Allahabad High Court
NA528/40916/2025 of SHARIF KHA AND 2 OTHERS Vs STATE OF U.P. AND ANOTHER on 5 October 2026
JUDICATURE AT ALLAHABAD APPLICATION U/S 528 BNSS No. - 40916 of 2025 Court No. - 73 HON'BLE DR. GAUTAM CHOWDHARY, J. 1. आवेदकगण की ओर से धारा 528 बी.एन.एस.एस. के अंतगर्त प्रस्तुत यह आवेदन
HIGH COURT OF JUDICATURE AT ALLAHABAD
APPLICATION U/S 528 BNSS No. - 40916 of 2025
Court No. - 73
HON'BLE DR. GAUTAM CHOWDHARY, J.
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1. आवेदकगण की ओर से धारा 528 बी.एन.एस.एस. के अंतर्गत प्रस्तुत यह आवेदन पत्र, 79/2024 अन्तर्गत धारा 87, 142, 351(2) बी.एन.एस., थाना रेंढर, जिला जालौन स्थित उरई से उद्भूत सत्र परीक्षण सं० 48/2025 (State Vs. Sharif Kha and Others), जो अपर जिला व सत्र न्यायाधीश/विशेष न्यायाधीश (एस.सी./एस.टी. एक्ट), जालौन स्थित उरई में पारित आदेश दिनांकित 09.09.2025 तथा इस वाद की संपूर्ण कार्यवाही को खण्डित करने हेतु योजित किया गया है।
2. आवेदकगण के विद्वान अधिवक्ता तथा राज्य की ओर से उपस्थित विद्वान अपर शासकीय अधिवक्ता के तर्कोंं को विस्तारपूर्वक सुना गया।
4. आवेदकगण के विद्वान अधिवक्ता ने तर्क प्रस्तुत किया कि आवेदक सं० 1 व 2, आवेदक सं० 3 के क्रमशः पिता व भाई है। इसलिए, उनको भी इस मामलें में आलिप्त कर दिया गया है, जबकि कथित पीड़िता द्वारा अपने धारा 183 बी.एन.एस.एस. के बयान में यह कथन किया गया कि "मैं तालिब के घर अपनी मर्जी से गयी थी। मुझे तालिब ने घर पर नहीं बुलाया था तालिब को मेरे उसके घर पर होने की जानकारी नहीं थी। तालिब ने मेरे साथ कोई गलत काम नहीं किया है। मुझे और कुछ नहीं किया गया।" इससे परिलक्षित हो रहा है कि उपरोक्त बयानों के परिशीलन से यह स्पष्ट रूप से परिलक्षित होता है कि पीड़िता द्वारा अपने बयान में न तो मुख्य अभियुक्त/आवेदक संख्या-3 के विरुद्ध और न ही आवेदक संख्या-1 व 2 के विरुद्ध कोई भी संज्ञेय अपराध कारित किए जाने का आरोप लगाया गया है। उपर्युक्त तथ्यों से परिलक्षित हो रहा है कि संबधित विचारण न्यायालय द्वारा प्रश्नगत समन आदेश के माध्यम से आवेदकगण को उपरोक्त धाराओं में गलत तरीके से तलब किया है, जो केवल वाद की सामग्री और गवाहों के बयानों पर आधारित है, बिना किसी स्वतंत्र निष्कर्ष दर्ज किए और बिना विवेक का प्रयोग किए। उपरोक्त प्रश्नगत आदेश समुचित साक्ष्यों व विधिक तथ्यों पर आधारित नहीं है। इसलिए, प्रश्नगत आदेश अपास्त किए जाने योग्य है। Versus Counsel for Applicant(s) : Yakub Ali Counsel for Opposite Party(s) : G.A. Sharif Kha And 2 Others .....Applicant(s) State of U.P. and Another .....Opposite Party(s)
5. इसके विपरीत, विद्वान अपर शासकीय अधिवक्ता द्वारा आवेदक के विद्वान अधिवक्ता के तर्को का प्रबल विरोध करते हुए यह तर्क प्रस्तुत किया गया कि अभियुक्तगण की भूमिका इस घटना में स्पष्ट रूप से परिलक्षित है। इसलिए, यह आवेदन पत्र निरस्त किये जाने योग्य है।
6. उभय पक्ष के विद्वान अधिवक्तागण के तर्कोंं के परिप्रेक्ष्य में पत्रावली पर उपलब्ध साक्ष्य एवं प्रश्नगत आदेश का परिशीलन किया। यहां विचारणीय बिंदु यह है कि क्या संबंधित विचारण न्यायालय द्वारा प्रश्नगत समन आदेश/संज्ञान आदेश पारित करते समय पत्रावली पर उपलब्ध साक्ष्यों का सम्यक परीक्षण किया गया था? पत्रावली के अवलोकन से प्रतीत होता है कि संबधित विचारण न्यायालय द्वारा प्रश्नगत आदेश केवल वाद की सामान्य सामग्री और गवाहों के सतही बयानों के आधार पर पारित कर दिया गया है, जिसमें बिना किसी स्वतंत्र निष्कर्ष को दर्ज किए और बिना विधिक विवेक (Application of Mind) का प्रयोग किए आवेदकगण को उपरोक्त धाराओं में तलब किया गया है, जबकि यहां स्पष्ट है पीड़िता द्वारा आवेदकगण/ अभियुक्तगण के विरूद्ध अपने धारा 183 बी.एन.एस.एस. में कोई प्रतिकूल अभिकथन नहीं किया गया है। इसलिए, कानूनन, किसी भी आपराधिक मामले में समन या प्रसंज्ञान आदेश पारित करते समय मजिस्ट्रेट/न्यायालय को अपने विवेक का स्वतंत्र प्रयोग करना अनिवार्य होता है, जो कि प्रश्नगत आदेश में परिलक्षित नहीं होता है।
7. इस स्तर पर, उपर्युक्त समस्त तथ्यों, विधिक प्रावधानों और पीड़िता द्वारा दिए गए बयानों के प्रकाश में, यह न्यायालय इस निष्कर्ष पर पहुंचता है कि अपर जिला व सत्र न्यायाधीश/विशेष न्यायाधीश (एस.सी./एस.टी. एक्ट), जालौन स्थित उरई द्वारा पारित आदेश दिनांकित 09.09.2025 विधि के स्थापित सिद्धांतों के अनुकूल नहीं है और इसके आधार पर आवेदकगण के विरुद्ध कार्यवाही को जारी रखना न्याय के उद्देश्य के विपरीत होगा। इसलिए, यह आवेदन पत्र स्वीकार किये जाने योग्य है।
8. अतः आवेदकगण की ओर से प्रस्तुत यह आवेदन पत्र स्वीकार किया जाता है तथा अपर जिला व सत्र न्यायाधीश/विशेष न्यायाधीश (एस.सी./एस.टी. एक्ट), जालौन स्थित उरई द्वारा सत्र परीक्षण सं० 48/2025 (State Vs. Sharif Kha and Others) में पारित आदेश दिनांकित 09.09.2025 तथा इस वाद से संबंधित संपूर्ण कार्यवाही आवेदकगण के सीमा तक अभिखण्डित (Quashed) किया जाता है।
9. कार्यालय को निर्देश दिया जाता है कि इस आदेश की प्रति संबंधित विचारण न्यायालय को सूचनार्थ एवं आवश्यक कार्यवाही हेतु प्रेषित की जाए। October 6, 2026 CP.sahani NA528 No. 40916 of 2025 2 (Dr. Gautam Chowdhary,J.) Digitally signed by :- CHANDRA PRAKASH SAHANI High Court of Judicature at Allahabad