Allahabad High Court

A482/2938/2022 of JITENDRA KUMAR SAHU Vs STATE OF U.P. AND ANOTHER on 11 May 2026

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JUDICATURE AT ALLAHABAD APPLICATION U/S 482 No. - 2938 of 2022 Court No. - 82 HON'BLE DR. GAUTAM CHOWDHARY, J. 1. आवेदक की ओर से धारा 482 दं०प्र०सं० के अंतगर्त प्रस्तुत यह आवेदन पत्र,

HIGH COURT OF JUDICATURE AT ALLAHABAD

APPLICATION U/S 482 No. - 2938 of 2022

Court No. - 82

HON'BLE DR. GAUTAM CHOWDHARY, J.

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1. आवेदक की ओर से धारा 482 दं०्ऺ०सं० के अंतगर्त ्ऺस्तुत यह आवेदन प्ऴ, वाद सं० 08/2020 अंतगर्त धारा 145/146 दं०्ऺ०ंस०, थाना कोतवाली कटरा, जनपद मीरजापुर में नगर मिजस््िेट ्षारा पािरत आदेश िदनांक 16.10.2020 एवं दािण्डक िनगरानी सं० 61 वषर् 2020, अंतगर्त धारा 397 दं०्ऺ०सं०, थाना कोतवाली कटरा, जनपद मीरजापुर में अपर स्ऴ न्यायाधीश, एफ.टी.सी. ्ऺथम, मीरजापुर ्षारा पािरत ्ऺश्नगत आदेश िदनांिकत 24.12.2021 को खिण्डत करने हेतु योिजत िकया गया है।

2. आवेदक के िव्षान अिधव्वा एवं िव्षान अपर शासकीय अिधव्वा को सुना एवं प्ऴावली का पिरशीलन िकया।

3. आवेदक के िव्षान अिधव्वा का कथन है िक िदनांक 29.9.1998 को ्ऺाथर् के िपता स्वगर्य ब्शी ्ऺसाद गुप्ता ने ्शीमती मालती देवी एवं ब्शी ्ऺसाद पु्ऴ राजा राम गुप्ता से पंजीकृत िव्वय िवलेख के माध्यम से मकान ्वय िकया था, िजसमें उ्व िव्वय िवलेख में स्टाम्प की कमी पाई गई थी, तत्प्ाात उसका पंजीकरण िदनांक 5.8.2005 एवं 19.12.2005 को संपन्न हुआ। तत्प्ाात उ्व मकान का नामांतरण (Mutation) नगर पािलका पिरषद, मीरजापुर में िदनांक 2.7.2012 को हुआ। इसके बाद िदनांक 2.12.2019 को िवप्षी संख्या-2 ने िव्वय िवलेख के िनरस्तीकरण हेतु एक दीवानी वाद संख्या 302/19 'मालती बनाम पावर्ती देवी एवं अन्य' दािखल िकया। िदनांक 5.12.2019 को पावर्ती देवी ने िसिवल जज (जूिनयर िडवीजन), मीरजापुर के सम्ष मालती देवी एवं अन्य के िवरु्ध दीवानी वाद संख्या 984 वषर् 2019 दािखल िकया। इसके बाद िदनांक 13.1.2020 को ब्शी ्ऺसाद की पत्नी पावर्ती देवी ्षारा िव्युत संयोजन (Electricity Connection) िवच्छेिदत करा िदया गया। िदनांक 23.2.2020 को प्षों के मध्य एक पंचायत हुई िक यिद ्ऺाथर् िवप्षी संख्या-2 को डे़ा लाख रुपये का भुगतान कर देता है, तो वह दीवानी वाद वापस ले लेगी, िजसमें ्ऺाथर् ने िवप्षी संख्या-2 को एक लाख रुपये Versus Counsel for Applicant(s) : Kameshwar Singh Counsel for Opposite Party(s) : G.A. Jitendra Kumar Sahu .....Applicant(s) State of U.P. and Another .....Opposite Party(s)

