Chhattisgarh High Court
MAC/94/2023 of VISHWANATH NAMBIYAR Vs ABHISHEK RAO on 11 October 2026
No. 94 of 2023} CGHC010010792023 2026:CGHC:44082 अप्रति�वे�द्य छत्ती सगढ़ उच्च न्या�या�लया , ति�ल�सपु�र तिवेतिवेध अपु ल ( प्रति�कर ) क्रमां�!क
CGHC010010792023
2026:CGHC:44082
अप्रतिवेद्य
छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय
, बिलासपुर
विविध अपील
( प्रतिकर
) क्रमांक
/2023
विश्वनाथ नम्बि
यर पिता केशव नम्बि
यर, आयु लगभग 50 वर्ष, निवासी-बोधघाट थाना के पीछे, संजय गांधी वार्ड संख्या 34, जगदलपुर, जिला बस्तर, छत्तीसगढ़ ।
(दोषी वाहन स्कूटी क्रमांक सी.जी.-17-के.जी.-9120 की स्वामी)
-----अपीलार्थी/दावाकर्ता
विरूद्घ
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1. अभिषेक राव पिता हनुमंत राव, आयु लगभग 30 वर्ष, निवासी-गांधी नगर, नगर निगम के सामने, जगदलपुर, जिला बस्तर, छत्तीसगढ़ । (दोषी वाहन स्कूटी क्रमांक सी.जी.-17-के.जी.-9120 की चालक व स्वामी)
2. शाखा प्रबंधक, द ओरियंटल इंश्योरेंस कंपनी लिमिटेडड, शाखा कार्यालय-होटल लक्ष्मण एवन्यू, जगदलपुर, जिला-बस्तर, छत्तीसगढ़ । (दोषी वाहन स्कूटी क्रमांक सी.जी.-17-के.जी.-9120 की बीमा कंपनी) -----प्रत्यर्थीगण अपीलार्थी/दावाकर्ता द्वारा : श्री एच.ए.पी.एस. भाटिया, अधिवक्ता । चालक-स्वामी/प्रत्यर्थी क्रमांक-1 द्वारा : कोई उपस्थि त नहीं । बीमा कंपनी/प्रत्यर्थी क्रमांक-2 द्वारा : श्री प्रवीण कुमार तुल्सयान, अधिवक्ता । न्यायमूर्ति श्री संजय कुमार जायसवाल !! निर्णय पीठ पर पारित !! 12/10/2026
1. मोटर यान अधिनियम, 1988 की धारा 173 के अंतर्गत प्रस्तुत इस अपील में प्रथम अतिरिक्त मोटर दुर्घटना दावा अधिकरण, जगदलपुर, जिला-बस्तर (छत्तीसगढ़) द्वारा दावा प्रकरण क्रमांक 295/2021, “विश्वनाथ नम्बि यर विरुद्ध अभिषेक राव वगैरह” में पारित अधिनिर्णय दिनांक 30/11/2022 को चुनौती दी गई है, जिसे आगे संक्षेप में “प्रश्नाधीन अधिनिर्णय” से संबोधित किया जा रहा है ।
2. प्रकरण के तथ्य, संक्षेप में, इस प्रकार हैं कि विश्वनाथ नम्बि यर (आहत) दिनांक 20/12/2020 को मोटरसाईकिल में अपने कार्य पर जा रहा था । गोयल धर्मशाला (जगदलपुर) के पास प्रत्यर्थी अभिषेक राव जूपिटर स्कूटी क्रमांक सी.जी.-17-के.जी.- 9120 (जिसे आगे संक्षेप में “दोषी वाहन” से संबोधित किया जा रहा है) को तेज गति एवं लापरवाहीपूर्वक चलाते हुए आया, जिसकी ठोकर लगने के फलस्वरूप विश्वनाथ नम्बि यर के हाथ की दो अंगुलियों, दायां घुटना, चेहरा, आंख एवं शरीर के अन्य भागों में गंभीर चोटें आईं । उक्त दुर्घटना के संबंध में थाना-बोधघाट, जगदलपुर में अपराध क्रमांक 395/ 2022 के अंतर्गत अपराध पंजीबद्ध किया गया ।
3. आहत विश्वनाथ नम्बि यर द्वारा मोटर यान अधिनियम की धारा 166 के अंतर्गत प्रतिकर की मांग करते हुए दावा आवेदन प्रस्तुत किया गया । जिस पर अधिकरण द्वारा उभयपक्ष को सुनने के पश्चात यह निर्धारित किया गया कि आहत विश्वनाथ नम्बि यर छत्तीसगढ़ शासन के जल संसाधन विभाग में टाईप कीपर के पद पर पदस्थ है तथा पूर्व की भांति अपना वेतन प्राप्त कर रहा है, इसलिए उसकी भविष्य की आय में कोई हानि नहीं हुई है । अधिकरण द्वारा उपचार व्यय के मद में ₹4,807/- तथा शारीरिक एवं मानसिक पीड़ा, सहायक एवं पौष्टिक आहार के मद में ₹40,000/- अर्थात् कुल ₹44,807/- की राशि मय वार्षिक ब्याज के अधिनिर्णीत की गई, जिसमें वृद्धि किए जाने का निवेदन अपील में किया गया है ।
4. अपीलार्थी/आहत पक्ष के विद्वान अधिवक्ता का तर्क है कि आहत विश्वनाथ नम्बि यर की दो अंगुलियां पूर्णतः क्षतिग्रस्त हुई हैं, जिसके संबंध में जिला मेडिकल बोर्ड, जगदलपुर द्वारा प्रदर्श पी-22 के रूप में स्थायी विकलांगता प्रमाणपत्र जारी किया गया है, जिसे चिकित्सक लखन लाल ठाकुर द्वारा प्रमाणित भी किया गया है । आहत विश्वनाथ नम्बि यर ने भी अपने दावे के समर्थन में साक्ष्य प्रस्तुत किया है, फिर भी अधिकरण द्वारा स्थायी विकलांगता के मद में कोई प्रतिकर राशि निर्धारित नहीं की गई है । अतः भविष्य की आय की हानि के साथ-साथ अन्य मदों में भी यथोचित प्रतिकर राशि में वृद्धि की जाए ।
