Allahabad High Court
NA528/36131/2026 of SHAITAN SINGH YADAV AND 3 OTHERS Vs STATE OF U.P. AND ANOTHER on 7 September 2026
JUDICATURE AT ALLAHABAD APPLICATION U/S 528 BNSS No. - 36131 of 2026 Court No. - 75 HON'BLE DR. GAUTAM CHOWDHARY, J. 1. आवेदकगण की ओर से धारा 528 भारतीय सुरक्षा संिहता के अंतगर्त यह आवेदन
HIGH COURT OF JUDICATURE AT ALLAHABAD
APPLICATION U/S 528 BNSS No. - 36131 of 2026
Court No. - 75
HON'BLE DR. GAUTAM CHOWDHARY, J.
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1. आवेदकगण की ओर से धारा 528 भारतीय सुरक्षा संहिता के अंतर्गत यह आवेदन पत्र, मु०अ०सं० 264/2026, आवेदक सं० 1 को अंतर्गत धारा 30 आर्म्स एक्ट एवं आवेदक सं० 2 को अंतर्गत धारा 336 भा०दं०वि० तथा आवेदक सं० 3 व 4 को अंतर्गत धारा 504 भा०दं०वि०, थाना कोतवाली जिला आजमगढ़ के विरूद्ध प्रेषित आरोप पत्र, दिनांकित 01.02.2025 से उद्भूत दाण्डिक वाद सं० 264/2026 (State vs. Saitan Singh and others) में मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट, एटा द्वारा पारित तलबी/प्रसंज्ञान आदेश दि० 03.01.2026 तथा इस वाद की संपूर्ण कार्यवाही को अपास्त करने हेतु योजित किया गया है।
2. आवेदकगण के विद्वान अधिवक्ता एवं विद्वान अपर शासकीय अधिवक्ता को सुना तथा पत्रावली का परिशीलन किया।
3. आवेदकगण के विद्वान अधिवक्ता का तर्क है कि आवेदक के विरुद्ध कोई अपराध प्रकट नहीं होता है और वर्तमान अभियोजन दुर्भावनापूर्ण इरादे से उत्पीड़न करने के उद्देश्य से संस्थित किया गया है। यहां प्रासंगिक तथ्य है कि प्रथम सूचना रिपोर्ट लगभग दो वर्ष उपरांत पंजीकृत कराया गया है, इसका कोई समुचित स्पष्टीकरण नहीं दिया गया है। कथित शस्त्र लाइसेंसशुदा है तथा उससे किसी भी व्यक्ति के विरूद्ध चिन्हित फायरिंग किया गया है। उन्होंने अपने तर्क के समर्थन में कुछ दस्तावेजों और बयानों की ओर ध्यान आकर्षित किया।
4. विद्वान अपर शासकीय अधिवक्ता ने कथन किया कि प्रश्नगत मामलें में समुचित विवेचना के उपरांत विचारण न्यायालय द्वारा पर्याप्त आधार पर प्रश्नगत आदेश पारित किया है तथा आवेदकगण के विद्वान अधिवक्ता द्वारा प्रश्नगत आदेश को अपास्त करने हेतु जो तर्क प्रस्तुत किए गए वे बलहीन है।
5. इस चरण पर, आवेदकगण के विद्वान अधिवक्ता द्वारा उठाए गए तर्क में तथ्यात्मक विवाद का Versus Counsel for Applicant(s) : Akhilesh Kumar Khare, Raman Singh Counsel for Opposite Party(s) : G.A. Shaitan Singh Yadav And 3 Others .....Applicant(s) State of U.P. and Another .....Opposite Party(s)
न्यायिक निर्णय (adjudication) और साक्ष्य का मूल्यांकन (appraisal) शामिल है।
6. उभय पक्ष के विद्वान अधिवक्ता के तर्कोंं एवं अभिलेख पर मौजूद सामग्री के अवलोकन से और इस चरण पर मामले के तथ्यों को देखते हुए यह नहीं कहा जा सकता कि आवेदक के विरुद्ध कोई अपराध नहीं बनता है। बार (न्यायालय) के समक्ष किए गए सभी अभिवचन (submissions) तथ्य के विवादित प्रश्नों से संबंधित हैं, जिनका इस न्यायालय द्वारा धारा 528 बी.एन.एन.एस. के अंतर्गत न्यायिक निर्णय नहीं किया जा सकता है। इस चरण पर केवल प्रथम दृष्टया (prima facie) मामला देखा जाना है, जैसा कि माननीय उच्चतम न्यायालय द्वारा आर.पी. कपूर बनाम पंजाब राज्य, ए.आई.आर. 1960 एस.सी. 866, हरियाणा राज्य बनाम भजन लाल, 1992 एससीसी (क्रिमिनल) 426, बिहार राज्य बनाम पी.पी. शर्मा, 1992 एससीसी (क्रिमिनल) 192 और अंत में झंडू फार्मास्युटिकल वर्क्स लिमिटेड बनाम मोहम्मद शराफुल हक एवं अन्य (पैरा-10) 2005 एससीसी (क्रिमिनल) 283 के मामलों में प्रतिपादित कानून के आलोक में स्पष्ट किया गया है। इसलिए, इस मामले की संपूर्ण कार्यवाही को निरस्त करने की प्रार्थना को अस्वीकार किया जाता है।
7. तद्नुसार, यह आवेदन पत्र निरस्त किया जाता है।
8. कार्यालय को निर्देश दिया जाता है कि इस आदेश की एक प्रतिलिपि संबंधित अवर न्यायालय को अविलम्ब भेजना सुनिश्चित किया जाय।
9. यदि इस वाद में कोई अंतरिम आदेश हो तो, उसे समाप्त समझा जाय। September 8, 2026 CP.sahani NA528 No. 36131 of 2026 2 (Dr. Gautam Chowdhary,J.) Digitally signed by :- CHANDRA PRAKASH SAHANI High Court of Judicature at Allahabad