Allahabad High Court
WRIC/38385/2026 of SMT. KOMIT SIROHI AND ANOTHER Vs STATE OF U.P. AND 3 OTHERS on 22 September 2026
JUDICATURE AT ALLAHABAD WRIT - C No. - 38385 of 2026 Court No. - 75 HON'BLE DR. GAUTAM CHOWDHARY, J. 1- याचीगण के िवद्वान अिधवक्ता एवं िवद्वान सी०एस०सी० को सुना तथा पत्रावली
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HIGH COURT OF JUDICATURE AT ALLAHABAD WRIT - C No. - 38385 of 2026 Court No. - 75 HON'BLE DR. GAUTAM CHOWDHARY, J. 1- याचीगण के विद्वान अधिवक्ता एवं विद्वान सी०एस०सी० को सुना तथा पत्रावली का परिशीलन किया। 2- याचीगण की ओर से इस याचिका के माध्यम से, याचीगण एक परमादेश रिट जारी करने की माँग कर रहे है, जिसमें प्रत्युत्तरदातागण को, याचीगण के पति और पत्नी के रूप में शान्तिपूर्ण वैवाहिक जीवन में हस्तक्षेप न करने का निर्देश दिया जाय तथा संबंधित अधिकारियों को यह निर्देश देने की मांग की गयी है कि वे याचीगण को सुरक्षा प्रदान करें। 3- याचीगण के विद्वान अधिवक्ता ने तर्क प्रस्तुत किया कि याचीगण वयस्क है और उन्होंने अपनी मर्जी और सहमति से बिना किसी दबाव के एक दूसरे के साथ विवाह कर लिया है और दोनों पति-पत्नी के रूप में दाम्पत्य जीवन व्यतीत कर रह रहे हैं, याचीगण ने अपने उम्र के समर्थन में अपने-अपने हाईस्कूल का प्रमाण पत्र की प्रतिलिपि, याचिका के साथ संलग्न किया है, जिनके अवलोकन से यह स्पष्ट है कि दोनों याचीगण बालिग हैं याचिका में दिए गए कथन याचीगण के संयुक्त हलफनामों द्वारा समर्थित हैं। इसके अलावा यह भी अनुरोध किया गया है कि निजी प्रत्युत्तरदाता और परिवार के अन्य सदस्य याचीगण द्वारा किए गए इस विवाह से नाराज हो गए है और उनके द्वारा याचीगण को धमकी दी जा रही है और उन्हें परेशान किया जा रहा है जिसके कारण याचीगण के जीवन को गंभीर खतरा है। अग्रिम याचीगण के विद्वान अधिवक्ता द्वारा कथन किया गया कि याची सं० 1 पूर्व में शादीशुदा थी, किन्तु आपसी विचारों के न मिलने की वजह से उसने अपने पति से ई-स्टाम्प पर समझौतानामा के जरिए अलग हो चुके हैं एवं एक-दूसरे से कोई वास्ता-सरोकार नहीं है। याची सं० 1 अब याची सं० 2 के साथ रह रही है। उनके द्वारा विवाह पंजीयन हेतु ऑनलाइन आवेदन कर दिया गया है। 4- विद्वान सी०एस०सी० ने तर्क प्रस्तुत किया कि पूर्व में याची सं० 1 की पूर्व में ही एक अन्य व्यक्ति श्री अनुज कुमार पुत्र श्री बलराज सिंह से शादी हो चुकी है तथा उनके मध्य विधिनुसार तलाक/विवाह विच्छेद नहीं हुआ है, मात्र ई-स्टाम्प पर आपसी समझौते के आधार पर अलग रह रहे हैं, जो कि विधि के अनुकूल नहीं है तथा मान्य नहीं है। अन्ततः उन्होंने अनुरोध किया कि Versus Counsel for Petitioner(s) : Devendra Singh Counsel for Respondent(s) : C.S.C. Smt. Komit Sirohi And Another .....Petitioner(s) State Of U.P. And 3 Others .....Respondent(s)
उनके द्वारा प्रस्तुत किए गए तर्कोंं को देखते हुए याचीगण वांछित अनुतोष प्राप्त करने के अधिकारी नहीं है एवं यह याचिका निरस्त किए जाने योग्य है, तद्नुसार याचीगण की याचिका निरस्त कर दी जाय। 5- पत्रावली पर उपलब्ध साक्ष्यों एवं विद्वान सी०एस०सी० के तर्कोंं के परिप्रेक्ष्य में प्रथमदृष्टया यह परिलक्षित हो रहा है कि याची सं० 1 का विधि-अनुरूप विवाह विच्छेद नहीं हुआ है। अतः समस्त तथ्यों एवं परिस्थितियों को देखते हुए एवं पत्रावली पर उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर याचीगण को उनके द्वारा वांछित अनुतोष प्रदान किए जाने का कोई औचित्य नहीं है तथा यह याचिका निरस्त किए जाने योग्य है। 6- तद्नुसार, वाद के गुण दोष पर बिना कोई टिप्पणी किए हुए यह याचिका निरस्त की जाती है। September 23, 2026 Pawan Kumar WRIC No. 38385 of 2026 2 (Dr. Gautam Chowdhary,J.) Digitally signed by :- PAWAN KUMAR High Court of Judicature at Allahabad