Allahabad High Court

BAIL/17750/2026 of ADIL Vs STATE OF U.P. AND 3 OTHERS on 29 September 2026

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JUDICATURE AT ALLAHABAD CRIMINAL MISC. BAIL APPLICATION No. - 17750 of 2026 Court No. - 75 HON'BLE DR. GAUTAM CHOWDHARY, J. 1. वतर्मान दािण्डक प्रकीणर् जमानत प्राथर्ना पत्र आवेदक की ओर से

HIGH COURT OF JUDICATURE AT ALLAHABAD

CRIMINAL MISC. BAIL APPLICATION No. - 17750 of 2026

Court No. - 75

HON'BLE DR. GAUTAM CHOWDHARY, J.

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1. वर्तमान दाण्डिक प्रकीर्ण जमानत प्रार्थना पत्र आवेदक की ओर से मु०अ०सं० 174/2024, अन्तर्गत धारा 376(3), 376(1), 506 भारतीय दंड संहिता एवं धारा 5(3), 2/6 पाक्सो एक्ट, थाना मुरादनगर, जिला गाजियाबाद में जमानत पर मुक्त करने हेतु प्रस्तुत किया गया है।

2. आवेदक के विद्वान अधिवक्ता एवं विद्वान अपर शासकीय अधिवक्ता को सुना तथा पत्रावली का परिशीलन किया।

3. आवेदक का यह द्वितीय जमानत आवेदन पत्र है। आवेदक का प्रथम जमानत, जमानत आवेदन पत्र सं० 24585/2024 में इस न्यायालय के इसी न्यायपीठ के आदेश दिनांक 11.11.2025 के द्वारा निरस्त किया जा चुका है।

4. आवेदक के विद्वान अधिवक्ता ने नवीन तर्क प्रस्तुत किया कि इस मामले के विचारण (Trial) के दौरान मुख्य अभियोजन साक्षी सं० 2 (पीड़िता) ने अपने न्यायालयीन परीक्षण (Examination-in- chief / Cross-examination) के दौरान अभियोजन पक्ष के कथानक (Prosecution Story) का बिल्कुल भी समर्थन नहीं किया है। पीड़िता ने अपने बयान में आवेदक की संलिप्तता से इनकार किया है, जिसके परिणामस्वरूप उसे अभियोजन पक्ष द्वारा पक्षद्रोही (Hostile) घोषित किया जा चुका है। इस महत्वपूर्ण परिस्थिति को देखते हुए मामले का पूरा आधार समाप्त हो जाता है और आवेदक जमानत का प्रबल अधिकारी है। पुनः उनका कथन है कि आवेदक की ओर से यह आश्वासन दिया गया है कि वह कानून की प्रक्रिया में सहयोग करने के लिए तैयार है और जब भी आवश्यकता होगी वह ईमानदारी से अदालत के समक्ष खुद को उपलब्ध कराएगा और उन सभी शर्तोंं को स्वीकार करने के लिए भी तैयार है जो न्यायालय उस पर अधिरोपित करेगी। आवेदक निर्दोष है तथा वह इस प्रकरण में दि० 19.03.2024 से कारागार में निरुद्ध है। इसलिए, आवेदक को जमानत पर छोड़ दिया जाय।

5. विद्वान अपर शासकीय अधिवक्ता ने अभियुक्त के जमानत का प्रबल विरोध किया, किंतु अभियोजन Versus Counsel for Applicant(s) : Rajnish Dubey Counsel for Opposite Party(s) : G.A. Adil .....Applicant(s) State Of U.P. And 3 Others .....Opposite Party(s)

साक्षी सं० 2 (पीड़िता) के पक्षद्रोही हो जाने के तथ्य का खंडन नहीं कर सके।

6. उभय पक्ष के विद्वान अधिवक्ता के तर्कोंं के परिप्रेक्ष्य एवं पत्रावली पर उपलब्ध सारवान तथ्यों एवं परिस्थितियों का समग्र रूप से अवलोकन करने के बाद, सबूतों की प्रकृति और किसी भी ठोस विरोधात्मक सामग्री की अनुपस्थिति एवं उपलब्ध सामग्री से छेड़छाड़ की संभावना न होने के तथ्य को देखते हुए मेरी राय में आवेदक को जमानत पर मुक्त करने का उपयुक्त आधार है।

7. अतः वाद के गुण-दोष पर बिना कोई टिप्पणी किए हुए आवेदक को उपरोक्त वर्णित अपराध में संबंधित न्यायालय की संतुष्टि पर व्यक्तिगत बंध-पत्र एवं अधिक धनराशि के दो स्थानीय प्रतिभू प्रस्तुत करने पर निम्नलिखित शर्तोंं के साथ जमानत पर छोड़ दिया जाय। आवेदक विवेचना या परीक्षण के दौरान अभियोजन साक्ष्यों के साथ छेड़छाड़ नहीं करेगा।

1. आवेदक अभियोजन साक्षियों व पीड़िता/ शिकायतकर्ता को डरायेगा/धमकायेगा नहीं।

2. आवेदक न्यायालय के आदेशों का पालन करेगा, वह परीक्षण के दौरान बिना कोई अनावश्यक स्थगन लिए नियत तिथि पर न्यायालय में उपस्थित होगा तथा परीक्षण में ईमानदारी से सहयोग करेगा।

3. आवेदक जमानत पर रिहा होने के बाद जमानत की स्वतंत्रता का दुरूपयोग नही करेगा और किसी भी अपराधिक गतिविधि में लिप्त नहीं होगा न कोई अपराधिक कृत्य करेगा।

4. आवेदक प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से मामले के तथ्यों से परिचित किसी भी व्यक्ति या पुलिस अधिकारियों को कोई प्रलोभन या धमकी नहीं देगा न ही उनसे कोई वायदा करेगा, जिसके कारण उन्हें न्यायालय में तथ्यों को उजागर करने से विरत रहना पडे़।

5.

8. उपरोक्त शर्तोंं में से किसी के उल्लंघन के मामले में, विचारण न्यायालय आवेदक की जमानत नियमानुसार रद्द करने को स्वतंत्र है। September 30, 2026 CP.sahani BAIL No. 17750 of 2026 2 (Dr. Gautam Chowdhary,J.) Digitally signed by :- CHANDRA PRAKASH SAHANI High Court of Judicature at Allahabad

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