Allahabad High Court

ARPL/46/2025 of Bintey Alam Bano Vs NATIONAL HIGHWAY AUTHORITY OF INDIA THRU MANAGING DIRECTOR, REGIONAL OFFICE, LUCKNOW AND ANR. on 15 December 2025

Cites 0, Cited by 0

JUDICATURE AT ALLAHABAD LUCKNOW APPEAL UNDER SECTION 37 OF ARBITRATION AND CONCILIATION ACT 1996 No. - 46 of 2025 Court No. - 17 HON'BLE SUBHASH VIDYARTHI, J. 1. अपीलाथीर् के िवद्वान अिधवक्ता श्री आफ़ताब अहमद,

HIGH COURT OF JUDICATURE AT ALLAHABAD

LUCKNOW

APPEAL UNDER SECTION 37 OF ARBITRATION AND

CONCILIATION ACT 1996 No. - 46 of 2025

Court No. - 17

HON'BLE SUBHASH VIDYARTHI, J.

Citations and Judicial Treatment

No citing decisions in the index yet

Cited by

0

Decisions in the index citing it

Cites

0

Decisions referred to

In this index

0

Of the decisions it cites

Overruled / Questioned

0

No negative treatment found

Loading the citing and cited decisions…

1. अपीलार्थी के विद्वाान अधिवक्ताा श्रीी आफ़ताब अहमद, विपक्षीी संख्याया 1-भारतीय राष्ट्रीीय राजमार्ग प्रााधिकरण के विद्वाान अधिवक्ताा श्रीी अभिषेक पाठक की तरफ से विद्वाान अधिवक्ताा कु० समीधा को सुना।

2. मध्ययस्थथता एवं सुलह अधिनियम, 1996 की धारा 37 के अंतर्गत प्रस्तुतुत इस अपील के माध्ययम से अपर जिला एवं सत्र न्यायायाधीश, कक्ष संख्याया 8, अयोध्याया द्वाारा प्रकीर्ण सिविल अपील संख्याया 92 वर्ष 2011 में पारित निर्णय एवं आदेश दिनांक 02.09.2025 की वैधता को चुनौती दी गई है जिसके माध्ययम से मध्ययस्थथ (आर्बिट्रेेटर)/ जिला मजिस्ट्रेेट, फैजाबाद द्वाारा प्रकीर्ण वाद संख्याया 15/41/76 (09-10) अंतर्गत धारा 3 G (5) राष्ट्रीीय राजमार्ग अधिनियम, 1956 में पारित आदेश दिनांक 31.10.2011 पुष्ट कर दिया गया।

3. जिला मजिस्ट्रेेट के आदेश की वैधता को अधिनियम की धारा 34 के अंतर्गत चुनौती देनी चाहिए थी, किंतु त्रुुटिवश प्राार्थना-पत्र धारा 37 अंकित हो गया तथा न्यायायालय ने भी धारा 37 का अंकन करते हुए प्राार्थना-पत्र तय कर दिया जबकि वास्ततव में जनपद न्यायायालय अधिनियम की धारा 34 के अंतर्गत शक्तियों का प्रयोग करके प्राार्थना-पत्र तय कर रहा था।

4. मात्र गलत प्राावधान अंकित हो जाने से प्रकरण के गुण-दोष पर कोई प्रभाव नहीं पड़ाा है तथा इस कारण से अपर जिला एवं सत्र न्यायायाधीश द्वाारा पारित आदेश दिनांक 02.09.2025 को अधिनियम की धारा 34 के अंतर्गत पारित आदेश मानते हुए उसकी समीक्षाा धारा 37 के अंतर्गत प्रस्तुतुत इस अपील में की जा रही है।

5. अपीलार्थी ने गाटा संख्याया 774 में से 0.0820 हेक्टेटेयर क्षेेत्रफल वर्ष 06.01.2009 को रु० 3,08000/- (रुपए तीन लाख आठ हजार) में क्रय किया था जबकि कलेक्टटर द्वाारा निर्धारित बाजार भाव से भूमि का मूल्यय रु० 19,68,000/- (रुपए उन्नीनीस लाख अरसठ हजार) आ रहा था। Versus Counsel for Appellant(s) : Aftab Ahmad Counsel for Respondent(s) : Abhishek Pathak Bintey Alam Bano .....Appellant(s) National Highway Authority Of India Thru Managing Director, Regional Office, Lucknow And Anr. .....Respondent(s)

