Allahabad High Court
CRLA/201/2011 of JITENDRA and ANOTHER Vs STATE OF U.P. on 14 November 2025
JUDICATURE AT ALLAHABAD LUCKNOW CRIMINAL APPEAL No. - 201 of 2011 Court No. - 13 HON'BLE SAURABH LAVANIA, J. 1. Heard learned counsel for the appellant(s) and learned AGA for the State Sri Badul Hasan. 2. The instant Criminal Appeal under Section 374 (2) Cr.P.C. has been filed by the appellants
HIGH COURT OF JUDICATURE AT ALLAHABAD
LUCKNOW
CRIMINAL APPEAL No. - 201 of 2011
Court No. - 13
HON'BLE SAURABH LAVANIA, J.
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1. Heard learned counsel for the appellant(s) and learned AGA for the State Sri Badul Hasan.
2. The instant Criminal Appeal under Section 374 (2) Cr.P.C. has been filed by the appellants namely Jitendra S/o Munnu and Chandan S/o Alok Soni challenging the judgment and order 21.12.2010 passed by learned Additional Sessions Judge, F.T.C. No. 30, Barabanki in Session Trial No. 38 of 2009 thereby sentencing the appellants under Section 489 IPC for a period of six months and fine of Rs. 5000/- each.
3. The story of prosecution, in nutshell, is to the effect that on 23.06.2008 accused- appellants namely Jitendra S/o Munnu and Chandan S/o Alok Soni were apprehended by the police party consisting of S.I. R.C. Pandey, Constable/Arvind Singh, Constable/Manoj Kumar, S.I./Shyam Babu Shukla, Constble/Rampratap, at about 06:30 PM.
4. From the possession of accused/Jitendra S/o Munnu eight fake currency notes of Rs. 100/- having No. 3 A N 686677 were recovered. Six fake currency notes of Rs. 100-/ having No. 6 A N 686677 were recovered from the possession of the accused /Parasnath Verma. Six fake notes of Rs. 100/- having No. 6 A N 686677 were recovered from the possession of the accused/Chandan.
5. After the aforesaid, recovery memo (Ext. Ka-1) was prepared. Thereafter, upon completion of investigation charge sheet(s) (Ext. Ka-1 and 2) were submitted before the Court concerned. It is to be noted that the Site Plan (Ext. Ka-3), Chik FIR (Ext. Ka-7) and Expert report (Ext. Ka-8) were also submitted before the Court concerned.
6. After submission of charge sheet, learned Magistrate took cognizance and thereafter the said case was committed to the Court of Session where it was registered as Session Trial No. 38 of 2009 and charges were framed against the appellants, which they denied and claimed trial. Versus Counsel for Appellant(s) : R.N. Shukla Counsel for Respondent(s) : Govt. Advocate Jitendra And Another .....Appellant(s) State of U.P. .....Respondent(s)
7. In order to substantiate its case, prosecution examined as many as nine witnesses namely S.I. Shyambabu Shukla/PW-1, S.I. Rameshchandra Pandey/PW-2, Jagdish Prasad Singh/PW-3, S.I. Ahmad Zalal Zaidi/PW-4 and Jagannath Swami/PW-5. These prosecution of witnesses established the case of the prosecution and proved the documentary evidence viz. charge sheet(s) (Ext. Ka-1 and 2), Site Plan (Ext. Ka-3), Chik FIR (Ext. Ka-7) and Expert report (Ext. Ka-8).
8. That after closing of the evidence, statements of accused/ appellants were recorded in terms of Section 313 Cr.P.C. by the trial court, after explaining the entire evidence and other circumstances, in which the appellants denied the prosecution story and the entire prosecution story was said to be wrong and concocted.
9. After recording of the statement(s) under Section 313 CrPC Defence also produced its witnesses namely Om Prakash Verma/DW-1, Ajay Kumar/DW-2, Hansraj Verma/D.W.-3, Mohd. Sabbir/D.W.-4 and Sunil Soni/D.W.-5.
10. Thereafter, the learned trial court after hearing learned counsel for both the parties and appreciating the entire evidence, oral as well as documentary, found the accused/appellants guilty and convicted them as above. Relevant portion of the order dated 21.12.2010 is extracted here-in-under:- "साक्षीी संख्याया-1 एस०आई० श्यायामबाबू शुक्लाला एस०ओ०जी० ने मुख्यय परीक्षण में कहा कि दिनांक 23.6.08 को मैं एस०आई० के पद पर थाना कोतवाली में बडेल चौकी पर तैनात था। उस दिन मेरे साथ एस०आई० आर०सी० पाण्डेडेय कां० अरविन्दद सिंह, मनीस कुमार, कॉ० रामप्रताप के साथ शान्ति व्यवस्थाथा के सम्बबन्धध में व वांछित अभियुक्त की तलाश में पल्हहरी चौराहे पर मामूद थे और तभी पल्हहरी चौराहे पर जरिए मुखबिर सूचना मिली तीन आदमी जो जाली नोटों का कारोबार करते हैं वह जैदपुर की तरफ से