Allahabad High Court
NABAIL/10504/2026 of BRIJ MOHAN Vs STATE OF U.P. AND ANOTHER on 5 October 2026
JUDICATURE AT ALLAHABAD CRIMINAL MISC. ANTICIPATORY BAIL APPLICATION U/S 482 BNSS No. - 10504 of 2026 Court No. - 73 HON'BLE DR. GAUTAM CHOWDHARY, J. 1. सूची पुनरीिक्षत वतर्मान दािण्डक प्रकीणर् अिग्रम
HIGH COURT OF JUDICATURE AT ALLAHABAD
CRIMINAL MISC. ANTICIPATORY BAIL APPLICATION U/S 482 BNSS No.
- 10504 of 2026
Court No. - 73
HON'BLE DR. GAUTAM CHOWDHARY, J.
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1. सूची पुनरीक्षित वर्तमान दाण्डिक प्रकीर्ण अग्रिम जमानत प्रार्थना पत्र आवेदक बृज मोहन की ओर से परिवाद सं० 24/2024 अन्तर्गत धारा 323/ 387/ 392 भा०दं०वि०, थाना जालौन, जिला जालौन में अग्रिम जमानत पर मुक्त करने हेतु प्रस्तुत किया गया है।
2. आवेदक के विद्वान अधिवक्ता एवं विद्वान अपर शासकीय अधिवक्ता को सुना तथा पत्रावली का परिशीलन किया।
3. आवेदक के विद्वान अधिवक्ता ने तर्क प्रस्तुत किया कि आवेदक निर्दोष है, उसे उपरोक्त धाराओं में द्वेषवश तंग व परेशान करने की नियत से आलिप्त किया गया है, उसे आशंका है कि उसे उपरोक्त वर्णित मामले में गिरफ्तार किया जा सकता है जबकि उसके विरूद्ध कोई विश्वसनीय साक्ष्य नहीं है। उनका यह भी कथन है कि आवेदक का कोई आपराधिक इतिहास नहीं रहा है और आवेदक के विरूद्ध अभी तक कोई भी बाध्यकारी प्रक्रिया नहीं अपनाई गयी है। पुनः उनका कथन है कि आवेदक विचारण और जॉच के दौरान सहयोग करने का वचन देता है कि वह जॉच एजेंसी या न्यायालय द्वारा अपेक्षित समय पर उपस्थित रहेगा एवं आवेदक की ओर से यह आश्वासन दिया गया है कि वह कानून की प्रक्रिया में सहयोग करने के लिए तैयार है और जब भी आवश्यकता होगी वह ईमानदारी से न्यायालय के समक्ष खुद को उपलब्ध कराएगा और उन सभी शर्तोंं को स्वीकार करने के लिए भी तैयार है जो न्यायालय उस पर अधिरोपित करेगी।
4. विद्वान अपर शासकीय अधिवक्ता द्वारा अभियुक्त के अग्रिम जमानत के विरोध में यह तर्क प्रस्तुत किया गया कि आवेदक द्वारा कारित अपराध गंभीर प्रकृति का है। मामले के तथ्य एवं परिस्थितियों को दृष्टिगत रखते हुये अभियुक्त को अग्रिम जमानत पर रिहा किये जाने का पर्याप्त अधार नहीं है। अतः अभियुक्त को अग्रिम जमानत पर न छोड़ा जाये।
5. यह कहा जा सकता है कि Siddharam Satlingappa Mhetre vs. State of Maharashtra, (2011) 1 SCC 694 के मामले में माननीय उच्चतम न्यायालय द्वारा यह अवधारित किया गया है कि अग्रिम जमानत याचिका पर न्याय-निर्णयन करते समय न्यायालय को आरोपों की प्रकृति और गंभीरता, आरोपी की न्यायिक प्रक्रिया से भागने की संभावना पर विचार करना चाहिए और यह कि न्यायालय को आरोपी के विरूद्ध उपलब्ध सभी सामग्री का सावधानी से मूल्यांकन करना चाहिए और आरोपी की वास्तविक भूमिका पर भी विचार करना Versus Counsel for Applicant(s) : Jaya Goswami, Rajiv Kumar Tripathi Counsel for Opposite Party(s) : G.A. Brij Mohan .....Applicant(s) State of U.P. and Another .....Opposite Party(s)
चाहिए।
6. उभय पक्ष के तर्कोंं एवं वर्तमान मामले में अग्रिम जमानत संबंधी विधि के स्थापित सिद्धांतों को ध्यान में रखते हुए और पक्षकारों के विद्वान अधिवक्ताओं के कथनों, आरोपों की प्रकृति, आवेदक की भूमिका और मामले के सभी तथ्यों एवं परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए, मामले के गुण-दोष पर बिना कोई विचार व्यक्त किए अग्रिम जमानत की प्रार्थना स्वीकार किए जाने योग्य है। तद्नुसार अग्रिम जमानत आवेदन पत्र स्वीकार किया जाता है।
7. उपरोक्त मुकदमा अपराध संख्या में सम्मिलित आवेदक की गिरफ्तारी की दशा में, उसे संबंधित न्यायालय की संतुष्टि पर रू० 50,000/- का व्यक्तिगत बंध पत्र एवं उसी धनराशि के दो प्रतिभू प्रस्तुत करने पर, सत्र परीक्षण के निस्तारण तक निम्न शर्तो के अधीन अग्रिम जमानत पर रिहा किया जाएगा :- 1- आवेदक विचारण न्यायालय के समक्ष प्रत्येक नियत तिथि में नियमित रूप से उपस्थित रहेगा। 2- आवेदक मामले के तथ्यों से परिचित किसी व्यक्ति या पुलिस अधिकारियों को प्रत्यक्ष या परोक्ष रूप से कोई धमकी, वादा या प्रलोभन नहीं देगा जिससे कि वह ऐसे तथ्य को न्यायालय के समक्ष या किसी पुलिस अधिकारी के समक्ष प्रकट न करने पर मान जाए। 3- आवेदक विचारण के दौरान सहयोग करेगा और जमानत की स्वतंत्रता का दुरूपयोग नहीं करेगा। उपरोक्त शर्तो के उल्लंघन की स्थिति में विवेचनाधिकारी/अभियोजन पक्ष को, आवेदक को प्रदत्त अग्रिम जमानत के निरस्तीकरण हेतु उपयुक्त आवेदन प्रस्तुत करने की स्वतंत्रता होगा।
8. तद्नुसार यह अग्रिम जमानत आवेदन पत्र उपरोक्त टिप्पणियों के साथ अंतिम रूप से निस्तारित किया जाता है। October 6, 2026 S.Mishra NABAIL No. 10504 of 2026 2 (Dr. Gautam Chowdhary,J.) Digitally signed by :- SHASHI MISHRA High Court of Judicature at Allahabad