6. कलेक्टटर तथा अपर जनपद न्यायायाधीश द्वाारा पारित आदेशों की वैधता को चुनौती देते हुए अपीलार्थी के विद्वाान अधिवक्ताा ने तर्क दिया कि राष्ट्रीीय राजमार्ग अधिनियम 1956 की धारा 3(G)

(7) (A) के अनुसार सक्षम अधिकारी अथवा मध्ययस्थथ को धारा 3(G) (1) अथवा (5) के अंतर्गत प्रतिकर निर्धारण करते समय धारा 3-A के अंतर्गत विज्ञप्ति प्रकाशित होने की तिथि को भूमि के बाजार भाव को ध्यायान में रखना चाहिए था।

7. अपीलार्थी के विद्वाान अधिवक्ताा ने तर्क दिया कि दिनांक 22.07.2022 को कलेक्टटर द्वाारा निर्धारित बाजार भाव के आधार पर अपीलार्थी द्वाारा क्रय की गई भूमि का मूल्यय रु० 19,68000/- (रुपए उन्नीनीस लाख अरसठ हजार) आता है।

8. अपीलार्थी के विद्वाान अधिवक्ताा ने कहा कि वह अंगीकरण स्ततर पर ही मात्र वैधानिक प्राावधानों पर तर्क रखेंगे तथा ऐसा कोई आधार नहीं रखेंगे जिसके लिए साक्ष्यों को देखना आवश्ययक हो तथा इस कारण से अपील में मध्ययस्थथ तथा जनपद न्यायायाधीश का अभिलेख मंगाने की आवश्ययकता नहीं है।

9. विपक्षीी के विद्वाान अधिवक्ताा ने अपील का विरोध किया तथा विपक्षीी के विद्वाान अधिवक्ताा ने कहा कि यदि न्यायायालय प्रकरण के तथ्यायात्ममक पहलुओं में जाना प्रस्तातावित नहीं कर रही है तो वह इस स्ततर पर अभिलेख मंगाए जाने के बिना अपने तर्क रखने को तत्पपर हैं।

10. कलेक्टटर तथा मध्ययस्थथ दोनों ने ही कलेक्टटर द्वाारा निर्धारित बाजार भाव को ध्यायान में रखे बिना आलोच्यय आदेश पारित किए हैं।

11. उपरोक्त समीक्षाा से प्रथम दृष्टया यह प्रतीत होता है कि प्रतिकर निर्धारण में राष्ट्रीीय राजमार्ग अधिनियम 1956 की धारा 3(G) (7) (a) के प्राावधानों को ध्यायान में नहीं रखा गया है।

12. तदनुसार, यह अपील अंगीकरण स्ततर पर ही स्वीकार की जाती है। अपर जिला एवं सत्र न्यायायाधीश, कक्ष संख्याया 8, अयोध्याया द्वाारा प्रकीर्ण सिविल अपील संख्याया 92 वर्ष 2011 में पारित निर्णय एवं आदेश दिनांक 02.09.2025 तथा मध्ययस्थथ (आर्बिट्रेेटर)/ जिला मजिस्ट्रेेट, फैजाबाद द्वाारा प्रकीर्ण वाद संख्याया 15/41/76 (09-10) अंतर्गत धारा 3 G (5) राष्ट्रीीय राजमार्ग अधिनियम, 1956 में पारित आदेश दिनांक 31.10.2011 अपास्तत किए जाते हैं। प्रकरण मध्ययस्थथ (आर्बिट्रेेटर)/ जिला मजिस्ट्रेेट, अयोध्याया को इस आदेश में की गई टिप्पपणियों के आलोक में पुनः नवीन सिरे से निर्धारित किए जाने हेतु प्रतिप्रेेषित किया जाता है। चूंकि प्रकरण वर्ष 2008 से लंबित है, अतः मध्ययस्थथ (आर्बिट्रेेटर)/ जिला मजिस्ट्रेेट, अयोध्याया प्रकरण को तत्पपरता से निर्धारित करें। December 15, 2025 Sumit ARPL No. 46 of 2025 2 (Subhash Vidyarthi,J.) Digitally signed by :- SUMIT KAPOOR High Court of Judicature at Allahabad, Lucknow Bench

You have used today's free searches. Sign in, for free, to keep searching without a limit.

Compass reads the judgments for you and finds the paragraphs for and against your question. Sign in to use it.

My Vault follows judgments for you and records every later decision that cites them. Sign in to keep one.

Sign in to download the court's PDF. The full text stays free to read here.

Sign in, for free, to download the court copy. Reading the full text here stays open to everyone.

Search and read Indian judgments without limits, save them to My Vault and find the relevant paragraphs with Compass.

Open the sign-in page instead