Allahabad High Court

WRIC/35784/2026 of PRIYA DEVI AND ANOTHER Vs STATE OF UTTAR PRADESH AND 5 OTHERS on 8 September 2026

Cites 0, Cited by 0

JUDICATURE AT ALLAHABAD WRIT - C No. - 35784 of 2026 Court No. - 75 HON'BLE DR. GAUTAM CHOWDHARY, J. 1- याचीगण के िवद्वान अिधवक्ता एवं िवद्वान सी०एस०सी० को सुना तथा पत्रावली

Citations and Judicial Treatment

No citing decisions in the index yet

Cited by

0

Decisions in the index citing it

Cites

0

Decisions referred to

In this index

0

Of the decisions it cites

Overruled / Questioned

0

No negative treatment found

Loading the citing and cited decisions…

HIGH COURT OF JUDICATURE AT ALLAHABAD WRIT - C No. - 35784 of 2026 Court No. - 75 HON'BLE DR. GAUTAM CHOWDHARY, J. 1- याचीगण के विद्वान अधिवक्ता एवं विद्वान सी०एस०सी० को सुना तथा पत्रावली का परिशीलन किया। 2- इस याचिका के माध्यम से, याचीगण एक परमादेश रिट जारी करने की मांग कर रहे हैं, जिसमें प्रत्युत्तरदातागण को लिव-इन-रिलेशनशिप में याचिकाकर्ताओं के शांतिपूर्ण जीवन में हस्तक्षेप न करने का निर्देश दिया जाए एवं संबंधित अधिकारियों को यह निर्देश देने की मांग की गयी है कि वे याचीगण को सुरक्षा प्रदान करें। 3- याचीगण के विद्वान अधिवक्ता ने तर्क प्रस्तुत किया कि याचीगण वयस्क हैं और वे अपनी मर्जी और सहमति से बिना किसी दबाव के एक-दूसरे के साथ लिव-इन-रिलेशनशिप रह रहे हैं, याचीगण ने अपने उम्र के समर्थन में अपने-अपने आधार कार्ड की प्रतिलिपि, याचिका के साथ संलग्न किया है, जिनके अवलोकन से यह स्पष्ट है कि दोनों याचीगण बालिग हैं, याचिका में दिए गए कथन याचीगण के संयुक्त हलफनामों द्वारा समर्थित हैं।याचीगण द्वारा स्वेच्छा से एक-दूसरे के साथ लिव-इन-रिलेशनशिप में रह रहे है। इसके अलावा यह भी अनुरोध किया गया है कि निजी प्रत्युत्तरदाता और परिवार के अन्य सदस्य याचीगण द्वारा एक साथ रहने के कारण नाराज हो गए हैं और उनके द्वारा याचीगण को धमकी दी जा रही है और उन्हें परेशान किया जा रहा है जिसके कारण याचीगण के जीवन को गंभीर खतरा है। 4- विद्वान ए०सी०एस०सी० ने तर्क प्रस्तुत किया कि याची सं० 1 पूर्व से ही शादीशुदा महिला है। इस स्तर पर उन्होंने न्यायालय का ध्यान इस ओर भी आकृष्ट किया कि याची सं० 1 द्वारा अपने तलाक/विवाह-विच्छेद के संबंध में कोई कथन नहीं किया गया और न ही कोई इससे संबंधित दस्तावेज प्रस्तुत किया गया, जिससे प्रतीत होता है कि याची सं० 1 का उसकी पति से विवाह-विच्छेद नहीं हुआ है।उन्होंने अपने तर्क के समर्थन में न्यायालय का ध्यान इस न्यायालय की द्वयपीठ द्वारा निर्णीत वाद Asha Devi and Another vs. State of U.P. and others passed in Writ (C) No. 18743 of 2020 की नजीर एवं अन्य बहुत सी Versus Counsel for Petitioner(s) : Imtyaz Ahmad Counsel for Respondent(s) : C.S.C. Priya Devi And Another .....Petitioner(s) State Of Uttar Pradesh And 5 Others .....Respondent(s)

नजीरों की ओर आकृष्ट किया। अन्ततः उन्होंने अनुरोध किया कि उनके द्वारा प्रस्तुत किए गए तर्को एवं नजीरों को देखते हुए याचीगण वांछित अनुतोष प्राप्त करने के अधिकारी नहीं है एवं यह याचिका निरस्त किए जाने योग्य है, तद्नुसार याचीगण की याचिका निरस्त कर दी जाय। 5- विद्वान ए०सी०एस०सी०गण के तर्को के परिप्रेक्ष्य में इस न्यायालय की द्वयपीठ द्वारा निर्णीत वाद Asha Devi and Another vs. State of U.P. and others passed in Writ (C) No. 18743 of 2020 की को देखते हुए एवं पत्रावली पर उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर याचीगण को उनके द्वारा वांछित अनुतोष प्रदान किए जाने का कोई औचित्य नहीं है तथा यह याचिका निरस्त किए जाने योग्य है। 6- तद्नुसार वाद के गुण दोष पर बिना कोई टिप्पणी किए हुए यह याचिका निरस्त की जाती है।

September 9, 2026 CP.sahani WRIC No. 35784 of 2026 2 (Dr. Gautam Chowdhary,J.) Digitally signed by :- CHANDRA PRAKASH SAHANI High Court of Judicature at Allahabad

You have used today's free searches. Sign in, for free, to keep searching without a limit.

Compass reads the judgments for you and finds the paragraphs for and against your question. Sign in to use it.

My Vault follows judgments for you and records every later decision that cites them. Sign in to keep one.

Sign in to download the court's PDF. The full text stays free to read here.

Sign in, for free, to download the court copy. Reading the full text here stays open to everyone.

Search and read Indian judgments without limits, save them to My Vault and find the relevant paragraphs with Compass.

Open the sign-in page instead