आ रहे है। इस सूचना पर आर०सी० पाण्डेडेय व हम लोग जनता के गवाह लोगों का प्रयास किया लेकिन कोई तैयार नहीं हुए थे और हम लोग वहीं पर खड़ेे आने वाले लोगों का इंतजार करने लगे। तभी तीन आदमी जैदपुर जाने वाली रोड पर आते दिखायी दिए। तभी मुखबिर इशारा कर वह चला गया। जैसे वह लोग पास आए उन्हें रूकने के लिए कहा गया तभी तीनों पलटकर पीछे की तरफ भागने लगे कि तभी फैजाबाद रोड से जैदपुर मोड़ पर 20-25 कदम की दूरी पर शाम 6.30 बजे पकड़ लिया गया। तब आर०सी० पाण्डेडेय द्वाारा उन लोगों का नाम पता पूछा व अलग-अलग जामा तलाशी ली गयी। जिसमें से एक ने अपना नाम जितेन्द्र बताया। जमाता तलाशी लेने पर उसकी जेब से 100-100 रूपए के आठ नोट मिले तथा दूसरे ने अपना नाम पारसनाथ वर्मा उसकी तलाशी पर शर्ट की जेब से 100-100 रूपए के 6 नोट मिले, तीसरे ने अपना नाम चन्ददन बताया उसकी तलाशी पर 100-100 रूपए 6 नोट शर्ट की उपरी जेब से मिली। सभी नोट देखने में असली प्रतीत होते थे लेकिन सभी नोटों के सीरीज व नम्बबर एक ही होने के कारण जाली नोट मालूम हो रहा था। पूछताछ में बताया कि इन नोटों को हम लोग रक्सैसैला बिहार के खान साहब नामक आदमी के पास से लाते है तथा ये नोट यासीन निवासी रसौली के माध्ययम से हम लोग लेकर चलाते हैं और उनको बाजार में चलाए जा रहे हैं और अपनी गलती मानने लगे। तब दरोगा जी ने बताया कि इस कार्य से देश की व्यवस्थाथा को काफी नुकसान होता है तथा दरोगा क्षरा उन्हें उनके जुर्म से अवगत कराया गया और उन्हें हिरासत में लिया गया। नोटों को अलग-अलग लिफाफों में रखकर सीलकर नमूना मोहर तैयार किया था। फर्द मौके पर ही दरोगा के बोलने पर मेरे द्वाारा लिखी गयी थी। फर्द लिखने के बाद हमराहियान व अभियुक्तगण के हस्ताताक्षर व निशनी अंगुठा बनवाया गया तथा फर्द की नकल अभियुक्तगणों को दी गयी। फर्द मेरे लेख व हस्ताताक्षर में थी। मौके से अभियुक्त व बरामद रूपयों व प्रपत्रों के साथ हम लोग थाने आए और दरोगा जी ने फर्द के आधर पर मुकदमा पंजीकृत कराया। विवेचक ने मेरा बयान लिया था। प्रति परीक्षण में कहा कि मुखबिर ने सूचना आर०सी० पाण्डेडेय एस०आई० को दिया था। घटनास्थथल पल्हहरी चौराहे पर नहीं था बल्कि उससे 20-25 कदम दक्षिण पूर्व जैदपुर रोड पर था। वहां आसपास होटल हैं साइकिल की दुकाने हैं पान की दुकाने है और 25 कदम की दूरी पर टैम्पोपो स्टैटैण्डड है। मुल्जिमों ने कहा था कि इन नोटों को चलाने के लिए ले जा रहे है। साक्षीी संख्याया-2 एस०आई० रमेशचन्द्र पाण्डेडेय ने मुख्यय परीक्षण में कहा कि दिनांक 23.06.08 को मैं इसी पद पर
सिटी चौकी इंचार्ज के पद पर तैनात था। उस दिन मैं अपने साथ एस०आई० श्यायाम बाबू शुक्लाला व रामप्रताप के साथ पल्हहरी चौराहे पर थे और आपस में बातचीत हो रही थी तभी जरिए मुखबिर सूचना दी गयी कि तीन लोग जो जैदपुर की तरफ से आ रहे हैं वे लोग नकली नोटों का कारोबार करते हैं तथा जाली नोटों को चलाने के उद्देेश्यय से आ रहे हैं। तब मैंने वहां उपस्थित जनता के लोगों से गवाही के लिए कहा लेकिन कोई तैयार नहीं हुए तब हम सभी लोग वहीं पर मय मुखबिर के खड़ेे होकर कि तभी तीन लोग जो पैदल आ रहे थे मुखबिर ने तीनों की ओर इशारा किया और चला गया। पास आने पर तीनों को रोका टोका गया तो पीछे मुड़कर भागे तो उन्हें 20-25 कदम दौड़ााकर शाम करीब 6.30 बजे पकड़ लिया गया। नाम पूछते हुए जामा तलाशी ली गयी तो एक ने अपना नाम जितेन्द्र पुत्र मुन्नूनू वर्मा बताया तथा तलाशी से उसके पैण्टट की दाहिनी जेब से 100-100 रूपए के आठ नोट जिस पर एक ही सिरीज और नम्बबर 3 ए एन के थे तथा 6 नोट 100-100 के भी 3 ए एन सिरीज के थे। चन्ददन के कब्जेजे से 6 नोट सौ रूपए के 3 ए एन सिरीज के थे कब्जेजे से बरामद हुए। अभियुक्तगण चन्ददन, जितेन्द्र व पारस से बरामद नोट आज न्यायायालय पर एक लिफाफे में जो संख्याया में 20 है, प्रस्तुतुत किए गए है। बरामद सभी नोटों पर कमशः वस्तुतु प्रदर्श-1 ता 20 डाला गया तथा लिफाफा पर वस्तुतु प्रदर्श-21 डाला गया। लिफाफे पर सी०जे०एम०, बाराबंकी के हस्ताताक्षर है। मौके पर बरामद नोटों की फर्द तैयार की गयी थी। फर्द लिखने के बाद उपस्थित पुलिस कर्मचारी व अभियुक्तगण के आलामात बनवाए। फर्द की नकले अभियुक्त को दी गयी। फर्द मेरे लेख व हस्ताताक्षर में थी। फर्द पत्राावली में संलग्नन नहीं है। फर्द पढ़कर अभियुक्तगणों व पुलिस कर्मचारीगण को सुनायी गयी थी। मौके से सबरामद नोटों व अभियुक्तगणों को व प्रपत्रों के साथ थाने आए और थाने पर मुकदमा पंजीकृत कराया। घटना के सम्बबन्धध में विवेचक ने मेरा बयान लिया था। पकड़ेे गए लोगों ने बताया कि हम लोग ये नोट यासीन पुत्र अब्दुल्लाला निवासी रसौली थाना सफदरगंज के द्वाारा रक्सौसौल प्रााप्तत बिहार निवासी खान साहब नाम के व्यक्ति से लाते थे। पकड़ेे गए लोगों को उनके द्वाारा किए गए अपराध से अवगत कराया गया कि आप लोगों द्वाारा जाली भारतीय नोटों को बाजार में चलाकर असली बताते हुए चलाया है जिससे भारतीय अर्थव्यवस्थाथा कमजोर होती है जो दण्डडनीय अपराध है बताकर हिरासत पुलिस में लिया गया। बरामद रूपयों को मौके पर ही अलग-अलग लिफाफों में रखकर सर्वमुहर कर