Allahabad High Court

BAIL/45032/2025 of PRADIP SHARMA Vs STATE OF U.P. on 4 October 2026

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JUDICATURE AT ALLAHABAD CRIMINAL MISC. BAIL APPLICATION No. - 45032 of 2025 Court No. - 73 HON'BLE DR. GAUTAM CHOWDHARY, J. 1. वतर्मान दािण्डक प्रकीणर् जमानत प्राथर्ना पत्र आवेदक की ओर से

HIGH COURT OF JUDICATURE AT ALLAHABAD

CRIMINAL MISC. BAIL APPLICATION No. - 45032 of 2025

Court No. - 73

HON'BLE DR. GAUTAM CHOWDHARY, J.

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1. वर्तमान दाण्डिक प्रकीर्ण जमानत प्रार्थना पत्र आवेदक की ओर से मु०अ०सं० 216/2024, अन्तर्गत धारा 409 भारतीय दंड संहिता, थाना कोतवाली, जिला बस्ती में जमानत पर मुक्त करने हेतु प्रस्तुत किया गया है।

2. आवेदक के विद्वान अधिवक्ता एवं विद्वान अपर शासकीय अधिवक्ता को सुना तथा पत्रावली का परिशीलन किया।

3. आवेदक के विद्वान अधिवक्ता द्वारा पूरकशपथ-पत्र दाखिल किया गया, इसे पत्रावली पर रखा जाय।

4. आवेदक का यह द्वितीय जमानत आवेदन पत्र है। आवेदक का प्रथम जमानत, जमानत आवेदन पत्र सं० 1874/2025 में इस न्यायालय के इसी न्यायपीठ के आदेश दिनांक 05.08.2025 के द्वारा निरस्त किया जा चुका है।

5. आवेदक के विद्वान अधिवक्ता द्वारा एक अन्य नवीन एवं सबल तर्क प्रस्तुत किया गया कि यद्यपि प्रस्तुत प्रकरण प्रथम श्रेणी मजिस्ट्रेट द्वारा विचारणीय (Triable) है, किंतु विद्वान मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट, बस्ती की न्यायालय द्वारा दिनांक 01.04.2025 को आवेदक के विरुद्ध आरोप विरचित (चार्ज फ्रेम) किए जाने के उपरांत भी, इस जमानत प्रार्थना पत्र के योजन ( फाइलिंग) की तिथि तक विचारण न्यायालय द्वारा किसी भी अभियोजन साक्षी (Prosecution Witness) की परीक्षा नहीं की गई है। इसके अतिरिक्त, यह भी उल्लेखनीय है कि आरोप-पत्र (चार्जशीट) में कुल 10 गवाह दर्शाए गए हैं, किंतु अनुसंधान अधिकारी (I.O.) द्वारा कई महत्वपूर्ण बिंदुओं एवं साक्ष्यों की विवेचना ही नहीं की गई है। ऐसी स्थिति में, विचारण (Trial) के निकट भविष्य में निष्कर्ष पर पहुँचने अथवा समाप्त होने की दूर-दूर तक कोई संभावना नहीं है। चूंकि 'त्वरित विचारण' (Speedy Trial) का अधिकार अभियुक्त का मौलिक अधिकार है, Versus Counsel for Applicant(s) : Rajesh Counsel for Opposite Party(s) : G.A. Pradip Sharma .....Applicant(s) State of U.P. .....Opposite Party(s)

अतः विलंब के इस आधार पर भी आवेदक न्यायसंगत रूप से जमानत पर मुक्त किए जाने का पूर्ण अधिकारी है। पुनः उनका कथन है कि आवेदक की ओर से यह आश्वासन दिया गया है कि वह कानून की प्रक्रिया में सहयोग करने के लिए तैयार है और जब भी आवश्यकता होगी वह ईमानदारी से अदालत के समक्ष खुद को उपलब्ध कराएगा और उन सभी शर्तोंं को स्वीकार करने के लिए भी तैयार है जो न्यायालय उस पर अधिरोपित करेगी। आवेदक निर्दोष है तथा वह इस प्रकरण में दि० 01.11.2024 से कारागार में निरुद्ध है। इसलिए, आवेदक को जमानत पर छोड़ दिया जाय।

6. विद्वान अपर शासकीय अधिवक्ता ने अभियुक्त के जमानत का प्रबल विरोध करते हुए तर्क प्रस्तुत किया कि अभियुक्त द्वारा कारित अपराध संंज्ञेय एवं गंभीर प्रकृति का है, इसलिए अभियुक्त को जमानत पर न छोड़ा जाय।

7. उभय पक्ष के विद्वान अधिवक्ता के तर्कोंं के परिप्रेक्ष्य एवं पत्रावली पर उपलब्ध सारवान तथ्यों एवं परिस्थितियों का समग्र रूप से अवलोकन करने के बाद, सबूतों की प्रकृति और किसी भी ठोस विरोधात्मक सामग्री की अनुपस्थिति एवं उपलब्ध सामग्री से छेड़छाड़ की संभावना न होने के तथ्य को देखते हुए मेरी राय में आवेदक को जमानत पर मुक्त करने का उपयुक्त आधार है।

8. अतः वाद के गुण-दोष पर बिना कोई टिप्पणी किए हुए आवेदक को उपरोक्त वर्णित अपराध में संबंधित न्यायालय की संतुष्टि पर व्यक्तिगत बंध-पत्र एवं अधिक धनराशि के दो स्थानीय प्रतिभू प्रस्तुत करने पर निम्नलिखित शर्तोंं के साथ जमानत पर छोड़ दिया जाय। आवेदक विवेचना या परीक्षण के दौरान अभियोजन साक्ष्यों के साथ छेड़छाड़ नहीं करेगा।

1. आवेदक अभियोजन साक्षियों व पीड़िता/ शिकायतकर्ता को डरायेगा/धमकायेगा नहीं।

2. आवेदक न्यायालय के आदेशों का पालन करेगा, वह परीक्षण के दौरान बिना कोई अनावश्यक स्थगन लिए नियत तिथि पर न्यायालय में उपस्थित होगा तथा परीक्षण में ईमानदारी से सहयोग करेगा।

3. आवेदक जमानत पर रिहा होने के बाद जमानत की स्वतंत्रता का दुरूपयोग नही करेगा और किसी भी अपराधिक गतिविधि में लिप्त नहीं होगा न कोई अपराधिक कृत्य करेगा।

4. आवेदक प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से मामले के तथ्यों से परिचित किसी भी व्यक्ति या पुलिस अधिकारियों को कोई प्रलोभन या धमकी नहीं देगा न ही उनसे कोई वायदा करेगा , जिसके कारण उन्हें न्यायालय में तथ्यों को उजागर करने से विरत रहना पडे़।

5.

9. उपरोक्त शर्तोंं में से किसी के उल्लंघन के मामले में, विचारण न्यायालय आवेदक की जमानत BAIL No. 45032 of 2025

नियमानुसार रद्द करने को स्वतंत्र है। October 5, 2026 CP.sahani BAIL No. 45032 of 2025

(Dr. Gautam Chowdhary,J.) Digitally signed by :- CHANDRA PRAKASH SAHANI High Court of Judicature at Allahabad

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