Allahabad High Court

NABAIL/4078/2026 of VEER SHAILENDRA AKSHAYA PRATAP SINGH @ SHIVAM PATEL Vs STATE OF U.P. AND ANOTHER on 5 October 2026

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JUDICATURE AT ALLAHABAD CRIMINAL MISC. ANTICIPATORY BAIL APPLICATION U/S 482 BNSS No. - 4078 of 2026 Court No. - 73 HON'BLE DR. GAUTAM CHOWDHARY, J. 1. वतर्मान दािण्डक प्रकीणर् अिग्रम जमानत प्राथर्ना पत्र

HIGH COURT OF JUDICATURE AT ALLAHABAD

CRIMINAL MISC. ANTICIPATORY BAIL APPLICATION U/S 482 BNSS No.

Court No. - 73

HON'BLE DR. GAUTAM CHOWDHARY, J.

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1. वर्तमान दाण्डिक प्रकीर्ण अग्रिम जमानत प्रार्थना पत्र आवेदक की ओर से मु०अ०सं० 0055/2024 अन्तर्गत धारा 323, 504, 506, 420, 406 बी.एन.एस., थाना कोंच, जिला जालौन में अग्रिम जमानत पर मुक्त करने हेतु प्रस्तुत किया गया है।

2. आवेदक की विद्वान अधिवक्ता एवं विद्वान अपर शासकीय अधिवक्ता को सुना तथा पत्रावली का परिशीलन किया।

3. आवेदक का यह द्वितीय अग्रिम जमानत आवेदन पत्र है। आवेदक का प्रथम अग्रिम जमानत, अग्रिम जमानत आवेदन पत्र सं० 396/2025 में इस न्यायालय के आदेश दिनांक 25.03.2026 के द्वारा निरस्त की जा चुकी है।

4. आवेदक की विद्वान अधिवक्ता द्वारा नवीन तथ्य यह प्रस्तुत किया गया कि यद्यपि आवेदक का प्रथम अग्रिम जमानत आवेदन, उसमें निर्दिष्ट शर्तोंं का अनुपालन न किए जाने के कारण निरस्त कर दिया गया था, तथापि इस प्रकरण में प्रासंगिक तथ्य यह है कि विचारण न्यायालय (Trial Court) की आदेश-पत्रिका (Order Sheet) के अवलोकन से स्पष्ट है कि आवेदक विचारण में पूर्ण सहयोग प्रदान कर रहा है। उसके द्वारा विचारण के दौरान कोई भी अनावश्यक स्थगन ( Adjournment) नहीं लिया गया है। पुनः आवेदक की ओर से यह भी आश्वासन दिया गया है कि वह कानून की प्रक्रिया में सहयोग करने के लिए तैयार है और जब भी आवश्यकता होगी वह ईमानदारी से न्यायालय के समक्ष खुद को उपलब्ध कराएगा और उन सभी शर्तोंं को स्वीकार करने के लिए भी तैयार है जो न्यायालय उस पर अधिरोपित करेगी।

5. इसके विपरीत, विद्वान अपर शासकीय अधिवक्ता द्वारा यह तर्क प्रस्तुत किया गया कि प्रथम अग्रिम जमानत आवेदन-पत्र निरस्त होने के उपरांत विचारण के दौरान कई तिथियों पर हाजिरी Versus Counsel for Applicant(s) : Gunjan Yadav Counsel for Opposite Party(s) : Fakhruzzaman, G.A. Veer Shailendra Akshaya Pratap Singh @ Shivam Patel .....Applicant(s) State of U.P. and Another .....Opposite Party(s)

माफी (Exemption from Appearance) के प्रार्थना-पत्र प्रस्तुत किए गए हैं, जिससे यह स्पष्ट रूप से परिलक्षित होता है कि आवेदक द्वारा विचारण में सहयोग नहीं किया जा रहा है। इन्हीं तथ्यों एवं परिस्थितियों के सम्यक् परिशीलन के उपरांत ही माननीय न्यायालय द्वारा अभियुक्त का प्रथम अग्रिम जमानत आवेदन निरस्त किया जा चुका है। अतः अभियुक्त का यह द्वितीय अग्रिम जमानत आवेदन पत्र निरस्त किये जाने योग्य है।

6. यह कहा जा सकता है कि Siddharam Satlingappa Mhetre v. State of Maharashtra, (2011) 1 SCC 694 के मामले में माननीय उच्चतम न्यायालय ने माना है कि अग्रिम जमानत पर निर्णय करते समय न्यायालय को आरोप की प्रकृति और गंभीरता, अभियुक्त का पूर्ववृत्त, अभियुक्त के न्याय से भागने की संभावना पर विचार करना चाहिए तथा न्यायालय को अभियुक्त के विरुद्ध उपलब्ध संपूर्ण सामग्री का सावधानीपूर्वक मूल्यांकन करना चाहिए तथा अभियुक्त की सटीक भूमिका को भी ध्यान में रखना चाहिए।

7. वर्तमान मामले में अग्रिम जमानत संबंधी विधि के स्थापित सिद्धांतों को ध्यान में रखते हुए और पक्षकारों के विद्वान अधिवक्ताओं के कथनों, आरोपों की प्रकृति, आवेदक की भूमिका और इस मामलें में इस तथ्य को देखते हुए कि, आवेदक की ओर से कोई उपयुक्त नवीन तथ्त प्रस्तुत नहीं किया गया है। इसलिए, मामले के गुण-दोष पर बिना कोई विचार व्यक्त किए यह अग्रिम जमानत आवेदन पत्र स्वीकार किए जाने योग्य नहीं है, तद्नुसार आवेदक का अग्रिम जमानत आवेदन पत्र अस्वीकार किया जाता है।

8. तद्नुसार, इस अग्रिम जमानत आवेदन पत्र को निरस्त किया जाता है।

9. इस वाद में यदि कोई अंतरिम आदेश हो, तो वह स्वतः समाप्त समझा जाए।

10. कार्यालय को निर्देशित किया जाता है कि इस आदेश की एक प्रतिलिपि अविलम्ब संबंधित विचारण न्यायालय के भेजना सुनिश्चित करें। October 6, 2026 CP.sahani NABAIL No. 4078 of 2026

(Dr. Gautam Chowdhary,J.) Digitally signed by :- CHANDRA PRAKASH SAHANI High Court of Judicature at Allahabad

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