Allahabad High Court
NA528/40814/2026 of MAHESH AND 5 OTHERS Vs STATE OF U.P. AND ANOTHER on 22 September 2026
JUDICATURE AT ALLAHABAD APPLICATION U/S 528 BNSS No. - 40814 of 2026 Court No. - 75 HON'BLE DR. GAUTAM CHOWDHARY, J. 1. आवेदकगण की ओर से धारा 528 बी.एन.एस.एस. के अन्तगर्त यह आवेदन पत्र,
HIGH COURT OF JUDICATURE AT ALLAHABAD
APPLICATION U/S 528 BNSS No. - 40814 of 2026
Court No. - 75
HON'BLE DR. GAUTAM CHOWDHARY, J.
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1. आवेदकगण की ओर से धारा 528 बी.एन.एस.एस. के अन्तर्गत यह आवेदन पत्र, आपराधिक वाद संख्या 57/2022, जो अपराध संख्या 53/2021 (उत्तर प्रदेश राज्य बनाम प्रयाग कुमार और अन्य) से उद्भूत है, के संबंध में, धारा 143, 186, 353, 269, 342, 188 भारतीय दंड संहिता एवं धारा 3 महामारी रोग अधिनियम, थाना बभानी, जिला सोनभद्र में प्रेषित आरोप पत्र दिनांकित 15.06.2021 जिसमें अपर सिविल जज (जू.डि.) / न्यायिक मजिस्ट्रेट, दुद्धी, सोनभद्र द्वारा पारित प्रसंज्ञान/तलबी आदेश दिनांकित 05.01.2022 को अपास्त करने एवं संपूर्ण कार्यवाही अपास्त करने हेतु योजित किया गया है।
2. आवेदकगण के विद्वान अधिवक्ता एवं विद्वान अपर शासकीय अधिवक्ता को सुना तथा पत्रावली का परिशीलन किया।
3. आवेदकगण के विद्वान अधिवक्ता ने तर्क प्रस्तुत किया कि आवेदक के विद्वान अधिवक्ता द्वारा तर्क प्रस्तुत किया गया कि आवेदक के खिलाफ कोई अपराध नही बनता है और वर्तमान अभियोग आवेदक का उत्पीड़न करने के उद्देश्य से दुर्भावनापूर्ण इरादे से शुरू किया गया है। उन्होंने अपने दावे के समर्थन में कुछ दस्तावेज़ और बयान प्रस्तुत किए, आवेदक के विरुद्ध कोई दस्तावेजी साक्ष्य नहीं है। उनका यह भी कथन है कि वह प्रार्थना खण्ड में की गई अन्य प्रार्थनाओं पर बल नहीं देना चाहते हैं, बल्कि अवर/विचारण न्यायालय में उन्मोचन प्रार्थना पत्र दाखिल करने की अनुमति चाहते हैं तथा उनके द्वारा दाखिल किए गए उन्मोचन प्रार्थना पत्र का निस्तारण करने को संबंधित अवर न्यायालय को निर्देश दिया जाय।
4. विद्वान अपर शासकीय अधिवक्ता ने उनके तर्को का प्रबल विरोध किया। मैंने विद्वान अधिवक्ताओं के तर्कोंं के परिप्रेक्ष्य में पत्रावली पर उपलब्ध साक्ष्य एवं प्रश्नगत आदेश का परिशीलन किया।
5. मैंने उभयपक्ष के विद्वान अधिवक्ताओं के तर्को पर विचार किया।
6. उभय पक्ष के विद्वान अधिवक्ताओं के तर्को पर विचारोपरान्त एवं अभिलेख के अवलोकन से इस स्तर पर यह नहीं कहा जा सकता है कि आवेदक के खिलाफ उपरोक्त धाराओं के अन्तर्गत कोई अपराध गठित नहीं होता है। आवेदक की ओर से जो तर्क प्रस्तुत किए गए हैं वे विवादित ताथ्यिक प्रश्न से संबंधित हैं, जिनके विषय में इस न्यायालय द्वारा धारा 528 बी.एन.एस.एस. के आवेदन पत्र पर कोई फैसला देना संभव नहीं है, चूंकि उक्त ताथ्यिक प्रश्नों का विनिश्चय विचारण न्यायालय द्वारा ही साक्ष्य आने के बाद किया जा सकता है। इस संबंध में माननीय उच्चतम न्यायालय द्वारा R.P. Kapur Vs. State of Punjab, AIR 1960 SC 866, State of Haryana Vs. Bhajan Lal, 1992 SCC (Cri.) 426, State of Bihar Vs. P.P. Sharma, 1992 SCC (Cri.) 192 and lastly Zandu Pharmaceutical Works Ltd. Vs. Mohd. Saraful Haq and another, (Para-10) 2005 SCC (Cri.) 283 में दिए गए निर्णयों में यह अवधारित किया गया है कि इस स्तर पर केवल प्रथम दृष्टया ही केस देखा जाना है। मुलजिमान का जो विवादित बचाव कथन है उस पर इस स्तर पर विचार नहीं किया जा सकता है। आवेदक/अभियुक्त का जो विवादित बचाव कथन है उस पर इस स्तर पर विचार नहीं किया जा सकता है।
6. इस स्तर पर, आवेदकगण के विद्वान अधिवक्ता द्वारा यह कथन किया गया कि आवेदकगण को उन्मोचन Versus Counsel for Applicant(s) : Dinesh Kumar, R.B. Pal Counsel for Opposite Party(s) : G.A. Mahesh And 5 Others .....Applicant(s) State of U.P. and Another .....Opposite Party(s)
प्रार्थना पत्र दाखिल करने की अनुमति दी जाये।
7. यह कहने या निर्देश पारित करने की आवश्यकता नहीं है, आवेदकगण विधि अनुसार उपलब्ध उपायों का लाभ उठाने के लिए स्वतंत्र हैं।
8. उक्त पर्यवेक्षण के साथ यह प्रार्थना पत्र अन्तिम रूप से निस्तारित किया जाता है।
(Dr. Gautam Chowdhary,J.) September 23, 2026 S.Mishra NA528 No. 40814 of 2026 2
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