का भुगतान कर िदया था और 50,000 रुपये शेष थे, िकतु िवप्षी संख्या-2 ने प्षों के बीच हुए समझौते का अनुपालन नहीं िकया। िदनांक 24.8.2020 को ्ऺाथर् ने नगर मिजस््िेट, िमजार्पुर को एक ्ऺाथर्ना प्ऴ िदया, िजसमें यह उल्लेख िकया गया िक वाडर् नं. 11 में िस्थत मकान संख्या 773/2 ्ऺाथर् की माता के नाम पर है, िजसे ्ऺाथर् के िपता ने वषर् 1998 में ब्शी ्ऺसाद पु्ऴ स्व. राजा राम और ्शीमती मालती देवी पत्नी ब्शी ्ऺसाद से पंजीकृत िव्वय िवलेख के माध्यम से खरीदा था और उ्व मकान में िबजली कनेक्शन, पानी का कनेक्शन तथा गृह कर भी ्ऺाथर् की माता के नाम पर है, परंतु िवप्षी संख्या-2 उ्व मकान पर अवैध कब्जा करना चाहती है। िदनांक 24.9.2020 को ्ऺाथर् ने नगर मिजस््िेट, िमजार्पुर के सम्ष आवेदन देकर दंड ्ऺि्वया संिहता की धारा 145 एवं 146 के तहत कायर्वाही शुरू करने की ्ऺाथर्ना की। तत्प्ाात िदनांक 3.10.2020 को ्ऺभारी िनरी्षक, थाना कोतवाली कटरा, िमजार्पुर ने नगर मिजस््िेट के सम्ष अपनी आख्या ्ऺ स्तुत की, िजसमें उन्होंने उल्लेख िकया िक मकान संख्या 7773/02 के कब्जे के संबंध में दोनों प्षों के बीच िववाद है और उन्होंने धारा 145 एवं 146 दंड ्ऺि्वया संिहता के तहत कायर्वाही हेतु िरपोटर् दी। इसके उपरांत िदनांक 7.10.2020 को नगर मिजस््िेट, िमजार्पुर ने धारा 146 दंड ्ऺि्वया संिहता के तहत कायर्वाही शुरू की और उ्व िववािदत मकान को कुकर् (Attach) कर िदया। िदनांक 13.10.2020 को ्ऺभारी िनरी्षक, कोतवाली कटरा ने नगर मिजस््िेट के सम्ष िरपोटर् दी िक उ्व संपि्त कुकर् कर दी गई है और सुशील कुमार पु्ऴ हुकुम चंद को 'िरसीवर' (Receiver) िनयु्व िकया गया है। िदनांक 15.10.2020 को िवप्षी संख्या-2 एवं अन्य ने अपनी आपि्त दािखल की। तत्प्ाात िदनांक 16.10.2020 को नगर मिजस््िेट, िमजार्पुर ने अपने पूवर् आदेश िदनांक 7.10.2020 को वापस ले िलया और यथािस्थित (Status Quo) बनाए रखने का िनदरॏश िदया तथा िदनांक 16.10.2020 को ही नगर मिजस््िेट, िमजार्पुर ने धारा 145 दंड ्ऺ ि्वया संिहता के तहत आदेश पािरत कर िदया व िदनांक 22.10.2020 को थाना कोतवाली कटरा की पुिलस ने मकान का ताला खोलकर पूवर् िस्थित बहाल कर दी। पुिलस थाना कोतवाली कटरा ्षारा िदनांक 22.10.2020 को नगर मिजस््िेट के सम्ष आदेश के अनुपालन के संबंध में िरपोटर् ्ऺस्तुत की गई है। इसके बाद िदनांक 6.11.2020 को ्ऺाथर् ने नगर मिजस््िेट के आदेश िदनांक 16.10.2020 के िवरु्ध िजला एवं स्ऴ न्यायाधीश, मीरजापुर के न्यायालय में एक दांिडक पुनरी्षण दािखल िकया। िदनांक 6.11.2020 को िव्षान स्ऴ न्यायाधीश, िमजार्पुर ने ्ऺाथर् के प्ष में दांिडक पुनरी्षण में अंतिरम आदेश ्ऺदान िकया। तत्प्ाात िदनांक 24.12.2021 को अपर स्ऴ न्यायाधीश, एफ.टी.सी. ्ऺ थम, मीरजापुर ने ्ऺ ाथर् के पुनरी्षण को खािरज कर िदया। उपयुर््व तथ्यो से पिरलि्षत है िक नगर मिजस््िेट, मीरजापुर ्षारा पािरत आदेश िदनांक 16.10.2020, िजसके माध्यम से उन्होंने धारा 146 दंड ्ऺि्वया संिहता के तहत अपने पूवर् आदेश िदनांक 7.10.2020 को वापस िलया, वह अवैध एवं अनुिचत है और कानून की दृि्ि में िटकने योग्य नहीं है तथा नगर मिजस््िेट ्षारा पािरत आदेश िदनांक

16.10.2020 एकप्षीय (Ex-parte) आदेश है और िबना सुनवाई का अवसर िदए इसे पािरत िकया गया है, जो ्ऺाकृितक न्याय के िस्धांत के िवरु्ध है। आगे यह भी कहा गया िक दंड ्ऺि्वया संिहता की धारा 466 के ्ऺावधान के अनुसार, कोई भी कुकर् केवल ्ऺ ि्वयात्मक ्ऴुिट या कमी के कारण अवैध नहीं मानी जाएगी; अतः नगर मिजस््िेट ्षारा िदनांक 16.10.2020 को पािरत आदेश, िजसके ्षारा िववािदत मकान की कुकर् वापस ली गई, वह मामले की पिरिस्थितयों में अवैध एवं अनुिचत है। अतः उपयर््व तथ्यों से पिरलि्षत है िक ्ऺश्नगत आदेश खिण्डत िकये जाने योग्य है।

