Allahabad High Court

WRIC/28101/2026 of RINKI AND ANOTHER Vs STATE OF U.P. AND 3 OTHERS on 22 September 2026

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JUDICATURE AT ALLAHABAD WRIT - C No. - 28101 of 2026 Court No. - 75 HON'BLE DR. GAUTAM CHOWDHARY, J. 1- याचीगण के िवद्वान अिधवक्ता एवं िवद्वान सी०एस०सी० को सुना तथा पत्रावली

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HIGH COURT OF JUDICATURE AT ALLAHABAD WRIT - C No. - 28101 of 2026 Court No. - 75 HON'BLE DR. GAUTAM CHOWDHARY, J. 1- याचीगण के विद्वान अधिवक्ता एवं विद्वान सी०एस०सी० को सुना तथा पत्रावली का परिशीलन किया। 2- आदेश दिनांक 23.07.2026 के अनुपालन में आज विद्वान मुख्य स्थायी अधिवक्ता द्वारा दिशा-निर्देश दाखिल किया गया, जिसे पत्रावली पर "X" के रूप में संलग्न किया जाय। 3- याचीगण की ओर से इस याचिका के माध्यम से, याचीगण एक परमादेश रिट जारी करने की माँग कर रहे है, जिसमें प्रत्युत्तरदातागण को, याचीगण के पति और पत्नी के रूप में शान्तिपूर्ण जीवन (लिव इन रिलेशनशिप) में हस्तक्षेप न करने का निर्देश दिया जाय तथा संबंधित अधिकारियों को यह निर्देश देने की मांग की गयी है कि वे याचीगण को सुरक्षा प्रदान करें। 4- याचीगण के विद्वान अधिवक्ता ने तर्क प्रस्तुत किया कि याचीगण वयस्क है और उन्होंने अपनी मर्जी और सहमति से बिना किसी दबाव के एक दूसरे के साथ विवाह कर लिया है और दोनों पति-पत्नी के रूप में दाम्पत्य जीवन व्यतीत कर रह रहे हैं, याचीगण ने अपने उम्र के समर्थन में अपने-अपने हाईस्कूल का प्रमाण पत्र की प्रतिलिपि, याचिका के साथ संलग्न किया है, जिनके अवलोकन से यह स्पष्ट है कि दोनों याचीगण बालिग हैं याचिका में दिए गए कथन याचीगण के संयुक्त हलफनामों द्वारा समर्थित हैं। इसके अलावा यह भी अनुरोध किया गया है कि निजी प्रत्युत्तरदाता और परिवार के अन्य सदस्य याचीगण द्वारा किए गए इस विवाह से नाराज हो गए है और उनके द्वारा याचीगण को धमकी दी जा रही है और उन्हें परेशान किया जा रहा है जिसके कारण याचीगण के जीवन को गंभीर खतरा है। अग्रिम याचीगण के विद्वान अधिवक्ता द्वारा कथन किया गया कि याची सं० 1 पूर्व में शादीशुदा थी, किन्तु आपसी विचारों के न मिलने की वजह से उसने अपने पति से स्टाम्प/नोटरी पर तलाक के जरिए अलग हो चुके हैं एवं एक-दूसरे से कोई वास्ता-सरोकार नहीं है। याची सं० 1 अब याची सं० 2 के साथ रह रही है तथा याची सं० 2 की पत्नी का भी पूर्व में देहान्त हो चुका है। Versus Counsel for Petitioner(s) : Mohammad Zunaid Khan, Pulkit, Zaid Arshad Counsel for Respondent(s) : C.S.C. Rinki And Another .....Petitioner(s) State Of U.P. And 3 Others .....Respondent(s)

5- विद्वान सी०एस०सी० ने तर्क प्रस्तुत किया कि उनके द्वारा पूर्वादेश के अनुलपान में आवश्यक दिशा-निर्देश प्राप्त किया जा चुका है, जिससे यह स्पष्ट है कि याची सं० 1 की पूर्व में ही एक अन्य व्यक्ति श्री संजीव पुत्र श्री रामनिवास से शादी हो चुकी है तथा उनके मध्य विधिनुसार तलाक/विवाह विच्छेद नहीं हुआ है, मात्र स्टाम्प/नोटरी पर आपसी समझौते के आधार पर अलग रह रहे हैं, जो कि विधि के अनुकूल नहीं है तथा मान्य नहीं है। अन्ततः उन्होंने अनुरोध किया कि उनके द्वारा प्रस्तुत किए गए तर्कोंं को देखते हुए याचीगण वांछित अनुतोष प्राप्त करने के अधिकारी नहीं है एवं यह याचिका निरस्त किए जाने योग्य है, तद्नुसार याचीगण की याचिका निरस्त कर दी जाय। 6- पत्रावली पर उपलब्ध साक्ष्यों एवं विद्वान सी०एस०सी० के तर्कोंं के परिप्रेक्ष्य में प्रथमदृष्टया यह परिलक्षित हो रहा है कि याची सं० 1 का विधि-अनुरूप विवाह विच्छेद नहीं हुआ है। अतः समस्त तथ्यों एवं परिस्थितियों को देखते हुए एवं पत्रावली पर उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर याचीगण को उनके द्वारा वांछित अनुतोष प्रदान किए जाने का कोई औचित्य नहीं है तथा यह याचिका निरस्त किए जाने योग्य है। 7- तद्नुसार, वाद के गुण दोष पर बिना कोई टिप्पणी किए हुए यह याचिका निरस्त की जाती है। September 23, 2026 Pawan Kumar WRIC No. 28101 of 2026 2 (Dr. Gautam Chowdhary,J.) Digitally signed by :- PAWAN KUMAR High Court of Judicature at Allahabad

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