Allahabad High Court

BAIL/27153/2026 of SEETU @ BANTI @ VIRESH KUMAR Vs STATE OF U.P. on 17 September 2026

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JUDICATURE AT ALLAHABAD CRIMINAL MISC. BAIL APPLICATION No. - 27153 of 2026 Court No. - 75 HON'BLE DR. GAUTAM CHOWDHARY, J. 1. सूची पुनरीिक्षत वतर्मान दािण्डक प्रकीणर् जमानत प्राथर्ना पत्र

HIGH COURT OF JUDICATURE AT ALLAHABAD

CRIMINAL MISC. BAIL APPLICATION No. - 27153 of 2026

Court No. - 75

HON'BLE DR. GAUTAM CHOWDHARY, J.

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1. सूची पुनरीक्षित वर्तमान दाण्डिक प्रकीर्ण जमानत प्रार्थना पत्र आवेदक सीतू उर्फ बंटी उर्फ वीरेश की ओर से मु०अ०सं० 346/2020, अन्तर्गत धारा धारा-147/ 148/ 149/ 307 भा.दं.सं. थाना- पहासू, जिला बुलंदशहर में जमानत पर मुक्त करने हेतु प्रस्तुत किया गया है।

2. यह आवेदक का द्वितीय जमानत आवेदन पत्र है, प्रथम जमानत आवेदन पत्र अन्य न्यायपीठ द्वारा दिनांक 03.04.2025 को निरस्त कर दिया गया था।

3. आवेदक के विद्वान अधिवक्ता एवं विद्वान अपर शासकीय अधिवक्ता को सुना तथा पत्रावली का परिशीलन किया।

4. आवेदक के विद्वान अधिवक्ता ने तर्क प्रस्तुत किया कि आवेदक को इस प्रकरण में गलत एवं फर्जी ढंग से झूठा फंसाया गया है, उसने कथित अपराध कारित नहीं किया है। पुनः उनका कथन है कि आवेदक की ओर से यह आश्वासन दिया गया है कि वह कानून की प्रक्रिया में सहयोग करने के लिए तैयार है और जब भी आवश्यकता होगी वह ईमानदारी से अदालत के समक्ष खुद को उपलब्ध कराएगा और उन सभी शर्तोंं को स्वीकार करने के लिए भी तैयार है जो न्यायालय उस पर अधिरोपित करेगी। आवेदक निर्दोष है तथा वह इस प्रकरण में दि० 03.03.2026 से कारागार में निरुद्ध है इसलिए आवेदक को जमानत पर छोड़ दिया जाय।

5. विद्वान अपर शासकीय अधिवक्ता ने अभियुक्त के जमानत का प्रबल विरोध करते हुए तर्क प्रस्तुत किया कि आवेदक के प्रथम जमानत आवेदन पत्र खारिज होने के बाद से आवेदक के विद्वान अधिवक्ता ऐसा कोई भी नया तथ्य प्रकाश में लाने में असमर्थ रहें हैं, जो आवेदक की जमानत का आधार बन सकता हो। इसप्रकार आवेदक को जमानत पर छोडने का कोई औचित्य नहीं है। आवेदक द्वारा कारित अपराध गंभीर व जघन्य प्रकृति का है। इसलिए अभियुक्त को Versus Counsel for Applicant(s) : Pankaj Kumar Tiwari Counsel for Opposite Party(s) : G.A. Seetu @ Banti @ Viresh Kumar .....Applicant(s) State of U.P. .....Opposite Party(s)

जमानत पर पर न छोड़ा जाय।

6. वर्तमान मामले में जमानत संबंधी विधि के स्थापित सिद्धांतों को ध्यान में रखते हुए एवं उभय पक्षकारों के विद्वान अधिवक्ताओं के कथनों, आरोपों की प्रकृति, आवेदक की भूमिका और इस मामलें के इस तथ्य को ध्यान में रखते हुए गुण-दोष पर बिना कोई विचार व्यक्त किए यह जमानत आवेदन पत्र स्वीकार किए जाने योग्य नहीं है। अतः यह जमानत आवेदन पत्र अस्वीकार किया जाता है।

7. तद्नुसार, यह जमानत आवेदन पत्र निरस्त किया जाता है। September 18, 2026 S.Mishra BAIL No. 27153 of 2026 2 (Dr. Gautam Chowdhary,J.) Digitally signed by :- SHASHI MISHRA High Court of Judicature at Allahabad

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