Allahabad High Court
WRIC/39561/2026 of KIRANVATI AND ANOTHER Vs STATE OF U.P. AND 4 OTHERS on 29 September 2026
JUDICATURE AT ALLAHABAD WRIT - C No. - 39561 of 2026 Court No. - 75 HON'BLE DR. GAUTAM CHOWDHARY, J. 1- याचीगण के िवद्वान अिधवक्ता एवं िवद्वान स्थायी अिधवक्ता को सुना तथा
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HIGH COURT OF JUDICATURE AT ALLAHABAD WRIT - C No. - 39561 of 2026 Court No. - 75 HON'BLE DR. GAUTAM CHOWDHARY, J. 1- याचीगण के विद्वान अधिवक्ता एवं विद्वान स्थायी अधिवक्ता को सुना तथा पत्रावली का परिशीलन किया। 2- इस याचिका के माध्यम से, याचीगण एक परमादेश रिट जारी करने की मांग कर रहे हैं, जिसमें प्रत्युत्तरदातागण को लिव-इन-रिलेशनशिप में याचिकाकर्ताओं के शांतिपूर्ण जीवन में हस्तक्षेप न करने का निर्देश दिया जाए एवं संबंधित अधिकारियों को यह निर्देश देने की मांग की गयी है कि वे याचीगण को सुरक्षा प्रदान करें। 3- याचीगण के विद्वान अधिवक्ता ने तर्क प्रस्तुत किया कि याचीगण वयस्क हैं और वे अपनी मर्जी और सहमति से बिना किसी दबाव के एक-दूसरे के साथ लिव-इन-रिलेशनशिप रह रहे हैं, याचीगण ने अपने उम्र के समर्थन में अपने-अपने हाईस्कूल/आधार कार्ड की प्रतिलिपि, याचिका के साथ संलग्न किया है, जिनके अवलोकन से यह स्पष्ट है कि दोनों याचीगण बालिग हैं, याचिका में दिए गए कथन याचीगण के संयुक्त हलफनामों द्वारा समर्थित हैं।याचीगण द्वारा स्वेच्छा से एक-दूसरे के साथ लिव-इन-रिलेशनशिप में रह रहे है। इसके अलावा यह भी अनुरोध किया गया है कि निजी प्रत्युत्तरदाता और परिवार के अन्य सदस्य याचीगण द्वारा एक साथ रहने के कारण नाराज हो गए हैं और उनके द्वारा याचीगण को धमकी दी जा रही है और उन्हें परेशान किया जा रहा है जिसके कारण याचीगण के जीवन को गंभीर खतरा है। 4- विद्वान स्थायी अधिवक्ता ने तर्क प्रस्तुत किया कि याची सं० 2 पूर्व से शादीशुदा है तथा उसके द्वारा अपने तलाक/विवाह-विच्छेद के संबंध में कोई कथन नहीं किया गया और न ही कोई इससे संबंधित दस्तावेज प्रस्तुत किया गया है, जिससे प्रतीत होता है कि याची सं० 2 का उसकी पत्नी से से विवाह-विच्छेद नहीं हुआ है। उन्होंने अपने तर्क के समर्थन में न्यायालय का ध्यान इस न्यायालय की द्वयपीठ द्वारा निर्णीत वाद Asha Devi and Another vs. State of U.P. and others passed in Writ (C) No. 18743 of 2020 की नजीर एवं अन्य बहुत सी नजीरों की ओर आकृष्ट किया। अन्ततः उन्होंने अनुरोध किया कि उनके द्वारा Versus Counsel for Petitioner(s) : Rajendra Kumar Yadav Counsel for Respondent(s) : C.S.C. Kiranvati And Another .....Petitioner(s) State Of U.P. And 4 Others .....Respondent(s)
प्रस्तुत किए गए तर्को एवं नजीरों को देखते हुए याचीगण वांछित अनुतोष प्राप्त करने के अधिकारी नहीं है एवं यह याचिका निरस्त किए जाने योग्य है, तद्नुसार याचीगण की याचिका निरस्त कर दी जाय। 5- विद्वान ए०सी०एस०सी०गण के तर्को के परिप्रेक्ष्य में इस न्यायालय की द्वयपीठ द्वारा निर्णीत वाद Asha Devi and Another vs. State of U.P. and others passed in Writ (C) No. 18743 of 2020 की को देखते हुए एवं पत्रावली पर उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर याचीगण को उनके द्वारा वांछित अनुतोष प्रदान किए जाने का कोई औचित्य नहीं है तथा यह याचिका निरस्त किए जाने योग्य है। 6- तद्नुसार, वाद के गुण दोष पर बिना कोई टिप्पणी किए हुए यह याचिका निरस्त की जाती है। September 30, 2026 CP.sahani WRIC No. 39561 of 2026 2 (Dr. Gautam Chowdhary,J.) Digitally signed by :- CHANDRA PRAKASH SAHANI High Court of Judicature at Allahabad