नमूना मुहर तैयार किया था। फर्द मौके पर टार्च की रोशनी में मेरे बोलने पर एस०आई० श्यायाम बाबू शुक्लाला द्वाारा लिखी गयी थी। गिरफ्तातारी की सूचना अभियुक्तगणों के बताए गए पते पर भेजी गयी थी। इस मुकदमें की कायमी मेरे द्वाारा रपट संख्याया 48 समय 19.55 बजे दिनांक 23.06.08 को रोजनामचाआम पर मूल के कम में मेरे द्वाारा की गयी थी। कायमी की मूल जी०डी० भी साथ लेकर आया हूँँ। जो पत्राावली में संलग्नन कार्बन कापी ब13 है जिसे मूल से मैं प्रमाणित कर रहा हूँँ। जिस पर प्रदर्श क-8 डाला गया। प्रति परीक्षण में कहा कि पल्हहरी चौराहे पर मुझे श्यायाम बाबू शुक्लाला अपने हमराहियों का० रामप्रताप के साथ थे। पल्हहरी चौराहे पर में आधा घण्टाटा पहले से मौजूद था। इस पल्हहरी चौराहे से आगे बढ़कर फैजाबाद रोड पर टैक्सीसी स्टैटैण्डड है। पल्हहरी चौराहे से जैदपुर जाने वाली सड़क पर कोल्डड स्टोटोर है। यह घटना पल्हहरी से जैदपुर वाली रोड पर करीब 25 कदम की दूरी पर हुई थी। आगे कहा कि फर्द एस०आई० श्यायाम बाबू शुक्लाला ने मेरे बोलने पर अपने लेख में लिखा था जो बोला था वही लिखा था। पढ़कर सुनाया तब हस्ताताक्षर बनाए थे। साक्षीी संख्याया-3 जगदीश प्रसाद सिंह ने मुख्यय परीक्षण में कहा कि दिनांक 02.08.08 को मैं प्रभारी निरीक्षक के पद पर कोतवाली नगर में तैनात था। थाने पर दर्ज मुकदमा अपराध संख्याया 776/08 अन्ततर्गत धारा 489बी, 489सी भा०द०स० की विवेचना पुलिस अधीक्षक महोदय के आदेश से पूर्व विवेचक एस०आई० अहमद जलाल जैदी द्वाारा की जा रही थी। उक्त आदेश से विवेचना मेरे द्वाारा ग्रहण कर प्राारम्भभ की गयी। पूर्व किता की गयी सी०डी० का अवलोकन किया। बरामद जाली नोटों का परीक्षण रिपोर्ट प्रााप्तत हुई। जिसका उद्धरण सी०डी० में अंकित किया। अवलोकन से सभी बरामद नोट 3 ए एन सिरीज के थ जिसमें 19 नोट 3 ए एन 686677 तथा एक नोट 3 ए एन 686667 का था। सी०डी० के अवलोकन से 8 नोट 3 ए एन और शेष नोट पर 6 ए एन सिरीज अंकित था। दिनांक 20.08.08 को पर्चा 4 किता किया। जिसमें पुनः बयान एफ०आई०आर० लेखक कां० मो० जगन्नानाथ सोनी का लिया गया जिसमें उन्होंने अपने बयान में बताया कि सभी नोट 3 ए एन सिरीज के थे। बोलते समय सहबन 6 ए एन सिरीज अंकित कर दिया। कां०मो० लवकुश ने कम्प्यूयूटर पर 6 ए एन टाइप सहबन करने की बात बतायी थी। पर्चा तितम्भाभा प्रथम दिनांक 27.09.08 को किता किया। जिसमें मुल्जिम सफात खान उर्फ बच्चूचू खान उर्फ मुबारक खान जो अपराध संख्याया 771/08 में गिरफ्तातार कर जेल गया था का वारण्टट अपराध संख्याया 776/08 में रिपोर्ट देकर वारण्टट बनवाया गया। पर्चा तितम्मामा द्वितीय दिनांक 14.10.08 को किता किया गया जिसमें जेल में जाकर मुल्जिम का बयान लेने की अनुमति प्रााप्तत की गयी। पर्चा तितम्मामा तृतीय दिनांक 16.10.08 को किता किाा गया। अनुमति के आधार पर जिला कारागार बाराबंकी जाकर सफात उर्फ बच्चूचू उर्फ मुबारक खान का बयान अंकित किया गया तथा आरोप पत्र संख्याया 362ए/08 अभियुक्त सफात खान उपरोक्त के विरूद्ध आरोप पत्र प्रेेषित किया। दिनांक 20.08.08 को पर्याप्तत
साक्ष्यय पाते हुए अभियुक्तगण जितेन्द्र, पारसनाथ व चन्ददन के विरूद्ध आरोप पत्र संख्याया 362/08 न्यायायालय प्रेेषित किया था। आरोप पत्र संख्याया 362/08 व 362ए/08 मेरे हस्ताताक्षर में है। शामिल पत्राावली है कागज संख्याया अ4 व 5 है। जो एस०टी० नं0-38/09 व 465/09 में संलग्नन है। जिन पर कमश प्रदर्श क-1 व प्रदर्श क-2 डाला गया। मेरे द्वाारा नोटों से सम्बबन्धित परीक्षण रिपोर्ट प्रााप्तत की गयी थी वह पत्राावली में संलग्नन है। कागज संख्याया अ7, अ8 व अ9 है। प्रति परीक्षण में साक्षीी ने कहा कि जांच हेतु जाली नोट मेरे पूर्व विवेचक द्वाारा भेजे गए थे। जब मैंने चार्जशीट लगायी थी तो उससे पहले मैंने एफ०आईआर० व सी०डी० का अवलोकन किया था। एफ०आई०आर० में परीक्षण में नोट संख्याया 3 ए एन 686667 का उल्लेलेख किसी भी अभियुक्त के पास बरामदगी होने का उल्लेलेख नहीं है। पूर्व विवेचक द्वाारा इस नम्बबर की नोट परीक्षण हेतु भेजी गयी थी तभी परीक्षण रिपोर्ट में यह नम्बबर अंकित होकर आया है। साक्षीी संख्याया-4 एस०आई० अहमद जलाल जैदी ने मुख्यय परीक्षण में कहा कि मैं दिनांक 23.06.08 को बहैसियत चौकी इंचार्ज सिविल लाइन कोतवाली बाराबंकी में कार्यरत था। मुकदमा अपराध संख्याया 776/08 धारा 489बी व 489सी भा०द०स० की विवेचना मुझे एस०आई० को प्रााप्तत हुई। मुकदमा उपरोक्त में परचा नम्बबर एक दिनांक 24.06.08 जिसमें मूल चिक, रकल रपट, बयान लेखक एफ०आई०आर० घटनास्थथल का निरीक्षण, समयी साक्ष्यय अंकित किया गया। परचा नम्बबर 2ए उपरोक्त तिथि में जिसमें बयानात गवाहान चश्ममदीद अंकित किया गया तथा परचा नम्बबर 3 दिनांक 02.08.08 को मुकदमा उपरोक्त की विवेचना आदेशानुसार एस०पी० महोदय बाराबंकी द्वाारा विवेचना तत्काकालीन प्रभारी निरीक्षक कोतवाली जे०बी० सिंह द्वाारा ग्रहण किया गया। उनके द्वाारा अग्रिम कार्यवाही की गयी। घटनास्थथल का निरीक्षण वादी की निशांदेही पर मेरे द्वाारा किया गया जिस पर मेरे हस्ताताक्षर है जो शामिल पत्राावली पर है कागज सख्याया अ6 है इस पर