Allahabad High Court

ARBT/111/2025 of M/s Swastik Enterprises through PROP. Rajesh Kumar Vs State of U.P. through its Principal Secretary, Public Works Department AND ORS. on 18 December 2025

Cites 0, Cited by 0

JUDICATURE AT ALLAHABAD LUCKNOW CIVIL MISC. ARBITRATION APPLICATION No. - 111 of 2025 Court No. - 17 HON'BLE SUBHASH VIDYARTHI, J. 1. यािचकाकतार् के िवद्वान अिधवक्ता श्री महशे चन्द्र शुक्ला की

HIGH COURT OF JUDICATURE AT ALLAHABAD

LUCKNOW

CIVIL MISC. ARBITRATION APPLICATION No. - 111 of 2025

Court No. - 17

HON'BLE SUBHASH VIDYARTHI, J.

Citations and Judicial Treatment

No citing decisions in the index yet

Cited by

0

Decisions in the index citing it

Cites

0

Decisions referred to

In this index

0

Of the decisions it cites

Overruled / Questioned

0

No negative treatment found

Loading the citing and cited decisions…

1. याचिकाकर्ता के विद्वाान अधिवक्ताा श्रीी महेश चन्द्र शुक्लाला की अस्ववस्थथता के आधार पर स्थथगन की प्राार्थना की गयी।

2. दिनांक 03.12.2025 को प्राार्थी के विद्वाान अधिवक्ताा की अस्ववस्थथता के आधार पर प्रकरण स्थथगित हुआ था। दिनांक 15.12.2025 को प्रकरण में निम्ननलिखित आदेश पारित हुआ हैः- "1. आवेदनकर्ता के विद्वाान अधिवक्ताा की अस्ववस्थथता के आधार पर स्थथगन चाहा गया। पूर्व में भी दिनांक 03.12.2025 को आवेदनकर्ता के विद्वाान अधिवक्ताा की अस्ववस्थथता के आधार पर प्रकरण स्थथगित हुआ था, दिनांक 11.12.2025 को दावे की परिसीमा अवधि से बाधित होने के बिंदु पर प्रश्नन पूछा गया था। आज पुनः आवेदनकर्ता के विद्वाान अधिवक्ताा की अस्ववस्थथता के आधार पर स्थथगन चाहा गया है। न्यायायहित में प्राार्थना-पत्र की सुनवाई एक अंतिम बार स्थथगित की जाती है।

2. यह प्राार्थना-पत्र दिनांक 18.12.2025 को नवीन वादों की सूची (fresh list) में सूचीबद्ध हो। यदि उक्त तिथि को आवेदनकर्ता के अधिवक्ताा न्यायायालय आने में असमर्थ हैं तो आवेदनकर्ता को अन्यय कोई वैकल्पिक व्यवस्थाथा करना आवश्ययक होगा अन्ययथा न्यायायालय प्रकरण में उचित आदेश पारित कर देगा।"

3. उपरोक्त आदेश पारित होने के उपरान्तत भी प्राार्थी ने अपने अधिवक्ताा के अस्ववस्थथ होने पर कोई वैकल्पिक व्यवस्थाथा नहीं की गयी अतः न्यायायालय राज्यय सरकार के विद्वाान अपर मुख्यय स्थाथायी अधिवक्ताा श्रीी देवेन्द्र मोहन शुक्लाला की सहायता से पत्राावली का अवलोकन करके उचित आदेश पारित करने की ओर अग्रसर होती है।

4. मध्ययस्थथता एवं सुलह समझौता अधिनियम, 1996 की धारा 11(6) के अंतर्गत प्रस्तुतुत इस प्राार्थना-पत्र द्वाारा प्राार्थी को दिनांक 12.12.2016 को रुपये 1,97,573/- का कार्य आवंटित Versus Counsel for Applicant(s) : Mahesh Chandra Shukla Counsel for Opposite Party(s) : C.S.C. M/S Swastik Enterprises Through Prop. Rajesh Kumar .....Applicant(s) State Of U.P. Through Its Principal Secretary, Public Works Department And Ors. .....Opposite Party(s)

हुआ था। उक्त कार्य के विरुद्ध प्राार्थी को धनराशि का भुगतान बकाया है।

5. प्राार्थना-पत्र के कथनों के अनुसार प्राार्थी ने प्रथम बार दिनांक 24.01.2025 को इस संबंध में प्राार्थना-पत्र दिया। वर्ष 2016 में देय धनराशि के संबंध में 2025 में पहली बार प्राार्थना-पत्र दिया गया एवं प्राार्थी का दावा परिसीमा अवधि से बाधित हो चुका है।

6. ऐसी परिस्थिति में एक मृत दावे के संबंध में मध्ययस्थथ नियुक्त करने का कोई औचित्यय नहीं है।

7. तद्नुनुसार, प्राार्थना-पत्र निरस्तत किया जाता है। December 18, 2025 Ankit ARBT No. 111 of 2025 2 (Subhash Vidyarthi,J.) Digitally signed by :- ANKIT SHARMA High Court of Judicature at Allahabad, Lucknow Bench

You have used today's free searches. Sign in, for free, to keep searching without a limit.

Compass reads the judgments for you and finds the paragraphs for and against your question. Sign in to use it.

My Vault follows judgments for you and records every later decision that cites them. Sign in to keep one.

Sign in to download the court's PDF. The full text stays free to read here.

Sign in, for free, to download the court copy. Reading the full text here stays open to everyone.

Search and read Indian judgments without limits, save them to My Vault and find the relevant paragraphs with Compass.

Open the sign-in page instead