4. िव्षान अपर शासकीय अिधव्वा का कथन है िक इस मामलें में संबंिधत मिजस््िेट िकस भी स्ऴ पर ्ऺश्नगत आदेश पािरत कर सकता है, इसकी पिरपुि्ि धारा 146 दं०्ऺ०सं० के पिरभािषत तथ्यों से भी हो रही है। इससे ्ऺश्नगत आदेश में कोई िविधक अथवा ्षे्ऴ ािधकार संबंधी ्ऴुिट पिरलि्षत नहीं हो रही है। उनका यह भी कथन है िक आवेिदका के िव्षान अिधव्वा ्षारा ्ऺश्नगत आदेश को अपास्त करने हेतु जो तकर् ्ऺ स्तुत िकए गए वे आधारहीन है।इसिलए, ्ऺश्नगत आदेश में हस्त्षेप िकए जाने की कोई आवश्यकता ्ऺतीत नहीं हो रही है। इसिलए, आवेदक ्षारा ्ऺस्तु यह आवेदन प्ऴ िनरस्त िकये जाने योग्य है।

5. यहां ्ऺश्नगत ्ऺकरण से सुसंगत धारा 146 दं०्ऺ०सं० के ्ऺावधान का उल्लेख समीचीन है। धारा 146 उपधारा (1) दं०्ऺ०सं० में यह ्ऺावधािनत िकया गया है िक यिद धारा 145 के उपधारा (1) दं०्ऺ०सं० के अधीन आदेश करने के प्ात िकसी समय मिजस््िेट मामले को आपाितक समझता है अथवा यिद वह िविनि्ाय करता है िक प्षकारों में से िकसी का धारा 145 में यथािनिद्ि कब्जा उस समय नहीं था, अथवा यिद वह अपना समाधान नहीं कर पाता है िक उस समय उनमें से िकसका ऐसा कब्जा िववाद की िवषय वस्तु पर था तो वह िववाद की िवषय वस्तु को तब तक के िलये कुकर् कर सकता है जब तक कोई स्षम न्यायालय उसके कब्जे का हकदार ्ि ि्व होने के बारे में उसके प्षकारों के अिधकारों का अवधारण नहीं कर देता है:, परन्तु यिद ऐसे मिजस््िेट का समाधान हो जाता है िक िववाद की िवषय वस्तु फें बार में पिरशांित भंग होने की कोई सम्भा्ि ता नहीं रही तो वह िकसी समय सी कुकर् वापस ले सकता है। इस ्ऺकार उपरो्व ्ऺावधान के समवेत अवलोकन से यह तथ्य िनिववािदत है िक कायर्पालक मिजस््िेट को न केवल पिरशांित भंग होने की सम्भा्ि ता के आधार पर कब्जे के सम्बन्ध में साष्य लेकर उसका अवधारण करने का अिधकार ्ऺाप्त है बिल्क आपाितक पिरिस्थित उत्पन्न होने पर िकसी भी समय िववा्यक िवषय वस्तु को कुकर् कर लेने, िरसीवर िनयु्व कर देने या पिरशांित भंग होने की सम्भा्ि ता नहीं रहने पर िकसी भी समय कुकर् का आदेश वापस लेने की अिधकािरता भी ्ऺाप्त है।

6. उभय प्षों के िव्षान अिधव्वागण के तकॏल को सुनने एवं प्ऴावली पर उपलब्ध तथ्यों

के पिरशीलन तथा स्थािपत िस्धांतों को ध्यान में रखते हुए, यह धारा 482 दं०्ऺ०सं० के अंतगर्त ्ऺस्तुत आवेदन प्ऴ स्वीकार िकए जाने योग्य नहीं है। अतः इस मामलें के गुण -दोष पर िबना कोई िवचार ्ि्व िकए आवेदन प्ऴ अस्वीकार िकया जाता है।

7. तद्नुसार, धारा 482 दं०्ऺ०सं० के अंतगर्त ्ऺस्तुत इस आवेदन प्ऴ को िनरस्त िकया जाता है।

8. कायार्लय को िनदरॏश िदया जाता है िक इस आदेश की एक ्ऺितिलिप संबंिधत अवर न्यायालय को अिवलम्ब भेजना सुिनि्ात िकया जाय।

9. यिद इस वाद में कोई अंतिरम आदेश हो तो, उसे समाप्त समझा जाय। May 12, 2026 CP.sahani

(Dr. Gautam Chowdhary,J.) Digitally signed by :- CHANDRA PRAKASH SAHANI High Court of Judicature at Allahabad

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