प्रदर्श क-3 डाला गया। प्रति परीक्षण में कहा कि यह मुकदमा मेरी अदम मौजूदगी में कायम हुआ। मुझे दिनांक 24.06.08 को विवेचना मिली। आगे कहा कि तीनों पर्चा में मैंने तफ्तीतीश शुरू करने व समाप्तत करने का समय नहीं अकित किया है जो सहबन रह गया है। साक्षीी संख्याया-5 कां० जगन्नानाथ स्वावामी ने मुख्यय परीक्षण में कहा कि दिनांक 23.06.08 को भी में इसी पद पर इसी थाने में तैनात था। उस दिन मुकदमा अपराध संख्याया 776/08 के वादी मुकदमा एस०आई० रमेशचन्द्र पाण्डेडे थाना कोतवाली नगर बाराबंकी अभियुक्तगण व फर्द के साथ उपस्थित आए और फर्द के आधार पर कम्प्यूयूटर आपरेटर कां० वलीउल्लाला खां को बोलकर मैंने मुकदमा अपराध संख्याया 776/08 अन्ततर्गत धारा 489बी, 489सी भा०द०स० बनाम जितेन्द्र आदि फीड कराया था। इसकी कायमी वादी एस०आई० आर०सी० पाण्डेडेय द्वाारा स्ववयं की गयी थी। कायमी की मूल जी०डी० साथ लेकर आया हूँँ। पत्राावली में संलग्नन कम्प्यूयूटराइज्डड चिक को मूल से मिलान करने के बाद प्रमाणित कर रहा हूँँ। चिक पर प्रदर्श क-7 डाला गया। विवेचक ने मेरा बयान लिया था। प्रति परीक्षण में कहा कि मैंने इस एफ०आई०आर० के पहले कोई भी एफ०आई०आर० दर्ज नहीं की थी, न ही इसके बाद ही कोई एफ०आई०आर० दर्ज की थी। फर्द के आधार पर मैंने चिक एफ०आई०आर० दर्ज की थी। बचाव साक्षीी संख्याया-1 ओमप्रकाश वर्मा ने मुख्यय परीक्षण में कहा कि मैं जितेन्द्र पुत्र शिवकुमार के घर के सामने रहता हूँँ। करीब दो वर्ष सन् 2008 के माह जून में रात के करीब 10 बजे जैदपुर थाने का सिपाही कबीर व एक अन्यय दरोगा जितेन्द्र के घर आए थे और जितेन्द्र के घर का दरवाजा खटखटाया जितेन्द्र घर से बाहर निकले सिपाही ने कहा कि बड़ेे साहब ने तुम्हेहे पूछताछ के लिए थाने बुलाया है। जीप में चन्ददन नाम का लड़का जो कस्बेबे में ही रहता है, बैठा था। जितेन्द्र भी कस्बाबा जैदपुर में मोटरसाइकिल के पार्टस की दुकान है। जब हम लोग सोकर सुबह उठे तो पता लगा कि जितेन्द्र अभी तक थाने से नहीं लौटे हैं। बाद में पता चला कि उन्हें बाराबंकी थाने कोतवावली भेज दिया गया है। बाद में पता चला कि कोतवाली नगर पुलिस ने जितेन्द्र का किसी मुकदमें में चालान कर दिया है। अभियोजन पक्ष द्वाारा प्रति परीक्षण करने पर कहा कि मुझे अदालत से सम्ममन नहीं मिला है जितेन्द्र मेरे घर के सामने रहते है। मोहल्लेले के नाते जितेन्द्र मुझे चाचा कहते हैं। जितेन्द्र की माता जी ने बताया था कि जितेन्द्र का फर्जी चालान कर दिया है। बचाव साक्षीी संख्याया-2 अजय कुमार ने मुख्यय परीक्षण में कहा कि मैं जितेन्द्र पुत्र शिवकुमार के घर के बगल में पूरब तरफ रहता हूँँ। सन् 2008 के जून महीने में रात करीब 10 बजे जैदपुर थाने के सिपाही कबीर व एक अन्यय दरोगा जीप से जितेन्द्र के घर आए थे उनका दरवाजा खटखटाया जितेन्द्र घर से बाहर आए तो सिपाही ने जितेन्द्र से कहा कि बड़ेे साहब ने तुम्हेहे पूछताछ के लिए थाने बुलाया है। जीप में करबे का एक लड़का चन्ददन बैठा था। बाद में मुझे पता चला कि थाना जैदपुर की पुलिस ने उसे थाना कोतवाली भेजकर किसी फर्जी केस में फंसा दिया है। जितेन्द्र की मोटरसाइकिल पार्टस की कस्बेबे में दुकान है। अभियोजन पक्ष द्वाारा प्रति परीक्षण करने पर कहा कि मैं अपने घर के बाहरी कमरे में ही लेटा था जिसमें खिड़की लगी है। मैं नहीं बता सकता कि जीप में कुल कितने लोग थे किन्तुतु दो तीन
लोग थे। बचाव साक्षीी संख्याया-3 हंसराज वर्मा ने मुख्यय परीक्षण में कहा कि मैं पारसनाथ को जानता हूँँ। यह मेरे पडोसी है। इनके पास खेती है। उसी से वह अपना व अपने परिवार का पालन पोषण करते है। दिनांक 22.06.08 को रात करीब 11 बजे पारसनाथ के घर पर पुलिस आयी थी। मैं भी मौके पर पहुंंचा तो मैंने पुलिस वालों से बात किया तो उन्होंने कहा कि पारसनाथ को बड़ेे साहब ने पूछताछ के लिए थाने बुलाया है। मेरे व गांव के लोगों के सामने पुलिस ने पारसनाथ के घर की तलाशी ली थी। मेरे सामने पारसनाथ की भी तलाशी पुलिस वालों ने ली थी तो उसके पास से किसी भी अवैध वस्तुतु की बरामदगी नहीं हुई थी। फिर पुलिस वालों पारसनाथ को थाने ले गए। बाद में हम लोगों को पता चला कि किसी मुकदमें में पुलिस वालों ने पारसनाथ का फर्जी चालान कर दिया। प्रधान होने के नाते मैं हर व्यक्ति के सुख दुख व सच्चाचाई कहने के लिए प्रयत्ननरत रहता हूँँ। अभियोजन पक्ष द्वाारा प्रति परीक्षण करने पर कहा कि जब पुलिस वाले आए थे तो एक दरोगा व तीन चार सिपाही व एक अनन्ततराम नाम का आदमी साथ था। जो इनके यहां मिठाई बनारे का काम करता था इस कारण पहचानता है इससे पारसनाथ का पहले झगड़ाा हो चुका था। बचाव साक्षीी संख्याया-4 मो० शब्बीबीर ने मुख्यय परीक्षण में कहा कि चन्ददन सोनी पुत्र आलोक कुमार का घर मेरे घर के सामने है। जून 2008 में मैं अपने घर की छत पर बैठा था। रात करीब 9.30 बजे थाने के सिपाही व दरोगा जीप से चन्ददन के घर आए और चन्ददन को थाने पूछताछ को कहकर बुला ले गए। बाद में मुझे पता चला कि थाना जैदपुर से चन्ददर को थाना कोतवाली नगर भेजकर फर्जी चालान कर दिया गया था। चन्ददन सोनी की फोटोग्रााफी की दुकान कस्बाबा जैदपुर