Allahabad High Court

NABAIL/4050/2026 of KRISHN JI AND 2 OTHERS Vs STATE OF U.P. on 11 May 2026

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JUDICATURE AT ALLAHABAD CRIMINAL MISC. ANTICIPATORY BAIL APPLICATION U/S 482 BNSS No. - 4050 of 2026 Court No. - 82 HON'BLE DR. GAUTAM CHOWDHARY, J. 1. सूची पुनरीिक्षत वतर्मान दािण्डक प्रकीणर् अिग्रम

HIGH COURT OF JUDICATURE AT ALLAHABAD

CRIMINAL MISC. ANTICIPATORY BAIL APPLICATION U/S 482 BNSS No.

Court No. - 82

HON'BLE DR. GAUTAM CHOWDHARY, J.

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1. सूची पुनरीि्षत वतर्मान दािण्डक ्ऺकीणर् अि्षम जमानत ्ऺाथर्ना प्ऴ आवेदकगण कृष्णा जी, धमर्वीर एवं पीताम्बर की ओर से मु०अ०स० 335/2025 अन्तगर्त धारा 115(2)/ 110, 352, 351(3), बी.एन.एस. थाना बिनयाठेर, िजला सम्भल में अि्षम जमानत पर मु्व करने हेतु ्ऺस्तुत िकया गया है।

2. आवेदकगण के िव्षान अिधव्वा की तरफ से िव्षान अिधव्वा एवं िव्षान अपर शासकीय अिधव्वा को सुना तथा प्ऴावली का पिरशीलन िकया।

3. आवेदकगण के िव्षान अिधव्वा ने तकर् ्ऺस्तुत िकया िक आवेदकगण िनदरॏष है, उसे उपरो्व धाराओं में ्षेषवश तंग व परेशान करने की िनयत से आिलप्त िकया गया है, उसे आशंका है िक उसे उपरो्व विणत मामले में िगरफ्तार िकया जा सकता है, जबिक उसके िवरू्ध कोई िव्षसनीय साष्य नहीं है। उनका यह भी कथन है िक आवेदकगण के िवरु्ध अभी तक कोई भी बाध्यकारी ्ऺि्वया नहीं अपनाई गयी है एवं आवेदकगण की ओर से यह भी आ्षासन िदया गया है िक वह कानून की ्ऺि्वया में सहयोग करने के िलए तैयार है और जब भी आवश्यकता होगी वह ईमानदारी से न्यायालय के सम्ष खुद को उपलब्ध कराएगा और उन सभी शतों को स्वीकार करने के िलए भी तैयार है जो न्यायालय उस पर अिधरोिपत करेगी।

4. िव्षान अपर शासकीय अिधव्वा ्षारा यह तकर् ्ऺस्तुत िकया गया िक अिभयु्व ्षारा कािरत अपराध गंभीर ्ऺकृित का है तथा आवेदकगण के िवरु्ध पयार्प्त साष्य के आधार पर पुिलस ्ष ारा आवेदकगण के िवरु्ध संबंिधत िवचारण न्यायालय में आरोपप्ऴ ्ऺेिषत िकया गया है। इसिलए आवेदकगण को अि्षम जमानत पर मु्व िकये जाने का कोई औिचत्य ्ऺतीत नहीं होता है। अतः अिभयु्वगण का अि्षम जमानत आवेदन प्ऴ िनरस्त िकया जाय।

5. Versus Counsel for Applicant(s) : Santosh Kumar Gupta Counsel for Opposite Party(s) : G.A., Sanskar Gaur, Uma Shanker Krishn Ji And 2 Others .....Applicant(s) State of U.P. .....Opposite Party(s)

यह कहा जा सकता है िक Siddharam Satlingappa Mhetre v. State of Maharashtra, (2011) 1 SCC 694, के मामले में माननीय उच्चतम न्यायालय ने माना है िक अि्षम जमानत पर िनणर्य करते समय न्यायालय को आरोप की ्ऺकृित और गंभीरता, अिभयु्वगण का पूवर्वृ्त, अिभयु्वगण के न्याय से भागने की संभावना पर िवचार करना चािहए तथा न्यायालय को अिभयु्वगण के िवरु्ध उपलब्ध संपूणर् साम्षी का सावधानीपूवर्क मूल्यांकन करना चािहए तथा अिभयु्वगण की सटीक भूिमका को भी ध्यान में रखना चािहए।

6. वतर्मान मामले में अि्षम जमानत संबंधी िविध के स्थािपत िस्धांतों को ध्यान में रखते हुए और प्षकारों के िव्षान अिधव्वाओं के कथनों, आरोपों की ्ऺकृित, आवेदकगण की भूिमका और मामले के सभी तथ्यों एवं पिरिस्थितयों को ध्यान में रखते हुए चूंिक संबंिधत िवचारण न्यायालय में आवेदकगण के िवरु्ध साष्य पाये जाने के उपरान्त आरोप प्ऴ ्ऺेिषत िकया जा चुका है, अतः मामले के गुण-दोष पर िबना कोई िवचार ्ि्व िकए यह अि्षम जमानत आवेदन प्ऴ स्वीकार िकए जाने योग्य नहीं है, त्शुसार आवेदकगण का अि्षम जमानत आवेदन प्ऴ अस्वीकार िकया जाता है।

7. उपरो्वानुसार वाद के गुण-दोष पर िटप्पणी िकये बगैर यह अि्षम जमानत ्ऺाथर्नाप्ऴ िनरस्त िकया जाता है।

8. इस वाद में यिद कोई अंतिरम आदेश हो, तो वह स्वतः समाप्त समझा जाए।

9. कायार्लय को िनदरॏिशत िकया जाता है िक इस आदेश की ्ऺितिलिप संबंिधत िवचारण न्यायालय को अिवलम्ब ्ऺेिषत करें। May 12, 2026 S.Mishra NABAIL No. 4050 of 2026

(Dr. Gautam Chowdhary,J.) Digitally signed by :- SHASHI MISHRA High Court of Judicature at Allahabad

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