Allahabad High Court
BAIL/26491/2025 of SUGRIV YADAV Vs STATE OF U.P. on 28 September 2026
JUDICATURE AT ALLAHABAD CRIMINAL MISC. BAIL APPLICATION No. - 26491 of 2025 Court No. - 69 HON'BLE AVNISH SAXENA, J. 1. List revised. 2. None appeared for the applicant. 3. Sri Ashutosh Kumar Pandey, learned counsel for the informant and learned A.G.A. for the State are present. 4. The present
HIGH COURT OF JUDICATURE AT ALLAHABAD
CRIMINAL MISC. BAIL APPLICATION No. - 26491 of 2025
Court No. - 69
HON'BLE AVNISH SAXENA, J.
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1. List revised.
2. None appeared for the applicant.
3. Sri Ashutosh Kumar Pandey, learned counsel for the informant and learned A.G.A. for the State are present.
4. The present bail application has been moved by the applicant accused- Sugriv Yadav to enlarge him on bail in Case Crime No. 1871 of 2016, under Sections 419, 420, 467, 468, 471, 406, 504 IPC, P.S.- Kotwali, District- Mau, during the pendency of trial.
5. Learned counsel for the informant and learned A.G.A. for the State have opposed the bail application.
6. This Court has taken into consideration the rival submissions made by learned counsel for the parties .
7. The accused-applicant is on interim bail on the condition that he may handover Rs.7.5 lakhs to the informant. The order dated 01.08.2025 is reiterated underneath:- " 1. सूची पुनरीिक्षत।
2. परिवादी के विद्वान अधिवक्ता श्री आशुतोष कुमार पाण्डेय की तरफ से आज वकालतनामा दाखिल किया गया, जिसे पत्रावली पर दाखिल किया जाय। Versus Counsel for Applicant(s) : Sanjay Kumar Yadav, Sunil Kumar Singh Counsel for Opposite Party(s) : Ashutosh Kumar Pandey, G.A. Sugriv Yadav .....Applicant(s) State of U.P. .....Opposite Party(s)
3. वर्तमान दाण्डिक प्रकीर्ण जमानत प्रार्थना पत्र, आवेदक सुग्रीव यादव की ओर से मु०अ०सं० 1871/2016, अन्तर्गत धारा 419, 420, 467, 468, 471, 406, 504 भा.दं.सं ., थाना कोतवाली, जिला मऊ में जमानत पर मुक्त करने हेतु प्रस्तुत किया गया है।
4. आवेदक के विद्वान अधिवक्ता, परिवादी के विद्वान अधिवक्ता एवं विद्वान अपर शासकीय अधिवक्ता को सुना तथा पत्रावली का परिशीलन किया।
5. आवेदक के विद्वान अधिवक्ता ने तर्क प्रस्तुत किया कि प्रश्नगत प्रकरण विलंब से पंजीकृत कराया गया है, इसका कोई समुचित स्पष्टीकरण नहीं दिया गया है। प्रश्गनत प्रकरण में आवेदक पर यह आक्षेप आरोपित है कि उसके द्वारा भूखण्ड हस्तांतरित करने के नाम पर पैसे ले लिये गये। आवेदक के विद्वान अधिवक्ता द्वारा कथन किया गया कि उसके द्वारा कोई झूठा वादा करके वादी से पैसे नहीं लिये गये हैं। यहां प्रासंगिक तथ्य है कि कथित धनराशि में से आवेदक के ऊपर बन रहे धनराशि सात लाख, पचास हजार रुपए अग्रिम नियत तिथि तक सूचनाकर्ता को वापस कर दिया जायेगा, इसके लिए आवेदक को अंतरिम जमानत पर मुक्त कर दिया जाय। पुनः उनका कथन है कि आवेदक की ओर से यह आश्वासन दिया गया है कि वह कानून की प्रक्रिया में सहयोग करने के लिए तैयार है और जब भी आवश्यकता होगी वह ईमानदारी से विचारण न्यायालय के समक्ष खुद को उपलब्ध कराएंगे और उन सभी शर्तोंं को स्वीकार करने के लिए भी तैयार है, जो न्यायालय उस पर अधिरोपित करेगी। आवेदक इस प्रकरण में दि० 04.07.2025 से कारागार में निरुद्ध है, इसलिए आवेदक को अंतरिम जमानत पर छोड़ दिया जाय।