में ही है। अभियोजन पक्ष द्वाारा प्रति परीक्षण करने पर कहा कि जीप में एक ड्रााईवर, एक सिपाही व एक दरोगा थे। तीनों वर्दी में थे। चन्ददन पर अन्यय कोई मुकदमा नहीं चल रहा है। चन्ददन अब भी फोटोग्रााफी का काम कर रहे है। बचाव साक्षीी संख्याया-5 सुनील सोनी ने मुख्यय परीक्षण में कहा कि मैं चन्ददन सोनी पुत्र आलोक कुमार के घर के बगल में रहता हूँँ। चन्ददन सोनी फोटोग्रााफी का काम करते है। माह जून 2008 में रात करीब 9.30 बजे एक सिपाही व दरोगा जीप से चन्ददन के घर आए थे और यह कहकर चन्ददन को बुला ले गए थे कि बड़ेे साहब ने पूछताछ के लिए बुलाया है। सुबह मालूम हुआ कि चन्ददन घर वापस नहीं लौटे है। बाद में पता चला कि चन्ददन का चालान कोतवाली नगर की पुलिस द्वाारा किया गया है। अभियोजन पक्ष द्वाारा प्रति परीक्षण करने पर कहा कि चन्ददन मेरी बिरादरी के है। पुलिस रात को करीब 9.30 बजे ले गयी थी। चन्ददन के पिताजी नीचे चन्ददन को पुलिस द्वाारा ले जाते समय रोका गया कि नहीं मैं नहीं बता सकता क्योंकि मैं गर्मी के कारण छत पर था। जहां तक सत्र परीक्षण संख्याया 38/09 राज्यय प्रति जितेन्द्र आदि का प्रश्नन है इस प्रकरण में घटना दिनांक 22.06.08 समय 18.30 बजे की दर्शित की गयी है। जिसकी प्रथम सूचना रिपोर्अ दिनांक 22.06. 08 को ही 19.15 बजे अर्थात एक घण्टाटा 25 मिनट बाद लिखायी गयी है। वादी मुकदमा उ०नि० आर०सी० पाण्डेडेय है जिसके द्वाारा दी गयी फर्द बरामदगी के आधार पर अभियुक्तगण जितेन्द्र, पारसनाथ एवं चन्ददन के विरूद्ध अभियोग अन्ततर्गत धारा 489बी, 489 सी भा०द०स० में पंजीकृत किया गया। पत्राावली पर प्रथम सूचना रिपोर्ट की कम्प्यूयूटर की प्रति प्रस्तुतुत की गयी है और अभियोजन साक्ष्यय में यह तथ्यय प्रकाश में लाया गया है कि सुसंगत समय की बहुत सारी प्रथम सूचना रिपोर्ट कार्यालय मुख्यय न्यायायिक मजिस्ट्रेेट से चोरी हो गयी थी जिसके बारे में प्रथम सूचना रिपोर्ट कोतवाली में दर्ज हुई थी। इस प्रकार मूल प्रथम सूचना रिपोर्ट व फर्द बरामदगी उपलब्धध नहीं है लेकिन फर्द बरामदगी के आधार पर लिखी गयी फर्द चिक की कम्प्यूयूटर प्रति न्यायायालय में प्रस्तुतुत है और जो कि थाना प्रभारी के हस्ताताक्षर से है तथा साक्षीी द्वाारा न्यायायालय में प्रमाणित किया गया है। जिस पर प्रदर्श क-7 डाला गया है। अतः मेरे दृष्टिकोण से यह कम्प्यूयूटर से तैयार की गयी मूल प्रति की अनुसार ही साक्ष्यय में ग्रााह्य है। अतएव फर्द बरामदगी व प्रथम सूचना रिपोर्ट गायब हो जाने का कोई प्रतिकूल प्रभाव अभियोजन कार्यवाही पर नहीं पड़ता है क्योंकि इसके लिए किसी भी प्रकार से अभियोजन पक्ष को दोषी नहीं माना जा सकता। जहां तक अभियुक्तगण के विरूद्ध लगाया गया आरोप अन्ततर्गत धारा 489बी एवं 489 सी भा०द०स० सिद्ध होने का प्रश्नन है, अभियोजन पक्ष से परीक्षित साक्षीी संख्याया-1 उ०नि० श्यायाम बाबू शुक्लाला घटना के समय वादी मुकदमा उ०नि० रमेशचन्द्र पाण्डेडेय का हमराह रहा है जिसने अपने मुख्यय परीक्षण में अभियोजन कथानक व वादी मुकदमा के कथन का सारवान रूप से समर्थन किया है और घटना के समय घटनास्थथल से अभियुक्त जितेन्द्र की जामा तलाशी सलेने से उसकी जेब से 100-100 रूपए के आठ नोट, दूसरे अभियुक्त पारसनाथ की जामा तलाशी से उसके शर्ट की जेब से
100-100 रूपए के 6 नोट होना तस्दीदीक किया है। चिक के अनुसार अभियुक्त जितेन्द्र के पास सेस बरामद नोटों का नम्बबर एक ही था जिन पर 3 ए एन 786677 अंकित था। इस तहरीर के अनुसार दूसरे अभियुक्त पारसनाथ के पास से बरामद नोटों पर कमांक 6 ए एन 686677 तथा अभियुक्त चन्ददन के पास से बरामद नोटों का भी क्रमांक 6 ए एन 686677 दर्शित किया है। इस प्रकार चिक के अनुसार सभी नोटों के सीरियल नम्बबरों में भिन्ननता है। यद्यपि सबके अंक एक जैसे है। प्रदर्श क-8 जो कि बैंक नोट मुद्रणालय देवास मध्यय प्रदेश से नोट की जांच से सम्बबन्धित आख्याया है, में सभी नोटों की क्रम संख्याया 3 ए एन 686677 पाया गया है। बचाव पक्ष द्वाारा मुख्यय रूप से यह बिन्दु बचाव में उठाया गया है कि चिक में दर्शित नोट जो कि अभियुक्त पारसनाथ व चन्ददन के पास से बरामद किये गए थे उनका सीरियल नम्बबर 6 ए एन है जब कि बैंक नोट मुद्रणालय देवास मध्यय प्रदेश द्वाारा जारी जाच आख्याया के अनुसार तमाम सीरियल नम्बबर 3 ए एन की है। इस बिन्दु पर साक्षीी संख्याया-3 जगदीश प्रसाद सिंह विवेचक एवं साक्षीी सख्याया- 5 कां० जगन्नानाथ स्वावामी जो कि घटना के समय थाने पर तैनाती कांस्टेटेबिल मोहर्रिर की थी ने तहरीर को कम्प्यूयूटर में फीड किए जाने के बारे में बयान दिया है और कहा है कि फर्द के आधार पर कम्प्यूयूटर ऑपरेटर कां० वलीउल्लाला खां को बोलकर वादी मुकदमा ने स्ववयं लिखाया था और फर्द के आधार पर चिक एफ०आई०आर० लिखा था। साक्षीी सख्याया-3 जगदीश प्रसाद सिंह ने अपने बयान में कहा है कि बरामद जाली नोटों की परीक्षण रिपोर्ट प्रााप्तत हुई जिसका उद्धरण सी०डी० में अंकित किया था, के अवलोकन से सभी बरामद नोट 3 ए एन सिरीज की थी। जिनमें 19 नोटों का अंक एक ही था जो कि 686677 था तथा एक नोट का अंक 686667 था। जब कि सी०डी० के अवलोकन