Allahabad High Court

NA528/39497/2026 of LAKHAN SINGH AND ANOTHER Vs STATE OF U.P. AND ANOTHER on 16 September 2026

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JUDICATURE AT ALLAHABAD APPLICATION U/S 528 BNSS No. - 39497 of 2026 Court No. - 75 HON'BLE DR. GAUTAM CHOWDHARY, J. 1. आवेदक की ओर से धारा 528 बी.एन.एस.एस. के अन्तगर्त यह आवेदन पत्र, मु०अ०सं०

HIGH COURT OF JUDICATURE AT ALLAHABAD

APPLICATION U/S 528 BNSS No. - 39497 of 2026

Court No. - 75

HON'BLE DR. GAUTAM CHOWDHARY, J.

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1. आवेदक की ओर से धारा 528 बी.एन.एस.एस. के अन्तर्गत यह आवेदन पत्र, मु०अ०सं० 59 सन 2024 व 60/2024, अन्तर्गत धारा 191(2), 191(3), 190, 109(1), 352, 351(2) भा०दं०वि० व धारा 3/9/2025 आर्म्स एक्ट, थाना बमरौली, जिला आगरा में प्रेषित आरोप पत्र, दिनांकित 22.07.2025 से उद्भूत वाद सं० 9468/2026 में अपर मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट, कोर्ट सं० 3, आगरा द्वारा पारित प्रंसज्ञान/तलबी आदेश दि० 01.07.2026 के अपास्त करने हेतु योजित किया गया है।

2. आवेदक के विद्वान अधिवक्ता एवं विद्वान अपर शासकीय अधिवक्ता को सुना तथा पत्रावली का परिशीलन किया।

3. आवेदक के विद्वान अधिवक्ता ने तर्क प्रस्तुत किया कि आवेदक निर्दोष हैं, आवेदक ने तथाकथित अपराध कारित नहीं किया है तथा संबंधित अवर/विचारण न्यायालय द्वारा पारित प्रश्नगत आदेश सकारण एवं विधि सम्मत नहीं हैं, आवेदक के विरूद्ध उपरोक्त धाराओं का कोई अपराध नहीं बनता है। किंतु पुनः उनका यह भी कथन है कि वह प्रार्थना खण्ड में की गई अन्य प्रार्थनाओं पर बल नहीं डालना चाहते हैं, बल्कि अवर/विचारण न्यायालय में उन्मोचन प्रार्थना पत्र दाखिल करने की अनुमति चाहते हैं तथा उनके द्वारा दाखिल किए गए उन्मोचन प्रार्थना पत्र का निस्तारण करने को संबंधित अवर न्यायालय को निर्देश दिया जाय।

4. विद्वान अधिवक्ता अपर शासकीय अधिवक्ता द्वारा आवेदक के तर्कोंं का प्रबल विरोध किया गया ।

5. उभय पक्ष के विद्वान अधिवक्तागण के तर्कोंं को सुनने एवं पत्रावली पर उपलब्ध अभिलेखों के अवलोकन से इस स्तर पर यह नहीं कहा जा सकता है कि आवेदक के खिलाफ उपरोक्त धाराओं के अन्तर्गत कोई अपराध गठित नहीं होता है। आवेदक की ओर से जो तर्क प्रस्तुत किए Versus Counsel for Applicant(s) : Ajay Kumar Pathak, Rahul Pandey Counsel for Opposite Party(s) : G.A. Lakhan Singh And Another .....Applicant(s) State of U.P. and Another .....Opposite Party(s)

गए हैं वे विवादित ताथ्यिक प्रश्न से संबंधित हैं, जिनके विषय में इस न्यायालय द्वारा धारा 528 बी.एऩ.एस.एस. के आवेदन पत्र पर कोई फैसला देना संभव नहीं है, चूंकि उक्त ताथ्यिक प्रश्नों का विनिश्चय विचारण न्यायालय द्वारा ही साक्ष्य आने के बाद किया जा सकता है। इस संबंध में माननीय उच्चतम न्यायालय द्वारा R.P. Kapur Vs. State of Punjab, AIR 1960 SC 866, State of Haryana Vs. Bhajan Lal, 1992 SCC (Cri.) 426, State of Bihar Vs. P.P. Sharma, 1992 SCC (Cri.) 192 and lastly Zandu Pharmaceutical Works Ltd. Vs. Mohd. Saraful Haq and another, (Para-10) 2005 SCC (Cri.) 283 में दिए गए निर्णयों में यह अवधारित किया गया है कि इस स्तर पर केवल प्रथम दृष्टया ही केस देखा जाना है। आवेदक/अभियुक्त का जो विवादित बचाव कथन है उस पर इस स्तर पर विचार नहीं किया जा सकता है।

6. हालाँकि, यदि आवेदक चाहें तो संबंधित विचारण न्यायालय के समक्ष एक माह के अंदर उन्मोचन प्रार्थना पत्र दाखिल कर सकते हैं। यदि, आवेदक द्वारा एक माह के अंदर विचारण न्यायालय में उन्मोचन प्रार्थना पत्र दाखिल किया जाता है तो संबंधित विचारण न्यायालय द्वारा उभय पक्षों को सुनकर, न्यायोचित आदेश के माध्यम से उसका निस्तारण उपलब्ध साक्ष्य के आधार पर यथासंभव 02 माह के अंदर किया जाएगा।

7. उक्त निर्देशों के साथ यह प्रार्थना पत्र अन्तिम रूप से निस्तारित किया जाता है। September 17, 2026 CP.sahani NA528 No. 39497 of 2026 2 (Dr. Gautam Chowdhary,J.) Digitally signed by :- CHANDRA PRAKASH SAHANI High Court of Judicature at Allahabad

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