Debts Recovery Tribunals and Appellate Tribunals
M/S ANNAPURNA INDUSTRIES vs STATE BANK OF INDIA on 18 June 2025
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**CONTD. ORDER - SHEET**
<table border="1"><thead><tr><th data-bbox="48 118 148 151">DATE</th><th data-bbox="148 118 734 151">DESCRIPTION OF THE ORDER</th><th data-bbox="734 118 914 151">REMARK</th></tr></thead><tbody><tr><td data-bbox="48 151 148 890">18.06.2025</td><td data-bbox="148 151 734 890"><p>मेसर्स अन्नपूर्णा इण्डस्ट्रियल द्वारा विधिक प्रतिनिधि विरुद्ध<br/>स्टेट बैंक ऑफ इंडिया एवं अन्य</p><p>अपील.ए. 02 / 2025</p><p>अपीलार्थी पक्ष के लिए श्री आरिफ इकबाल अधिवक्ता।</p><p>उत्तरवादी पक्ष के लिए श्री संदीप अरोरा अधिवक्ता।</p><ol><li>1. उभय पक्ष को अपील की पोषणीयता के बिन्दु पर सुना गया है।</li><li>2. इस आदेश के द्वारा इस बिन्दु का निराकरण किया जा रहा है कि क्या अपीलार्थी पक्ष को धारा 30 आर.डी.बी.एक्ट 1993 के प्रावधानों के अंतर्गत प्रस्तुत की गई इस अपील में धारा 30-ए आर.डी.बी.एक्ट के प्रावधानानुसार बकाया ऋण राशि का 50 प्रतिशत जमा किये जाने की अनिवार्यता है या नहीं।</li><li>3. अपीलार्थी मेसर्स अन्नपूर्णा इण्डस्ट्रीज द्वारा विधिक उत्तराधिकारी श्याम जी गुप्ता ने यह अपील इस अधिकरण के बसूली अधिकारी द्वारा डी.आर.सी. क्रमांक 402/2022 में पारित आदेश दिनांक 30.12.2024 को चुनौती देने हेतु दिनांक 05.02.2025 को प्रस्तुत की गई है।</li><li>4. रजिस्ट्री द्वारा किये गये पृष्ठांकन के अनुसार अपीलार्थी पक्ष ने न्यायालय शुल्क 30,000 /- (तीस हजार) रुपये भुगतान करते हुए अपील प्रस्तुत किया है।</li></ol><div style="text-align: right;"></div></td><td data-bbox="734 151 914 890"></td></tr></tbody></table>
<table border="1"><thead><tr><th data-bbox="81 115 183 148">DATE</th><th data-bbox="183 115 768 148">DESCRIPTION OF THE ORDER</th><th data-bbox="768 115 953 148">REMARK</th></tr></thead><tbody><tr><td data-bbox="81 148 183 890"></td><td data-bbox="183 148 768 890"><p>5. यद्यपि आदेश दिनांक 30.12.2024 के विरुद्ध दिनांक 05.02.2025 को प्रस्तुत अपील प्रथम दृष्ट्या आदेश पारित होने दिनांक से 30 दिवस के अंदर प्रस्तुत नहीं है, किन्तु समय सीमा का प्रश्न आगे भविष्य में गुण दोष पर विचारण हेतु लंबित रखते हुए प्रथमतः उत्तरवादी बैंक द्वारा उठाई गई आपत्ति के प्रकाश में धारा 30-ए आर.डी.बी.एक्ट 1993 की प्रायोज्यता एवं इस दृष्टिकोण से अपील की पोषणीयता के प्रश्न का निर्धारण किया जा रहा है।</p><p>6. धारा 30-ए आर.डी.बी.एक्ट 1993 के प्रावधानानुसार जब किसी ऐसे व्यक्ति के द्वारा जिसके विरुद्ध बकाया ऋण राशि देय है, वसूली अधिकारी द्वारा पारित किसी आदेश के विरुद्ध ऋण वसूली अधिकरण के समक्ष धारा 30 आर. डी.बी. एक्ट 1993 के अनुसार अपील प्रस्तुत की जाती है तब अपील तब तक सुनवाई हेतु नहीं ली जायेगी, जब तक कि उस व्यक्ति ने अधिकरण द्वारा निर्धारित बकाया ऋण राशि का 50 प्रतिशत जमा न कर दिया हो। धारा 30-ए आर.डी.बी.