से 8 नोट 3 ए एन सिरीज और शेष नोट पर 6 ए एन सिरीज अंकित थ। जिसके कारण विवेचक ने दिनांक 20.08.08 को सी०डी० का पर्चा नं0-4 दोबारा किता किया और एफ०आई०आर० लेखक कां०मो० जगन्नानाथ सोनी का दोबारा बयान लिया जिसने अपने बयान में बताया कि सभी नोट 3 ए एन सिरीज के थे बनाते समय सहबसन 3 ए एन सिरीज अंकित करा दिया। कां० मो० लवकुश कम्प्यूयूटर पर 6 ए एन टाइप करने की बात सहबन त्रुुटि थी और पर्चा संख्याया-1 दिनांक 27.09.08 को किता किया था। यह स्पपष्ट है कि बैंक नोट मुद्रणालय देवास मध्यय प्रदेश को नोट न्यायायालय मुख्यय न्यायायिक मजिस्ट्रेेट बाराबंकी के माध्ययम से भेजा गया था और सभी नोटें 3 ए एन सिरीज की पायी गयी थी जिसमें 19 नोटें के अंक एक ही थे और एक नोट के अंक में मामूली भिन्ननता थी। इस तरह का कोई भी साक्ष्यय पत्राावली पर विद्यमान नहीं है कि न्यायायालय द्वाारा परीक्षण हेतु प्रेेषित किए गए माल को किसी प्रकार से बदला गया और पुलिस के लिए उसी कमांक के अतिरिक्त नोटें बनाकर सैम्पुपुल को प्रभावित करने की सम्भाभावना भी नहीं के बराबर है यद्यपि नोटों की कूटरचना के सम्भभव लेकिन उन्हीं कमाकों की अतिरिक्त नोटें अतिरिक्त, पुलिस द्वाारा तैयार किया जाना संभव नहीं था अतः संख्याया-3 विवेचक के बयान व बैक नोट मुद्रणालय देवास की रिपोर्ट से यह स्पपष्ट है कि चिक में सीरीयल की त्रुुटि गलत बोले जाने की मानवीय भूल के कारण हुई जबकि वास्ततविक तमाम बरामद नोटों का सीरियल 3 ए एन ही था और साक्षीी संख्याया-1 व 2 ने अपने बयान में घटना के समय अभियुक्तगण से इन नोटों का बरामद होना युक्तियुक्त सन्देदेह से परे पुष्टि की है जिसे बैंक नोट मुद्रणालय देवास की जांच में कूटरचित पाया गया था। बचाव पक्ष से बचाव में अभियुक्त जितेन्द्र के लिए बचाव साक्षीी संख्याया-1 व 2 ने अपने बयान में अभियुक्त जितेन्द्र को रात के करीब 10 बजे जैदपुर थाने के सिपाही कबीर व एक अन्यय उप निरीक्षक द्वाारा जितेन्द्र के घर जाकर दरवाजा खोलवाकर साथ ले आने की बात कही है। दोनों ही साक्षियों के बयान एक ही तरह के है। दोनों ही पड़ोोसी होने का दावा करते है लेकिन 10 बजे रात की घटना में जब कि ग्राामीण क्षेेत्रों में सामान्ययतः हर व्यक्ति सो जाता है इनका घटना के हर पल का प्रत्ययक्षदर्शी साक्षीी होने का कथन विश्वाास उत्पपन्नन नहीं करता है और इस अवधारणा की पुष्टि इस तथ्यय से भी होती है कि अभियुक्त जितेन्द्र का तथाकथित फर्जी चालान पुलिस द्वाारा किए जाने पर और जिसकी जानकारी पूरे गांव को होने के पश्चाात भी गांव के लोगों और ग्रााम्यय प्रतिनिधियों द्वाारा किसी प्रकार की कोई प्रतिक्रिया नहीं की गयी। किसी उच्चाचाधिकारी को कोई शिकायत नहीं की गयी अपने आप में यह अवधारित करने का पर्याप्तत आधार है कि बचाव साक्षीी संख्याया 1 व 2 किराए के सिखा पढ़ााकर तैयार किए गए साक्षीी हैं। इसी प्रकार अभियुक्त पारसनाथ के बारे में बचाव साक्षीी संख्याया-3 हंसराज वर्मा ने बयान देते हुए अभियुक्त पारसनाथ को रात के करीब 11 बजे पुलिस द्वाारा बुला ले आना कहा है। प्रति परीक्षण में इस साक्षीी ने घटना के समय गांव के अन्यय दूसरे लोगों की उपस्थिति बतायी गयी है। इस प्रकरण में घटना शाम 18.30 बजे की है जब कि महिना जून का था पूरा उजाला रहता है और प्रथम सूचना रिपोर्ट भी 19.55 बजे दर्ज की गयी है। जिसकी पुष्टि सभी अभियोजन साक्षीीगण द्वाारा किया गया है। ऐसी दशा में करीब 11 बजे रात को अभियुक्त पारसनाथ को उसके घर से बुलाए जाने के तथ्यय का कथन विश्वसनीय नहीं है। साक्षीी ने अपने प्रति परीक्षण में कहा है कि एक ड्रााइवर एक सिपाही व एक दरोगा थे। अभियुक्त जितेन्द्र की उपस्थिति के बारे में कुछ नहीं कहा गया है। अतः यह अवधारित करने का पर्याप्तत आधार विद्यमान है कि बचाव साक्षीी संख्याया-3 एक सिखा पढ़ााकर तैयार किया गया बचाव साक्षीी है। उसका कथन विश्वाास
उत्पपन्नन करने वाला नहीं है। अभियुक्त चन्ददन सोनी के लिएि बचाव पक्ष से परीक्षित साक्षीी संख्याया-4 मो० शब्बीबीर सने भी अभियुक्त चन्ददन सोनी को रात करीब 9.30 बजे घर से पूछताछ करने के लिए घर से बुलाकर ले जाने की बात कही है। इसी प्रकार बचाव साक्षीी संख्याया 5 सुनील सोनी ने भी बयान देते हुए कहा है कि रात करीब 9.30 बजे एक सिपाही वव दरोगा जीप से चन्ददन के घर आए थे और यह कहकर चन्ददन को बुला ले गए थे कि बड़ेे साहब ने पूछताछ के लिए बुलाया है। दोनों साक्षीी ने यह स्वीवीकार किया है कि अभियुक्त चन्ददन के बुलाने पर गवाही देने आए है। प्रति परीक्षण में कहा है कि पुलिस रात को करीब 9.30 बजे ले गयी थी। चन्ददन के पिताजी ने चन्ददन को पुलिस द्वाारा ले जाते समय रोका गया कि नहीं मैं नहीं बता सकता क्योंकि में गर्मी के कारण छत पर था। अतः यह अवधारित करने का पर्याप्तत आधार विद्यमान है कि बचाव साक्षीी संख्याया-4 एवं 5 का कथन भी विश्वाास उत्पपन्नन करने वाला नहीं है। अतः मैं इस विनम्र व सुविचारित निष्ककर्ष का हूँँ कि घटना के समय अभियुक्त जितेन्द्र के पास से 8 नोट व अभियुक्त पारसनाथ व चन्ददन के पास से 6-6 कूटरचित नोटें बरामद होना युक्तियुक्त सन्देदेह से परे