6. परिवादी के विद्वान अधिवक्ता द्वारा यह तर्क प्रस्तुत किया गया कि अभियुक्त के विद्वान अधिवक्ता के इस कथन कि "अग्रिम नियत तिथि तक सात लाख, पचास हजार रूपये, अभियोगी को वापस कर दिया जायेगा", पर सहमत है। उनका यह भी कथन है कि अभियुक्त को अंतरिम जमानत पर मुक्त किये जाने पर उन्हें कोई आपत्ति नहीं है।
7. उभय पक्ष के विद्वान अधिवक्ता के तकों के परिप्रेक्ष्य में पत्रावली पर उपलब्ध सारवान तथ्यों एवं परिस्थितियों का समग्र रूप से अवलोकन करने के बाद, सबूतों की प्रकृति और किसी भी ठोस विरोधात्मक सामग्री की अनुपस्थिति एवं उपलब्ध सामग्री से छेड़छाड़ की संभावना न होने के तथ्य को देखते हुए मेरी राय में आवेदक को अंतरिम जमानत पर मुक्त करने का उपयुक्त आधार है।
8. आवेदक के विद्वान अधिवक्ता के द्वारा प्रस्तुत इस तथ्य कि "अग्रिम नियत तिथि तक सात लाख, पचास हजार रूपये, अभियोगी को वापस कर दिया जायेगा" तथा परिवादी के विद्वान अधिवक्ता के उक्त कथन पर सहमति " के क्रम में आवेदक को उक्त धनराशि अभियोगी को लौटाने हेतु अग्रिम नियत तिथि तक का समय प्रदान किया जाता है।
9. अतः वाद के गुण-दोष पर बिना कोई टिप्पणी किए हुए आवेदक को उपरोक्त वर्णित अपराध में संबंधित न्यायालय की संतुष्टि पर व्यक्तिगत बंध-पत्र एवं उसी धनराशि के दो प्रतिभू प्रस्तुत करने पर निम्नलिखित शर्तोंं के साथ अग्रिम नियत तिथि तक अंतरिम जमानत पर मुक्त कर दिया जाय।
1. आवेदक द्वारा कारागार से मुक्त होने के उपरांत अग्रिम नियत तिथि तक अभियोगी को धनराशि अंकन रु० 7,50,000/- (सात लाख, पचास हजार रूपये) का भुगतान करना सुनिश्चित करेंगे।
ii. आवेदक विवेचना या परीक्षण के दौरान अभियोजन साक्ष्यों के साथ छेड़छाड़ नहीं करेगा और आवेदक अभियोजन साक्षियों व पीड़िता/शिकायतकर्ता को डरायेगा/धमकायेगा नहीं।
iii. आवेदक न्यायालय के आदेशों का पालन करेगा, वह परीक्षण के दौरान बिना कोई BAIL No. 26491 of 2025
अनावश्यक स्थगन लिए नियत तिथि पर न्यायालय में उपस्थित होगा तथा परीक्षण में ईमानदारी से सहयोग करेगा।
iv. आवेदक जमानत पर रिहा होने के बाद जमानत की स्वतंत्रता का दुरूपयोग नही करेगा और किसी भी आपराधिक गतिविधि में लिप्त नहीं होगा न कोई अपराधिक कृत्य करेगा। v. आवेदक प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से मामले के तथ्यों से परिचित किसी भी व्यक्ति या पुलिस अधिकारियों को कोई प्रलोभन या धमकी नहीं देगा न ही उनसे कोई वायदा करेगा, जिसके कारण उन्हें न्यायालय में तथ्यों को उजागर करने से विरत रहना पड़े।
10. उपरोक्त शर्तोंं में से किसी के उल्लंघन के मामले में, परीक्षण न्यायालय आवेदक का यह अंतरिम जमानत नियमानुसार रद्द करने को स्वतंत्र है।
11. तद्नुसार, इस वाद को दिनांक 06.10.2025 को सूचीबद्ध किया जाय।
12. आवेदक के विद्वान अधिवक्ता द्वारा उक्त अग्रित नियत तिथि पर इस आदेश की अनुपालन आख्या न्यायालय में प्रस्तुत किया जायेगा।"
8. There is supplementary affidavit filed by the accused stating the transaction of Rs.7.5 lakhs and that the informant accepts that he has received Rs.7.5 lakhs. Complying with the condition shows the bonafide intention of accused.
9. The interim bail is confirmed and the bail application is accordingly allowed.
10. The applicant shall be released on the same bail bonds, as is furnished by the accused-applicant while enlarging on interim bail.
11. The accused-applicant shall cooperate in judicial process for fair and speedy disposal. September 29, 2026 Shivangi BAIL No. 26491 of 2025
(Avnish Saxena,J.) Digitally signed by :- SHIVANGI YADAV High Court of Judicature at Allahabad