एक्ट 1993 के प्रावधान अक्षरशः निम्नानुसार हैं –</p><p style="text-align: center;"><b>[30A. Deposit of amount of debt due for filing appeal against orders of the Recovery Officer.-</b> Where an appeal is preferred against any order of the Recovery Officer, under section 30, by any person from whom the amount of debt is due to a bank or financial institution or consortium of</p><div style="text-align: center;"></div></td><td data-bbox="768 148 953 890"></td></tr></tbody></table>
**CONTD. ORDER - SHEET**
<table border="1"><thead><tr><th data-bbox="53 119 155 155">DATE</th><th data-bbox="155 119 741 155">DESCRIPTION OF THE ORDER</th><th data-bbox="741 119 925 155">REMARK</th></tr></thead><tbody><tr><td data-bbox="53 155 155 895"></td><td data-bbox="155 155 741 895"><p>banks or financial institutions, such appeal shall not be entertained by the Tribunal unless such person has deposited with the Tribunal fifty per cent of the amount of debt due as determined by the Tribunal.]</p><p>7. अपीलार्थी पक्ष का मुख्य तर्क है कि अपीलार्थी श्यामजी गुप्ता ऋणी व्यक्ति नहीं है बल्कि एक प्रतिवादी का उत्तराधिकारी है जिसके विरुद्ध बकाया ऋण राशि भुगतान किये जाने का उत्तरदायित्व निर्धारित नहीं है इस कारण अपीलार्थी श्यामजी गुप्ता को धारा 30-ए आर.डी.बी.एक्ट 1993 के अनुसार प्री-डिपॉजिट की अनिवार्यता नहीं है।</p><p>8. वसूली अधिकारी द्वारा संधारित वसूली प्रकरण का, आहुत कर अवलोकन किये जाने पर पाया जाता है कि इस अधिकरण द्वारा निर्णीत ओ.ए. 1134/2019 में घोषित निर्णय दिनांक 01.04.2022 के अंतर्गत निर्णीत ऋण राशि 7,44,27,670.83 पैसे (सात करोड़ चवालीस लाख सत्ताईस हजार छह सौ सत्तर रुपये तेरासी पैसे) की वसूली कार्यवाही प्रस्तावित की गई है। वसूली सर्टिफिकेट के अनुसार अपीलार्थी का पिता स्वर्गीय धनंजय प्रसाद सर्टिफिकेट डेटर क्रमांक 8 था एवं निर्णीत ऋण राशि सर्टिफिकेट डेटर क्रमांक 01 लगायत 10 जिसमें अपीलार्थी श्याम जी गुप्ता के पिता स्वर्गीय श्री धनंजय प्रसाद भी सम्मिलित थे, के विरुद्ध संयुक्ततः अथवा पृथकतः उक्त बकाया ऋण राशि की वसूली किये जाने का निर्देश देते</p></td><td data-bbox="741 155 925 895"></td></tr></tbody></table>
<table border="1"><thead><tr><th data-bbox="81 121 178 151">DATE</th><th data-bbox="178 121 766 151">DESCRIPTION OF THE ORDER</th><th data-bbox="766 121 942 151">REMARK</th></tr></thead><tbody><tr><td data-bbox="81 151 178 892"></td><td data-bbox="178 151 766 892"><p>हुए रिकवरी सर्टिफिकेट प्रेषित हुआ है अर्थात प्रत्येक सर्टिफिकेट डेटर बकाया सम्पूर्ण राशि को संयुक्त: अथवा पृथकत: सिक्योर्ड किडिटर को पटाने के लिए उत्तरदायी है।</p><p>9. वसूली प्रकरण के अवलोकन से पाया जाता है कि वसूली अधिकारी द्वारा ऋण वसूली कार्यवाही के अंतर्गत सिक्योर्ड एसेट के विरुद्ध विक्रय उद्घोषणा सभी सर्टिफिकेट डेटर के विरुद्ध प्रेषित की गई एवं सेल कंफर्मेशन लेटर दिनांक 30.12.2024 के अनुसार एक आवासीय सम्पत्ति मोहल्ला रानीगंज बाजार, मौजा कोटवा परगना ढावा तहसील बैरिया, जिला बलिया के विषय में विक्रय पुष्ट किया गया एवं नीलामी केता के पक्ष में सेल सर्टिफिकेट दिनांक 25.03. 