Allahabad High Court

A482/31300/2018 of ASHUTOSH DWIVEDI Vs STATE OF U.P. AND ANR on 11 May 2026

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JUDICATURE AT ALLAHABAD APPLICATION U/S 482 No. - 31300 of 2018 Court No. - 82 HON'BLE DR. GAUTAM CHOWDHARY, J. 1. आवेदक की ओर से धारा 528 भारतीय सुरक्षा संिहता के अंतगर्त यह आवेदन पत्र,

HIGH COURT OF JUDICATURE AT ALLAHABAD

APPLICATION U/S 482 No. - 31300 of 2018

Court No. - 82

HON'BLE DR. GAUTAM CHOWDHARY, J.

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1. आवेदक की ओर से धारा 528 भारतीय सुर्षा संिहता के अंतगर्त यह आवेदन प्ऴ, मु०अ०सं० 697/2016, अंतगर्त धारा 498ए, 304बी भारतीय दण्ड संिहता व धारा 3/4 दहेज ्ऺ ितषेध अिधिनयम, थाना धूमनगंज, िजला ्ऺयागराज से उ्यूत स्ऴ परी्षण संख्या 50 वषर् 2017 (राज्य बनाम ्शीमती ्ऺेम नारायण व आिद), में अपर स्ऴ न्यायाधीश, एफ.टी.सी. क्ष सं० 20, इलाहाबाद ्षारा पािरत आदेश िद० 02.05.2018 को अपास्त करने हेतु योिजत िकया गया है।

2. आवेदक ्षारा न्यायालय से अनुरोध िकया गया िक उन्हें ्ि ि्वगत रूप से बहस करने की अनुमित ्ऺदान की जाय, जबिक वाद सूची के अनुसार उनकी ओर से अिधव्वा िनयु्व है।

3. आवेदक की ओर से उपिस्थत िव्षान अिधव्वा ्षारा उपयुर््व अनुरोध पर कोई आपि्त ्ऺकट नहीं की गयी ।

4. आवेदक ्शी आशुतोष ि्षवेदी ्ि ि्वगत रूप से तथा िव्षान अपर शासकीय अिधव्वा को सुना तथा प्ऴावली का पिरशीलन िकया।

5. आवेदक के िव्षान अिधव्वा ने तकर् ्ऺस्तुत िकया िक ्ऺथम सूचनाकतार् ने आवेदक सिहत पांच ्ि ि्वयों के िवरु्ध ्ऺथम सूचना िरपोटर् दजर् कराई, िजसमें यह आरोप लगाया गया िक उनकी पु्ऴी की मृत्यु दहेज के कारण हुई है। उपरो्व आरोपों के साथ ्ऺथम सूचना िरपोटर्, थाना धूमनगंज, जनपद इलाहाबाद में िदनांक 09-10-2016 को अपराध संख्या 697/2016, धारा 498A, 304B आई.पी.सी. एवं 3/4 दहेज ्ऺितषेध अिधिनयम के अंतगर्त पंजीकृत की गई। मृतक का शव परी्षण (पोस्टमाटर्म) िदनांक 10-10-2016 को िकया गया था और मृत्यु का कारण 'एंटी-मॉटर्म हैंिगग' (मृत्यु पूवर् फांसी) सुिनि्ात िकया गया था, हालांिक, मुंह से झाग आने के कारण िवषा्वता (जहर) की आशंका थी, इसिलए िवसरा सुरि्षत रखा गया Versus Counsel for Applicant(s) : Ashutosh Tripathi, Gopal Khare, Udai Narain Khare Counsel for Opposite Party(s) : G.A. Ashutosh Dwivedi .....Applicant(s) State Of U.P. And Anr .....Opposite Party(s)

