Allahabad High Court
NABAIL/5880/2026 of POONAM DEVI Vs STATE OF U.P. AND ANOTHER on 17 September 2026
JUDICATURE AT ALLAHABAD CRIMINAL MISC. ANTICIPATORY BAIL APPLICATION U/S 482 BNSS No. - 5880 of 2026 Court No. - 75 HON'BLE DR. GAUTAM CHOWDHARY, J. 1. वतर्मान दािण्डक प्रकीणर् अिग्रम जमानत प्राथर्ना पत्र
HIGH COURT OF JUDICATURE AT ALLAHABAD
CRIMINAL MISC. ANTICIPATORY BAIL APPLICATION U/S 482 BNSS No.
Court No. - 75
HON'BLE DR. GAUTAM CHOWDHARY, J.
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1. वर्तमान दाण्डिक प्रकीर्ण अग्रिम जमानत प्रार्थना पत्र आवेदिका श्रीमती पूनम देवी की ओर से मु०अ०स० 686/2014 अन्तर्गत धारा 313/ 323/ 498ए/ 504/ 506 भा.दं.सं. एवं धारा 3/4 दहेज प्रतिषेध अधिनियम, थाना बघौचघाट, जिला देवरिया में अग्रिम जमानत पर मुक्त करने हेतु प्रस्तुत किया गया है।
2. आवेदिका के विद्वान अधिवक्ता एवं विद्वान अपर शासकीय अधिवक्ता को सुना तथा पत्रावली का परिशीलन किया।
3. आवेदिका का यह द्वितीय अग्रिम जमानत आवेदन पत्र है, प्रथम अग्रिम जमानत आवेदन पत्र दिनांक 22.01.2025 को अतरिम अग्रिम जमानत आरोप पत्र प्रेषित होने तक प्रदान किया गया था। बाद में यह दिनांक 25.03.2026 को इस न्यायपीठ द्वारा अदम पैरवी पर खारिज कर दी गयी थी।
4. आवेदिका के विद्वान अधिवक्ता ने तर्क प्रस्तुत किया कि आवेदिका निर्दोष है, उसे उपरोक्त धाराओं में द्वेषवश तंग व परेशान करने की नियत से आलिप्त किया गया है, उसे आशंका है कि उसे उपरोक्त वर्णित मामले में गिरफ्तार किया जा सकता है, जबकि उसके विरूद्ध कोई विश्वसनीय साक्ष्य नहीं है। आवेदिका दारा प्राथमिकी में दर्शित उपरोक्त धाराओं का अपराध कारित नहीं किया गया है। आवेदिका की ओर से यह भी आश्वासन दिया गया है कि वह कानून की प्रक्रिया में सहयोग करने के लिए तैयार है और जब भी आवश्यकता होगी वह ईमानदारी से न्यायालय के समक्ष खुद को उपलब्ध कराएगा और उन सभी शर्तोंं को स्वीकार करने के लिए भी तैयार है जो न्यायालय उस पर अधिरोपित करेगी।
5. विद्वान अपर शासकीय अधिवक्ता द्वारा यह तर्क प्रस्तुत किया गया कि आवेदिका को इस न्यायालय की अन्य न्यायपीठ द्वारा दिनाँक 22.01.2025 को अन्तरिम अग्रिम जमानत कुछ शर्तोंं के साथ प्रदान की गयी थी, जिसका आवेदिका द्वारा अनुपालन नहीं किया जा रहा है। इस प्रकार आवेदिका द्वारा पूर्व में दिये गये अन्तरिम अग्रिम जमानत एवं जमानत के साथ लगायी Versus Counsel for Applicant(s) : Manvendra Narain Pathak, Ram Krishna Paramhans Singh Counsel for Opposite Party(s) : G.A. Poonam Devi .....Applicant(s) State of U.P. and Another .....Opposite Party(s)
गयी शर्तोंं का लगातार उल्लंघन किया जा रहा है। जिससे यह परिलक्षित हो रहा है कि जिससे सत्र परीक्षण के निस्तारण में अनावश्यक विलम्ब हो रहा है। अभियुक्ता द्वारा कारित अपराध गंभीर प्रकृति का है इसलिए आवेदिका को अग्रिम जमानत पर मुक्त किये जाने का कोई औचित्य प्रतीत नहीं होता है अतः अभियुक्ता का अग्रिम जमानत आवेदन पत्र निरस्त किया जाय। अभियुक्ता द्वारा कारित अपराध गंभीर प्रकृति का है इसलिए आवेदिका को अग्रिम जमानत पर मुक्त किये जाने का कोई औचित्य प्रतीत नहीं होता है अतः अभियुक्ता का अग्रिम जमानत आवेदन पत्र निरस्त किया जाय।
6. यह कहा जा सकता है कि Siddharam Satlingappa Mhetre v. State of Maharashtra, (2011) 1 SCC 694, के मामले में माननीय उच्चतम न्यायालय ने माना है कि अग्रिम जमानत पर निर्णय करते समय न्यायालय को आरोप की प्रकृति और गंभीरता, अभियुक्त का पूर्ववृत्त, अभियुक्त के न्याय से भागने की संभावना पर विचार करना चाहिए तथा न्यायालय को अभियुक्त के विरुद्ध उपलब्ध संपूर्ण सामग्री का सावधानीपूर्वक मूल्यांकन करना चाहिए तथा अभियुक्त की सटीक भूमिका को भी ध्यान में रखना चाहिए।
7. वर्तमान मामले में अग्रिम जमानत संबंधी विधि के स्थापित सिद्धांतों को ध्यान में रखते हुए और पक्षकारों के विद्वान अधिवक्ताओं के कथनों, आरोपों की प्रकृति, आवेदिका की भूमिका और मामले के सभी तथ्यों एवं परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए एवं सम्पूर्ण दस्तावेजों के अवलोकन से यह विदित होता है कि आवेदिका द्वारा पूर्व में दिये गये अंतरिम आदेश का दुर्पयोग किया जा रहा है। अतः मामले के गुण-दोष पर बिना कोई विचार व्यक्त किए यह अग्रिम जमानत आवेदन पत्र स्वीकार किए जाने योग्य नहीं है, तद्रुसार आवेदिका का अग्रिम जमानत आवेदन पत्र अस्वीकार किया जाता है।
8. उपरोक्तानुसार वाद के गुण-दोष पर टिप्पणी किये बगैर यह अग्रिम जमानत प्रार्थनापत्र निरस्त किया जाता है।
9. इस वाद में यदि कोई अंतरिम आदेश हो, तो वह स्वतः समाप्त समझा जाए।
10. आवेदिका नियमित जमानत प्रार्थनापत्र दाखिल करने हेतु स्वतंत्र है। कार्यालय को निर्देशित किया जाता है कि इस आदेश की एक प्रतिलिपि अविलम्ब संबंधित विचारण न्यायालय के भेजना सुनिश्चित करें। September 18, 2026 S.Mishra NABAIL No. 5880 of 2026
(Dr. Gautam Chowdhary,J.) Digitally signed by :- SHASHI MISHRA High Court of Judicature at Allahabad