Allahabad High Court

NA528/15871/2026 of AJAY KUMAR @ TINKU Vs STATE OF U.P. AND ANOTHER on 4 May 2026

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JUDICATURE AT ALLAHABAD APPLICATION U/S 528 BNSS No. - 15871 of 2026 Court No. - 82 HON'BLE DR. GAUTAM CHOWDHARY, J. 1. आवेदक की ओर से धारा 528 भारतीय नागिरक सुरक्षा संिहता के अन्तगर्त यह

HIGH COURT OF JUDICATURE AT ALLAHABAD

APPLICATION U/S 528 BNSS No. - 15871 of 2026

Court No. - 82

HON'BLE DR. GAUTAM CHOWDHARY, J.

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1. आवेदक की ओर से धारा 528 भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता के अन्तर्गत यह आवेदन पत्र परिवाद सं० 1557/2020, अंतर्गत धारा 156(3) दं०प्र०सं० थाना ककरबई जिला झांसी में जूडीशियल मजिस्ट्रेट गरौठा, झांसी द्वारा पारित प्रसंज्ञान/तलबी आदेश दिनांक 17.08.2023 एवं पारित जमानतीय वारण्ट आदेश दिनांक 20.11.2025 को अपास्त करने के एवं सम्पूर्ण कार्यवाही को अपास्त करने के लिए योजित की गयी है।

2. आवेदक के विद्वान अधिवक्ता एवं विद्वान अपर शासकीय अधिकता को सुना तथा पत्रावली का परिशीलन किया।

3. आवेदक के विद्वान अधिवक्ता ने तर्क प्रस्तुत किया कि उर्पयुक्त मामलें में विचारण न्यायालय द्वारा इस मामलें को परिवाद के रूप में दर्ज करते समय, तथ्यों का सम्यक परिशीलन नहीं किया गया तथा प्रश्नगत आदेश एक 'स्पीकिंग' (सकारण) एवं तर्कसंगत आदेश नहीं है तथा उक्त प्रश्नगत आदेश मात्र अनुमानों और कयासों के आधार पर पारित किया गया है। अतः उपरोक्त प्रश्नगत आदेश समुचित विवेचना एवं तथ्यों पर आधारित नहीं है। इसलिए, प्रश्नगत आदेश त्रुटिपूर्ण है एवं अपास्त किए जाने योग्य है।

4. विद्वान अपर शासकीय अधिवक्ता ने कथन किया कि प्रश्नगत मामलें में समुचित विवेचना के उपरांत विचारण न्यायालय द्वारा पर्याप्त आधार पर प्रश्नगत आदेश पारित किया है, जिसमें कोई विधिक अथवा क्षेत्राधिकार संबंधी त्रुटि परिलक्षित नहीं हो रही है। उनका यह भी कथन है कि आवेदक के विद्वान अधिवक्ता द्वारा प्रश्नगत आदेश को अपास्त करने हेतु जो तर्क प्रस्तुत किए गए वे बलहीन है इसलिए, प्रश्नगत आदेश में हस्तक्षेप किए जाने की कोई आवश्यकता प्रतीत नहीं हो रही है।

5. Versus Counsel for Applicant(s) : Minakshi Tripathi, Monarch Tripathi Counsel for Opposite Party(s) : G.A. Ajay Kumar @ Tinku .....Applicant(s) State of U.P. and Another .....Opposite Party(s)

उभय पक्ष के विद्वान अधिवक्तागण के तर्कोंं को श्रवणोपरांत एवं पत्रावली व प्रश्नगत आदेशों का सम्यक रूपेण परिशीलन किया तथा विद्वान अवर न्यायालय द्वारा पारित प्रश्नगत आदेश समुचित विवेचना पर आधारित है, सकारण एवं उचित आदेश है। उसमें कोई सारवान अनियमितता, अनौचित्यता या प्रक्रिया या क्षेत्राधिकार संबंधी त्रुटि परिलक्षित नहीं होती है, इसलिए यह आवेदन पत्र को निरस्त किए जाने योग्य है।

6. तद्नुसार, आवेदक की ओर से धारा 528 भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता के अंतर्गत प्रस्तुत यह आवेदन पत्र निरस्त किया जाता है।

7. कार्यालय को निर्देश दिया जाता है कि इस आदेश की एक प्रतिलिपि संबंधित अवर न्यायालय को अविलम्ब भेजना सुनिश्चित किया जाय।

8. यदि इस वाद में कोई अंतरिम आदेश हो तो, उसे समाप्त समझा जाय। May 5, 2026 S.Mishra NA528 No. 15871 of 2026 2 (Dr. Gautam Chowdhary,J.) Digitally signed by :- SHASHI MISHRA High Court of Judicature at Allahabad

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