था। सवर््ऺथम यह उल्लेख करना आवश्यक है िक िववेचना अिधकारी ने अत्यंत लापरवाह तरीके से िववेचना संचािलत की और मामले के महत्वपूणर् पहलुओं की जांच िकए िबना ही अत्यंत सतही ा़ंग से बयान दजर् िकए। इसी ्वम में, िववेचना अिधकारी ने अत्यंत लापरवाह तरीके से िववेचना समाप्त कर दी और आरोप प्ऴ दािखल कर िदया, िजसे िदनांक 18-12-2016 को अधीनस्थ न्यायालय के सम्ष ्ऺस्तुत िकया गया था। पूरे मामले में बार-बार यह कहा गया िक मृतक िववाह के बाद आवेदक के पिरवार के साथ कुल िमलाकर मुिश्कल से सात िदन रही थी और इस ्ऺकार दहेज की कोई मांग नहीं की गई थी। मृतक के िकसी ्ि ि्व के साथ संबंध थे िजससे वह िनयिमत रूप से बात करती थी और इस संबंध में कॉल िववरण तथा मोबाइल नंबर भी उपलब्ध कराए गए थे, परंतु िववेचना अिधकारी ने इस पहलू को छुआ तक नहीं। यहाँ यह कहना ्ऺासंिगक है िक अपनी मृत्यु से ठीक पहले, शाम लगभग 6:11 बजे, मृतक अपने पिरवार और उस अन्य ्ि ि्व के साथ बातचीत कर रही थी िजससे उसके संबंध थे, और लगभग 7:00 बजे सूचनाकतार् को मृत्यु की सूचना ्ऺाप्त हुई। अतः यह पहलू भी अत्यंत महत्वपूणर् था िजसकी िववेचना अिधकारी ्षारा जांच नहीं की गई तथा इसी न्यायालय ने इन्हीं आधारों पर सहअिभयु्व ्ऺेम नारायण ि्षवेदी को जमानत ्ऺदान की थी। आगे यह भी कहा गया िक मामलें में की गई लापरवाह िववेचना से ्षुब्ध होकर, आवेदक ने िदनांक 16-10-2017 को अधीनस्थ न्यायालय के सम्ष दंड ्ऺि्वया संिहता की धारा 173(8) के अंतगर्त एक ्ऺ ाथर्ना प्ऴ ्ऺस्तुत िकया, िजसमें मामले की 'अि्षम िववेचना' की मांग की गई तािक वास्तिवक िस्थित स्प्ि हो सके। अधीनस्थ न्यायालय ने तथ्यों और आवेदक ्षारा अपने ्ऺाथर्ना प्ऴ में इंिगत िकए गए साष्यों एवं गवाहों के मूल्यांकन की आवश्यकता को अनदेखा करते हुए, अत्यंत मनमाने ा़ंग से िदनांक 02-05-2018 के िववािदत आदेश ्षारा ्ऺाथर्ना प्ऴ को िनरस्त कर िदया। वतर्मान मामला ऐसा है जहाँ महत्वपूणर् तथ्यों की जांच नहीं की गई, जैसे िक वह मोबाइल नंबर िजससे ्ऺथम सूचनाकतार् को कॉल ्ऺाप्त हुई थी, न ही उस ्ि ि्व से पूछताछ की गई िजसने ्ऺथम सूचनाकतार् को कॉल िकया था। इसके अितिर्व, िजस मोबाइल नंबर से मृतक बात करती थी उसकी भी जांच नहीं की गई और न ही उस ्ि ि्व से पूछताछ की गई िजससे वह बात करती थी। आवेदक को आशा है िक यिद मामले की अि्षम िववेचना की जाती है और अनछुए पहलुओं की जांच होती है, तो वास्तिवक तस्वीर सामने आएगी और आवेदक िनदरॏष िस्ध होगा। न्याय के िहत में यह उिचत होगा िक यह माननीय न्यायालय कृपापूवर्क इस आवेदन को स्वीकार करे और ्ऺश्नगत आदेश अपास्त कर िदया जाय।

6. िव्षान अपर शासकीय अिधव्वा ने कथन िकया िक ्ऺश्नगत मामलें में समुिचत िववेचना के उपरांत आरोप प्ऴ दािखल िकया गया तथा आवेदक की ओर से दं०्ऺ०सं० की धारा 173(8) के अंतगर्त 'अि्षम िववेचना' हेतु दािखल ्ऺाथर्ना प्ऴ पर संबंिधत िवचारण न्यायालय ्षारा तथ्यों और आवेदक ्षारा अपने ्ऺाथर्ना प्ऴ में इंिगत िकए गए साष्यों एवं गवाहों के मूल्यांकन आिद तथ्यों के अवलोकनपरांत ्ऺश्नगत आदेश पािरत िकया गया है। आगे यह भी कहा गया िक आवेदक की ओर से योिजत उन्मोचन ्ऺाथर्ना संबंिधत न्यायालय ्षारा िनरस्त िकया जा चुका है। A482 No. 31300 of 2018

उपयुर््व तथ्यों से पिरलि्षत है िक ्ऺश्नगत आदेश में कोई िविधक अथवा ्षे्ऴ ािधकार संबंधी ्ऴुिट नहीं है। उनका यह भी कथन है िक आवेिदका के िव्षान अिधव्वा ्षारा आरोप प्ऴ एवं ्ऺश्नगत आदेश को अपास्त करने हेतु जो तकर् ्ऺस्तुत िकए गए वे बलहीन है। इसिलए, ्ऺश्नगत आदेश में हस्त्षेप िकए जाने की कोई आवश्यकता ्ऺतीत नहीं हो रही है।

7. उभय प्ष के िव्षान अिधव्वागण के तकॏल को ्श वणोपरांत एवं प्ऴावली व ्ऺश्नगत आदेशों का सम्यक रूपेण पिरशीलन िकया तथा िव्षान अवर न्यायालय ्षारा पािरत ्ऺश्नगत आदेश समुिचत िववेचना पर आधािरत है, सकारण एवं उिचत आदेश है। उसमें कोई सारवान अिनयिमतता, अनौिचत्यता या ्ऺि्वया या ्षे्ऴ ािधकार संबंधी ्ऴुिट पिरलि्षत नहीं होती है। इसिलए, यह आवेदन प्ऴ को िनरस्त िकए जाने योग्य है।

8. तद्नुसार, आवेिदका की ओर से धारा 528 भारतीय नागिरक सुर्षा संिहता के अंतगर्त ्ऺ स्तुत यह आवेदन प्ऴ िनरस्त िकया जाता है।

9. कायार्लय को िनदरॏश िदया जाता है िक इस आदेश की एक ्ऺितिलिप संबंिधत अवर न्यायालय को अिवलम्ब भेजना सुिनि्ात िकया जाय।

10. यिद इस वाद में कोई अंतिरम आदेश हो तो, उसे समाप्त समझा जाय। May 12, 2026 CP.sahani A482 No. 31300 of 2018

(Dr. Gautam Chowdhary,J.) Digitally signed by :- CHANDRA PRAKASH SAHANI High Court of Judicature at Allahabad

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