सिद्ध होता है। जहां तक सत्र परीक्षण संख्याया 38/09 में अभियुक्तगण के विरूद्ध लगाया गया आरोप अन्ततर्गत धारा 489बी भा०द०स० सिद्ध होने का प्रश्नन है, साक्षीीगण 1 व 2 द्वाारा यह कहा गया है कि अभियुक्तगण यह नोट चलाने के लिए ले जा रहे थे परन्तुतु किसी व्यक्ति से चलाने की वार्ता करते हुए किसी वस्तुतु की खरीद-फरोख्तत अथवा नोटों को असल नोटों से वादी मुकदमा का कोई अपकृत्यय करते हुए नहीं पाया गया था। यदि साक्षीी संख्याया 1 व 2 के बयान पर पूरा विश्वाास कर भी लिया जाए तो मात्र कूटरचित नोटों को असली के रूप में प्रयोग किए जाने की मंशा मात्र सिद्ध होती है और धारा 489वी भा०द०स० के अन्ततर्गत कूटरचित नोटों को असली नोट के रूप में चलाने की मशा रखना अथवा चलाने के प्रयास करने के अपकृत्यय को दण्डडनीय अपकृत्यय नहीं बनाता है। उनका प्रयोग किया जाना आवश्ययक होता है। अतः मैं इस विनम्र व सुविचारित निष्ककर्ष का हूँँ कि अभियुक्तगण के विरूद्ध धारा 489 बी भा०द०स० युक्तियुक्त सन्देदेह से परे सिद्ध नहीं होता है। जहां तक अभियुक्तगण के विरूद्ध लगाया गया आरोप अन्ततर्गत धारा 489सी भा०द०स० सिद्ध होने का प्रश्नन है, साक्षीीगण 1 व 2 के बयान व बैक नोट मुद्रणालय देवास मध्यय प्रदेश की रिपोर्ट से स्पपष्ट है कि सभी नोटें कूटरचित थी और एक ही अंक की थी। अभियुक्त जितेन्द्र व चन्ददन सोनी व्यवसायी हैं और अभियुक्त पारसनाथ कृषि कार्य करता है लेकिन पढ़ाा लिखा व्यक्ति है। हर सामान्यय व्यक्ति को इस बात की जानकारी होती है कि कोई भी दो नोटें एक नम्बबर की नहीं होती हैं जब कि इन अभियुक्तगणों केपास से बरामद सभी नोटें एक अंक की थी। अतः यह अवधारित करने का पर्याप्तत आधार विद्यमान है कि एक सामान्यय व्यक्ति भी ऐसी नोटों को कूटरचित होना मानेगा और यह अवधारित करने का पर्याप्तत आधार विद्यमान है कि अभियुक्तगण को इस तथ्यय की पूर्ण जानकारी थी कि तथाकथित कूटरचित बैंक नोटें हैं और 1972 किमिनल लॉ जनरल 1114 में बासी रेड्डीी के प्रकरण में माननीय मैसूर उच्चच न्यायायालय द्वाारा दिए गए निर्णय सिद्धाान्तत के दृष्टिगत अभियुक्तगण के पास से बरामद जाली नोटों की संख्याया के दृष्टिगत यह अवधारित करने का पर्याप्तत आधार विद्यमान है कि अभियुक्तगण द्वाारा कूटरचित नोटों को धारण करने का आशय उन्हें वास्ततविक नोटों के रूप में प्रयोग में लाया जाना था। अतः अभियुक्त जितेन्द्र, पारसनाथ व चन्ददन सोनी के विरूद्ध लगाया गया आरोप अन्ततर्गत धारा 489सी भा०द०स० भी युक्तियुक्त सन्देदेह से परे सिद्ध होता है। जहां तक सत्र परीक्षण संख्याया 465/09 में अभियुक्त सफात खान उर्फ बच्चूचू खान उर्फ मुबारक खान के विरूद्ध लगाया गया आरोप अन्ततर्गत धारा 489बी, 489सी एवं 120 बी भा०द०स० का प्रश्नन है, इस प्रकरण में अभियुक्त सफात खान उर्फ बच्चूचू खान उर्फ मुबारक खान के पास से कोई नोट बरामद नहीं हुई है। अतः धारा 489बी एवं 489सी भा०द०स० युक्तियुक्त सन्देदेह से परे सिद्ध नहीं होता है। धारा 489बी, 489सी सपठित धारा 120बी भा०द०स० सिद्ध होने का प्रश्नन है। अभियुक्त के बारे में अभियोजन पक्ष से मात्र यह साक्ष्यय प्रस्तुतुत किया गया है कि उन्हें यह नोट बिहार के एक खान साहब से प्रााप्तत होती थी और तथाकथित खान साहब के रूप में अभियुक्त सफात खान उर्फ बच्चूचू खान उर्फ मुबारक खान की पहचान हुई और उसे इस मामले में सह अभियुक्त बनाया गया। किन्तुतु अभियोजन पक्ष का किसी भी सह अभियुक्त से इकबाली साक्षीी नहीं बनाया और न तो अभियोजन साक्षीी के रूप में ही न्यायायालय में प्रस्तुतुत किया। जिस समय सह अभियुक्तगण ने वादी मुकदमा को यह कथन कहा जाना अभियोजन पक्ष से बताया जा रहा था उस समय सभी अभियुक्तगण पुलिस अभिरक्षाा में थे। अतः स्ववयं अभियुक्तगण के विरूद्ध भी उक्त कथन धारा 25 व 26 साक्ष्यय अधिनियम के अन्ततर्गत साक्ष्यय में ग्रााह्य नहीं था। जहां तक सह अभियुक्त सफात खान उर्फ बच्चूचू खान उर्फ मुबारक खान के विरूद्ध अभियुक्तगण जितेन्द्र, पारसनाथ एवं चन्ददन की संस्वीवीकृति का प्रश्नन है कि उनकी इन नोटों की आपूर्ति अभियुक्त सफात खान उर्फ बच्चूचू खान उर्फ मुबारक खान द्वाारा की जाती थी
रामचन्द्र प्रति उत्तर प्रदेश राज्यय ए०आई०आर० 1857 सुप्रीीम कोर्ट 381, न्यूयूनिस कार्पोरेशन प्रति भगवान दास (1972) 74 पंजाब लॉ रिपोर्ट पेंज 274, भीसासाव प्रति उड़ीीस राज्यय ए०आई०आर० 1956 उड़ीीस 177 में दी गयी विधि व्यवस्थाथा के दृष्टिगत मैं इस विनम्र व सुविचारित निष्ककर्ष का हूँँकि सह अभियुक्त द्वाारा पुलिस के समक्ष की गयी संस्वीवीकृति अभियुक्त सफात खान उर्फ बच्चूचू खान उर्फ मुबारक खान के विरूद्ध सारवान साक्ष्यय नहीं है व कथन साक्ष्यय में ग्रााह्य नहीं है और मात्र इस आधार पर कि सह अभियुक्त के न्यायायिक अभिरक्षाा में रहते हुए नोटों की आपूर्ति सह अभियुक्त सफात खान उर्फ बच्चूचू खान उर्फ मुबारक खान को दोषी करार नहीं दिया जा सकता है। यद्यपि इस आशय की प्रबल सम्भाभावना विद्यमान है कि नोटों की आपूर्ति की गयी हो किन्तुतु इस सम्भाभावना के आधार पर अभियोजन पक्ष अभियुक्त के विरूद्ध लगाया गया आरोप युक्तियुक्त सन्देदेह