Allahabad High Court
FAFO/478/2025 of ISLAMIC ISNA ASHARI EDUCATIONAL ACADEMY,LKO. THRU. M.D./MANAGER SHRI S.A.S. IMAM Vs SRI YUSUF ASKARI AND OTHERS on 18 December 2025
JUDICATURE AT ALLAHABAD LUCKNOW FIRST APPEAL FROM ORDER No. - 478 of 2025 Court No. - 17 HON'BLE SUBHASH VIDYARTHI, J. 1. अपीलाथीर्गण के िवद्वान अिधवक्ता श्री कमल िकशोर शमार्, िवपक्षी
HIGH COURT OF JUDICATURE AT ALLAHABAD
LUCKNOW
FIRST APPEAL FROM ORDER No. - 478 of 2025
Court No. - 17
HON'BLE SUBHASH VIDYARTHI, J.
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1. अपीलार्थीगण के विद्वाान अधिवक्ताा श्रीी कमल किशोर शर्मा, विपक्षीी संख्याया 1 की तरफ से उपस्थित विद्वाान वरिष्ठ अधिवक्ताा श्रीी हरगोविन्दद सिंह परिहार तथा अधिवक्ताा श्रीी योगेश सिंह, विपक्षीी संख्याया 13 की तरफ से उपस्थित विद्वाान अधिवक्ताा श्रीी मेहंदी अब्बाबास रिजवी, विपक्षीी संख्याया 21 की तरफ से विद्वाान अधिवक्ताा श्रीी हिमांक मिश्राा तथा विपक्षीी संख्याया 22 की तरफ से उपस्थित अधिवक्ताा श्रीी लोकेन्द्र कुमार गुप्ताता को सुना तथा पत्राावली का अवलोकन किया।
2. आदेश 43 नियम 1(r) सिविल प्रक्रिया संहिता के अंतर्गत प्रस्तुतुत इस अपील द्वाारा विद्वाान सिविल जज (प्रवर खण्डड), मलिहाबाद, लखनऊ द्वाारा मूल वाद संख्याया 708 सन 2025 में पारित आदेश दिनांक 22.07.2025 की वैधता को चुनौती दी गयी है, जिसके द्वाारा विचारण न्यायायालय ने अंतरिम निषेधाज्ञाा प्राार्थना-पत्र 6ग का निस्तातारण करते हुए पक्षों को वाद की कार्यवाही के दौरान विवादित संपत्ति के संबंध में यथास्थिति बनाये रखने का आदेश दिया।
3. इस न्यायायालय के आदेश दिनांकित 11.11.2025 द्वाारा अपील अंगीकृत की गयी किन्तुतु अंतरिम अनुतोष देते समय वाद की कार्यवाही स्थथगित कर दी गयी। अपीलकर्ता ने अंतरिम अनुतोष के रूप में विचारण न्यायायालय के आलोच्यय आदेश दिनांक 22.07.2025 के क्रियान्ववयन पर रोक लगाने की प्राार्थना की थी न कि वाद की कार्यवाही की रोक लगाने की तथा प्रथम दृष्टया ऐसा प्रतीत होता है कि आदेश दिनांक 11.11.2025 द्वाारा त्रुुटिवश आलोच्यय आदेश पर रोक लगाने के स्थाथान पर वाद की कार्यवाही रोकने का आदेश पारित हो गया।
4. अपीलकर्तागण के विद्वाान अधिवक्ताा तथा वादी - विपक्षीी संख्याया 1 के विद्वाान अधिवक्ताा ने सम्मिलित रूप से यह तर्क किया कि यद्यपि आलोच्यय आदेश दिनांक 22.07.2025 प्रथम दृष्टया एक विस्तृतृत आदेश प्रतीत होता है तथा ऐसा लगता है कि विचारण न्यायायालय ने समस्तत संगत तथ्यों एवं अभिलेखों का परीक्षण करने के उपरान्तत आदेश पारित किया है किन्तुतु आदेश का Versus Counsel for Appellant(s) : Kaustubh Singh Counsel for Respondent(s) : Piyush Pathak, Lokendra Kumar Gupta, Meenakshi Singh Parihar, Mehdi Abbas Rizvi, Yogesh Singh Islamic Isna Ashari Educational Academy,Lko. Thru. M.D./Manager Shri S.A.S. Imam .....Appellant(s) Sri Yusuf Askari And Others .....Respondent(s)
परिशीलन करने से यह स्पपष्ट होता है कि विचारण न्यायायालय ने मात्र पक्षों के अभिकथनों को आदेश में दोहरा दिया है किन्तुतु बिना उसकी कोई सम्ययक समीक्षाा किए हुए आलोच्यय आदेश पारित किया है। जब अपीलकर्ता के उपरोक्त कथन का स्ववयं वादी - विपक्षीी संख्याया 1 के विद्वाान अधिवक्ताा ही विरोध नहीं कर रहे हैं तथा उन्होंने भी भारतीय संविधान के अनुच्छेछेद 227 के अंतर्गत याचिका संख्याया 7011 सन 2025 प्रस्तुतुत करके आदेश की वैधता को चुनौती दी हुई है तो ऐसी परिस्थिति में उक्त आदेश समुचित कारण अंकित न करने के कारण विधि में संधार्य नहीं है एवं निरस्तत किये जाने योग्यय है।
5. तद्नुनुसार, अपील स्वीवीकार की जाती है। विद्वाान सिविल जज (प्रवर खण्डड), मलिहाबाद, लखनऊ को मूल वाद संख्याया 708 सन 2025 में पारित आदेश दिनांक 22.07.2025 अपास्तत किया जाता है। प्रकरण विद्वाान सिविल जज (प्रवर खण्डड), मलिहाबाद, लखनऊ को इस निर्देश के साथ प्रतिप्रेेषित किया जाता है कि वह समस्तत पक्षों का सुनवाई का उचित अवसर देने के उपरान्तत प्राार्थना-पत्र ग6 का पुनः एक सकारण आदेश से निस्तातारण शीघ्रतापूर्वक, यथासंभव आज की तिथि से एक माह के भीतर करना सुनिश्चित करेंगे। प्राार्थना-पत्र 6ग के पुनः निस्तातारण तक सभी पक्षकार यथास्थिति बनाये रखेंगे। December 18, 2025 Ankit FAFO No. 478 of 2025 2 (Subhash Vidyarthi,J.) Digitally signed by :- ANKIT SHARMA High Court of Judicature at Allahabad, Lucknow Bench