5. बीमा कंपनी/प्रत्यर्थी क्रमांक-2 के विद्वान अधिवक्ता ने अपील का विरोध करते हुए तर्क प्रस्तुत किया कि अधिकरण द्वारा अभिलेख पर उपलब्ध मौखि क एवं दस्तावेजी साक्ष्य का समुचित मूल्यांकन करने के पश्चात विधिसम्मत निष्कर्ष अभिलिखि त किया गया है । अपीलार्थी पक्ष का तर्क स्वीकार किए जाने योग्य नहीं है । अतः अपील खारिज की जाए ।
6. उपस्थि त पक्ष के तर्क श्रवण किए गए तथा अभिलेख का सूक्ष्मतापूर्वक परिशीलन किया गया ।
7. अभिलेख पर प्रस्तुत साक्ष्य के अनुसार यह स्थि ति स्पष्ट है कि चिकित्सक लखन लाल ठाकुर के कथनानुसार अपीलार्थी के दाहिने हाथ की तीसरी एवं चौथी अंगुली पूरी तरह क्षतिग्रस्त बताई गई हैं, जो कार्य नहीं कर पा रही थीं तथा साथ ही कलाई में जकड़न भी आ गई थी । यह भी स्पष्ट होता है कि उक्त चोट के कारण अपीलार्थी, जो शासकीय सेवा में है, की आय में कोई हानि नहीं हुई है । यह भी स्पष्ट नहीं होता कि उपचार के लिए अपीलार्थी अस्पताल में कितने दिनों तक भर्ती रहा । तथापि, चिकित्सक लखन लाल ठाकुर के कथन से यह स्थि ति स्पष्ट है कि अपीलार्थी के दाहिने हाथ की कलाई में न केवल
जकड़न है, बल्कि उसके हाथ की तीसरी एवं चौथी अंगुलियां कार्य नहीं करती हैं तथा पूर्णतः क्षतिग्रस्त हैं । ऐसी दशा में निश्चि त रूप से अपीलार्थी को भविष्य में अपने दैनिक कामकाज में असुविधा होगी । भविष्य में कुछ उपचार व्यय भी संभावित है तथा कुछ ऐसे व्यय भी होते हैं, जिनके संबंध में उपचार के दौरान बिल अथवा रसीद रखना संभव नहीं होता है ।
8. उपरोक्त अवस्था में, जब अपीलार्थी की आय में कोई हानि नहीं हुई है, इसलिए स्थायी विकलांगता के संबंध में पृथक रूप से गणना कर प्रतिकर राशि प्रदान किया जाना उचित नहीं पाया जाता । तथापि, उपर्युक्त परिस्थि तियों को दृष्टिगत रखते हुए निम्नानुसार प्रतिकर राशि निर्धारित की जाती है:- क्रं. मद इस न्यायालय द्वारा अधिनिर्णीत प्रतिकर
उपचार खर्च के लिए 5,000
शारीरिक एवं मानसिक पीड़ा के लिए 25,000
सहायक एवं पौष्टिक आहार तथा परिवहन के लिए 25,000
दैनिक कामकाज में होने वाली असुविधा के लिए 50,000
भविष्य में संभावित उपचार व्यय के लिए 15,000 कुल 1,20,000
9. इस प्रकार, अधिकरण द्वारा अधिनिर्णीत ₹44,807/- की तुलना में इस न्यायालय द्वारा कुल ₹1,20,000/- का प्रतिकर निर्धारित किया जाता है । फलतः, दावाकर्ता ₹75,193/- की अतिरिक्त प्रतिकर राशि प्राप्त करने का अधिकारी है ।
10. परिणामस्वरूप, दावाकर्ता द्वारा प्रस्तुत अपील आंशिक रूप से स्वीकार की जाती है । अधिकरण द्वारा प्रदत्त प्रतिकर के अतिरिक्त ₹75,193/- दावाकर्ता प्राप्त करने का अधिकारी है । उक्त अतिरिक्त प्रतिकर राशि पर दावा आवेदन दिनांक से उसके वास्तविक भुगतान तक 6% (छः प्रतिशत) वार्षिक की दर से ब्याज देय होगा तथा “प्रश्नाधीन अधिनिर्णय” को उपर्युक्त सीमा तक संशोधित किया जाता है ।
11. रजिस्ट्री को निर्देशित किया जाता है कि इस अपील में दावाकर्ता के पक्ष में स्वीकृत अतिरिक्त प्रतिकर राशि के संबंध में उसे विधिवत् सूचित किया जाए । इस प्रयोजनार्थ, आवश्यक होने पर संबंधित क्षेत्र, जहाँ दावाकर्ता निवास करता है, के जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के सचिव के समन्वय से पैरालीगल स्वयंसेवकों की सहायता प्राप्त की जा सकती है ।
12. निर्णय की प्रति के साथ अधिकरण का अभिलेख शीघ्रतापूर्वक आवश्यक कार्यवाही हेतु सूचनार्थ व पालनार्थ वापस प्रेषित हो । सही/- (संजय कुमार जायसवाल) न्यायाधीश पोमन