से परे सिद्ध करने के उत्तरदायित्वव से मुक्त नहीं होता है और मैं इस विनम्र व सुविचारित निष्ककर्ष का हूँँकि अभियुक्त सफात खान उर्फ बच्चूचू खान उर्फ मुबारक खान के विरूद्ध लगाया गया आरोप अन्ततर्गत धारा 489बी, 489सी सपठित धारा 120बी भा०द०स० युक्तियुक्त सन्देदेह से परे सिद्ध नहीं होता है। अभियुक्त सफात खान उर्फ बच्चूचू खान उर्फ मुबारक खान सन्देदेह का लाभ पाने का पात्र है। सत्र परीक्षण संख्याया 38/09 में अभियुक्त जितेन्द्र, पारसनाथ एवं चन्ददन सोनी को धारा 489सी भा०द०स० के अपराध के लिए दोषसिद्ध करार दिया जाता है। दोषसिद्ध अभियुक्तगण जितेन्द्र, पारसनाथ एवं चन्ददन व्यक्तिगत रूप से न्यायायालय में उपस्थित है। उनके व्यक्तिगत बंधपत्र द जमानत पत्र खण्डित किए जाते हैं। अभियुक्तगण को अभिरक्षाा में लिया जाए। सजा के प्रश्नन पर राज्यय की ओर से विद्वाान सहायक जिला शासकीय अधिवक्ताा फौजदारी श्रीी एम०पी० वर्मा एवं बचाव पक्ष से वरिष्ठ विद्वाान अधिवक्ताा श्रीी राजेश चन्द्र मिश्राा एवं श्रीी ओमशंकर गुप्ताता को सुना गया। विद्वाान सहायक जिला शासकीय अधिवक्ताा फौजदारी का तर्क है कि सभी अभियुक्तगण ने गम्भीभीर अपराध किया है अतः उन्हें विधि द्वाारा निर्धारित अधिकतम दण्डड से दण्डित किया जाए। जब कि बचाव पक्ष का कथन है कि सभी अभियुक्तगण नवयुवक हैं। उनका प्रथम अपराध है। उनका कोई आपराधिक इतिहास नहीं है। अतः उन्हें प्रथम अपराधी परिवीक्षाा अधिनियम के उपबन्धों का लाभ दिया जाए। अभियुक्त जितेन्द्र की उम्र 22 वर्ष, चन्ददन की उम्र 23 वर्ष तथा अभियुक्त पारसनाथ की उम्र 53 वर्ष बतायी गयी है। बचाव पक्ष अधिवक्ताा ने यह तर्क भी प्रस्तुतुत किया कि अभियुक्त पारसनाथ की प्रथम दोषसिद्धि है और वह अपने परिवार का जीवकोपार्जक है। अभियोजन पक्ष द्वाारा दोषसिद्ध अभियुक्तगण का कोई आपराधिक इतिहास नहीं प्रस्तुतुत किाा गया है और अपराध अन्ततर्गत धारा 489सी भा०द०स० सात वर्ष तक के कारावास अथवा अर्थदण्डड अथवा दोनों से दण्डडनीय है। चूंकि अभियुक्तगण की यह प्रथम दोषसिद्धि है और अपराध कारागार अथवा अर्थदण्डड से दण्डडनीय है। अभियुक्त जितेन्द्र के पास से सौ-सौ रूपए के आठ नोट तथा अभियुक्त चन्ददन व पारसनाथ के पास से सौ-सौ रूपए के 6-6 नोटें बरामद हुई हैं। तद्नुसार मेरे विचार से अभियुक्तगण को समुचित अर्थदण्डड से किया जाना न्यायाय की मंशा पूरी करता है।
आदेश
सत्र परीक्षण संख्याया 38/09 में दोषसिद्ध अभियुक्तगण जितेन्द्र, पारसनाथ एवं चन्ददन को दोषसिद्ध अपराध अन्ततर्गत धारा-489सी भा०द०स० के अपराध के लिए पाच-पांच हजार रूपए के अर्थदण्डड से दण्डित किया जाता है। जुर्माना अदा न करने पर 6-6 माह के सश्रम कारावास से दण्डित किया जाए। सत्र परीक्षण संख्याया 465/09 में अभियुक्त सफात खान उर्फ बच्चूचू खान उर्फ मुबारक खान के विरूद्ध लगाया गया आरोप अन्ततर्गत धारा 489बी, 489सी एवं 120बी भा०द०स० में सन्देदेह का लाभदेते हुए दोषमुक्त किया जाता है। अभियुक्तगण से बरामद कूटरचित नोटें अपील अवधि समाप्तत होने अथवा अपील में पारित दिशा-निर्देशों के अधीन राज्यय के पक्ष में जब्तत की जाएं। निर्णय की एक प्रति सत्र परीक्षण संख्याया 465 / 09 पर रखी जाय।"
11. In the aforesaid background of the case, learned counsel for the appellant submitted that the trial Court committed error of fact and law both in not considering the facts of the case in the light of ht evidence produced before it and as such interference of this Court is required in the matter and appellants are liable to be acquitted.
12. Sri Arun Kumar, learned AGA appearing for the State submitted that judgment of the trial court is justified as prosecution has established its case as indicated in the FIR.
13. Upon due consideration of submissions of learned counsel for the parties and the evidence available on record, this Court finds that the trial Court has not committed any irregularity or illegality in passing the judgment under appeal dated 21.12.2010. It is for the following reason(s)-
(i) The recovery of fake currency from the possession of the accused-appellant and documentary evidence, indicated above, were proved before the trial Court by the prosecution witnesses namely S.I. Shyambabu Shukla, S.I. Ramesh Chandra Pandey, Incharge Police Station-Jagdish Prasad Singh, S.I. Ahmad Jalal Zaidi and Constable Jagannath Swami.
(ii) The fact that the currency recovered from the possession of the accused-appellants was fake was established/proved by providing the expert report (Ext. Ka-8).
14. For the reason(s) aforesaid, the instant appeal is dismissed.
15. Copy of this judgment and trial Court record be sent back to the Court concerned. November 14, 2025 Vinay/-
(Saurabh Lavania,J.) Digitally signed by :- VINAY KUMAR High Court of Judicature at Allahabad, Lucknow Bench