Allahabad High Court
NABAIL/8863/2026 of USMAN ALI Vs STATE OF U.P. on 7 September 2026
JUDICATURE AT ALLAHABAD CRIMINAL MISC. ANTICIPATORY BAIL APPLICATION U/S 482 BNSS No. - 8863 of 2026 Court No. - 75 HON'BLE DR. GAUTAM CHOWDHARY, J. 1. सूची पुनरीिक्षत वतर्मान दािण्डक प्रकीणर् अिग्रम
HIGH COURT OF JUDICATURE AT ALLAHABAD
CRIMINAL MISC. ANTICIPATORY BAIL APPLICATION U/S 482 BNSS No.
Court No. - 75
HON'BLE DR. GAUTAM CHOWDHARY, J.
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1. सूची पुनरीक्षित वर्तमान दाण्डिक प्रकीर्ण अग्रिम जमानत प्रार्थना पत्र आवेदक उसमान अली की ओर से मु०अ०स० 67/2025 अन्तर्गत धारा 318(4)/ 338/ 336(3)/ 340(2) एवं 61(2) बी.एन.एस., थाना कोतवाली, जिला मुरादाबाद में अग्रिम जमानत पर मुक्त करने हेतु प्रस्तुत किया गया है।
2. आवेदक के विद्वान अधिवक्ता की तरफ से विद्वान अधिवक्ता एवं विद्वान अपर शासकीय अधिवक्ता को सुना तथा पत्रावली का परिशीलन किया।
3. आवेदक के विद्वान अधिवक्ता ने तर्क प्रस्तुत किया कि आवेदक निर्दोष है, उसे उपरोक्त धाराओं में द्वेषवश तंग व परेशान करने की नियत से आलिप्त किया गया है, उसे आशंका है कि उसे उपरोक्त वर्णित मामले में गिरफ्तार किया जा सकता है, जबकि उसके विरूद्ध कोई विश्वसनीय साक्ष्य नहीं है। उनका यह भी कथन है कि आवेदक के विरुद्ध अभी तक कोई भी बाध्यकारी प्रक्रिया नहीं अपनाई गयी है एवं आवेदक की ओर से यह भी आश्वासन दिया गया है कि वह कानून की प्रक्रिया में सहयोग करने के लिए तैयार है और जब भी आवश्यकता होगी वह ईमानदारी से न्यायालय के समक्ष खुद को उपलब्ध कराएगा और उन सभी शतों को स्वीकार करने के लिए भी तैयार है जो न्यायालय उस पर अधिरोपित करेगी।
4. विद्वान अपर शासकीय अधिवक्ता द्वारा यह तर्क प्रस्तुत किया गया कि आवेदक के विरुद्ध पर्याप्त साक्ष्य के आधार पर पुलिस द्वारा आवेदक के विरुद्ध संबंधित विचारण न्यायालय में आरोपपत्र प्रेषित किया गया है। अभियुक्त द्वारा कारित अपराध गंभीर प्रकृति का है आवेदक को अग्रिम जमानत पर मुक्त किये जाने का कोई औचित्य प्रतीत नहीं होता है। अतः अभियुक्त का अग्रिम जमानत आवेदन पत्र निरस्त किया जाय। Versus Counsel for Applicant(s) :
Counsel for Opposite Party(s) :
Usman Ali .....Applicant(s) State of U.P. .....Opposite Party(s)
5. यह कहा जा सकता है कि Siddharam Satlingappa Mhetre v. State of Maharashtra, (2011) 1 SCC 694, के मामले में माननीय उच्चतम न्यायालय ने माना है कि अग्रिम जमानत पर निर्णय करते समय न्यायालय को आरोप की प्रकृति और गंभीरता, अभियुक्त का पूर्ववृत्त, अभियुक्त के न्याय से भागने की संभावना पर विचार करना चाहिए तथा न्यायालय को अभियुक्त के विरुद्ध उपलब्ध संपूर्ण सामग्री का सावधानीपूर्वक मूल्यांकन करना चाहिए तथा अभियुक्त की सटीक भूमिका को भी ध्यान में रखना चाहिए।
6. वर्तमान मामले में अग्रिम जमानत संबंधी विधि के स्थापित सिद्धांतों को ध्यान में रखते हुए और पक्षकारों के विद्वान अधिवक्ताओं के कथनों, आरोपों की प्रकृति, आवेदक की भूमिका और मामले के सभी तथ्यों एवं परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए चूंकि संबंधित विचारण न्यायालय में आवेदक के विरुद्ध साक्ष्य पाये जाने के उपरान्त आरोप पत्र प्रेषित किया जा चुका है, अतः मामले के गुण-दोष पर बिना कोई विचार व्यक्त किए यह अग्रिम जमानत आवेदन पत्र स्वीकार किए जाने योग्य नहीं है, तद्रुसार आवेदक का अग्रिम जमानत आवेदन पत्र अस्वीकार किया जाता है।
7. उपरोक्तानुसार वाद के गुण-दोष पर टिप्पणी किये बगैर यह अग्रिम जमानत प्रार्थनापत्र निरस्त किया जाता है।
8. इस वाद में यदि कोई अंतरिम आदेश हो, तो वह स्वतः समाप्त समझा जाए।
9. कार्यालय को निर्देशित किया जाता है कि इस आदेश की प्रतिलिपि संबंधित विचारण न्यायालय को अविलम्ब प्रेषित करें। September 8, 2026 S.Mishra NABAIL No. 8863 of 2026
(Dr. Gautam Chowdhary,J.) Digitally signed by :- SHASHI MISHRA High Court of Judicature at Allahabad