगिक है कि प्रथम सूचनाकर्ता और मोबाइल नंबर 8452873575 (जो वर्तमान आवेदक के नाम पर पंजीकृत था) के बीच दिनांक 23.1.2024 से 12.4.2024 तक की लगभग 63 पृष्ठों की चैट का इतिहास (chats history) आगे प्रस्तुत किया गया है। जबकि वर्तमान मोबाइल नंबर आवेदक द्वारा जारी नहीं कराया गया था, और न ही उसने इसका उपयोग किया था और न ही उसे कथित मोबाइल नंबर द्वारा किए गए किसी भी धोखाधड़ीपूर्ण कृत्य (fraudulent act) के संबंध में कोई जानकारी थी। कथित सिम नंबर 8452873575 के आधार पर, जो उचित जाँच किए बिना आवेदक की आईडी पर जारी किया गया था (जबकि सिम महाराष्ट्र राज्य, जिला ठाणे से जारी किया गया था और आवेदक जिला बिजनौर, उत्तर प्रदेश का निवासी है और वह न तो कभी वहाँ गया और न ही उसकी आईडी पर सिम जारी होने के संबंध में उसे कोई जानकारी है), आवेदक को केवल सर्किल ऑफिसर के निर्देश के अनुसार जाँच को निष्कर्ष तक पहुँचाने के लिए अनुसंधान अधिकारी द्वारा झूठा फँसाया गया और आवेदक के विरुद्ध बिना किसी प्रासंगिक तथ्य या साक्ष्य के केवल उसकी आईडी पर सिम जारी होने के आधार पर भारतीय दंड संहिता की धारा 420/120बी और सूचना प्रौद्योगिकी (आईटी) अधिनियम की धारा 66डी के अंतर्गत आगे की कार्रवाई की गई। फ्रीज किए गए खातों से राशि बढ़ाई गई और विद्वान मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट रामपुर के दिनांक 10.6.2024 के आदेश के अनुपालन में प्रथम सूचनादाता के खाते में अंतरित की गई, जो आगे वर्तमान अनुसंधान का हिस्सा बनाया गया और केस डायरी में उल्लिखित है। दिनांक 17.5.2024 को 19 अभियुक्त व्यक्तियों में से आवेदक और एक अन्य सह-अभुयुक्त हनुमान जंगम के विरुद्ध बिना किसी उचित Versus Counsel for Applicant(s) : Ayyaz Khan, Vivek Kumar Shukla Counsel for Opposite Party(s) : G.A. Mohd. Tarikh Mansoori .....Applicant(s) State of U.P. and Another .....Opposite Party(s)
जाँच के तथा वर्तमान आवेदक के विरुद्ध बिना किसी तात्विक तथ्य और साक्ष्य के केवल उसकी आईडी पर धोखाधड़ी में प्रयुक्त सिम जारी होने के आधार पर आरोप-पत्र दाखिल कर दिया गया। पुनः उनके द्वारा अपने तर्क के समर्थन में कुछ दस्तावेजों और बयानों की ओर ध्यान आकर्षित किया।
4. विद्वान अपर शासकीय अधिवक्ता ने कथन किया कि प्रश्नगत मामलें में समुचित विवेचना के उपरांत अभियुक्त के विरूद्ध आरोप पत्र दाखिल किया जा चुका है तथा उस पर संबंधित विचारण न्यायालय द्वारा पर्याप्त आधार पर प्रश्नगत आदेश पारित किया है तथा अभियुक्त के विद्वान अधिवक्ता द्वारा प्रश्नगत आदेश को अपास्त करने हेतु जो तर्क प्रस्तुत किए गए वे बलहीन है।
5. इस चरण पर, आवेदक के विद्वान अधिवक्ता द्वारा उठाए गए तर्क में तथ्यात्मक विवाद का न्यायिक निर्णय (adjudication) और साक्ष्य का मूल्यांकन (appraisal) शामिल है।
6. उभय पक्ष के विद्वान अधिवक्ता के तर्कोंं एवं अभिलेख पर मौजूद सामग्री के अवलोकन से और इस चरण पर मामले के तथ्यों को देखते हुए यह नहीं कहा जा सकता कि आवेदक के विरुद्ध कोई अपराध नहीं बनता है। न्यायालय के समक्ष किए गए सभी अभिवचन ( submissions) तथ्य के विवादित प्रश्नों से संबंधित हैं, जिनका इस न्यायालय द्वारा धारा 528 बी.एन.एन.एस. के अंतर्गत न्यायिक निर्णय नहीं किया जा सकता है। इस चरण पर केवल प्रथम दृष्टया (prima facie) मामला देखा जाना है, जैसा कि माननीय उच्चतम न्यायालय द्वारा आर.पी. कपूर बनाम पंजाब राज्य, ए.आई.आर. 1960 एस.सी. 866, हरियाणा राज्य बनाम भजन लाल, 1992 एससीसी (क्रिमिनल) 426, बिहार राज्य बनाम पी.पी. शर्मा, 1992 एससीसी (क्रिमिनल) 192 और अंत में झंडू फार्मास्युटिकल वर्क्स लिमिटेड बनाम मोहम्मद शराफुल हक एवं अन्य (पैरा-10) 2005 एससीसी (क्रिमिनल) 283 के मामलों में प्रतिपादित कानून के आलोक में स्पष्ट किया गया है। इसलिए, इस मामले की संपूर्ण कार्यवाही को निरस्त करने की प्रार्थना को अस्वीकार किया जाता है।
7. तद्नुसार, यह आवेदन पत्र निरस्त किया जाता है।
8. कार्यालय को निर्देश दिया जाता है कि इस आदेश की एक प्रतिलिपि संबंधित अवर न्यायालय को अविलम्ब भेजना सुनिश्चित किया जाय।
9. यदि इस वाद में कोई अंतरिम आदेश हो तो, उसे समाप्त समझा जाय। October 7, 2026 CP.sahani NA528 No. 43154 of 2026 2 (Dr. Gautam Chowdhary,J.) Digitally signed by :- CHANDRA PRAKASH SAHANI High Court of Judicature at Allahabad