2025 दिया गया है।</p><p>10. सर्टिफिकेट डेटर क्रमांक 08 के विधिक उत्तराधिकारी श्याम जी गुप्ता द्वारा दिनांक 25.07.2024 को नीलामी कार्यवाही दिनांक 19.07.2024 को इस आधार पर आक्षेपित किया गया कि सर्टिफिकेट डेटर क्रमांक 08 अर्थात धनंजय प्रसाद की मृत्यु दिनांक 21.05. 2023 को हो चुकी है किन्तु मृत सर्टिफिकेट डेटर के उत्तराधिकारियों को पक्षकार नहीं बनाया गया। इसी आपत्ति अभ्यावेदन का निराकरण अधिकरण के वसूली अधिकारी ने आक्षेपित आदेश दिनांक 30.12.2024 के माध्यम</p></td><td data-bbox="766 151 942 892"></td></tr></tbody></table>
<table border="1"><thead><tr><th data-bbox="52 118 154 154">DATE</th><th data-bbox="154 118 741 154">DESCRIPTION OF THE ORDER</th><th data-bbox="741 118 924 154">REMARK</th></tr></thead><tbody><tr><td data-bbox="52 154 154 894"></td><td data-bbox="154 154 741 894"><p>से किया है, जिसके विरुद्ध अपीलार्थी पक्ष द्वारा यह अपील प्रस्तुत की गई है।</p><p>11. विचारणीय प्रश्न यह है कि क्या अपीलार्थी पक्ष ऋणी व्यक्ति की श्रेणी में है अथवा नहीं। इस सन्दर्भ में इस अधिकरण द्वारा ओ.ए. 1134/2019 में घोषित निर्णय दिनांक 01.04.2022 एवं इस निर्णय के प्रकाश में प्रेषित रिकवरी सर्टिफिकेट से स्पष्ट है कि धनंजय प्रसाद सर्टिफिकेट डेटर क्रमांक 8 के रूप में रिकवरी सर्टिफिकेट में सूचीबद्ध रहा जो ओ.ए. में प्रतिवादी क्रमांक 8 था जिसके विरुद्ध सम्पूर्ण बकाया ऋण 7,44,27,670.83 रुपये (सात करोड़ चवालीस लाख सत्ताईस हजार छह सौ सत्तर रुपये तेरासी पैसे) धन ब्याज के विषय में पृथकतः एवं संयुक्ततः डिक्री पारित हुई जो ऋण संव्यवहार का एक जमानतदार रहा एवं अपीलार्थी श्याम जी गुप्ता ने स्वतः को सर्टिफिकेट डेटर स्वर्गीय श्री धनंजय प्रसाद का उत्तराधिकारी पुत्र होना प्रकट करते हुए मेसर्स अन्नपूर्ण इण्डस्ट्रीज का प्रतिनिधित्व करते हुए यह अपील प्रस्तुत किया है अर्थात रिकवरी सर्टिफिकेट में सर्टिफिकेट डेटर क्रमांक 1 मेसर्स अन्नपूर्ण इण्डस्ट्रीज को उत्तराधिकारी के रूप में इस अपील में संयोजित कर श्याम जी गुप्ता के माध्यम से यह अपील प्रस्तुत की गई है अर्थात जहां मुख्य ऋणी फर्म मेसर्स अन्नपूर्ण इण्डस्ट्रीज है, वहीं सर्टिफिकेट डेटर क्रमांक 8 स्वर्गीय श्री</p></td><td data-bbox="741 154 924 894"></td></tr></tbody></table>
**CONTD. ORDER - SHEET**
<table border="1"><thead><tr><th data-bbox="83 121 183 151">DATE</th><th data-bbox="183 121 768 151">DESCRIPTION OF THE ORDER</th><th data-bbox="768 121 948 151">REMARK</th></tr></thead><tbody><tr><td data-bbox="83 151 183 893"></td><td data-bbox="183 151 768 893"><p>धनंजय प्रसाद के विधिक उत्तराधिकारी के हैसियत से श्याम जी गुप्ता ऋणी फर्म का प्रतिनिधित्व कर रहा है तो जब इस अधिकरण द्वारा प्रेषित रिकवरी सर्टिफिकेट में बकाया सम्पूर्ण ऋण सिक्योर्ड क्रिडिटर को संयुक्ततः अथवा पृथकतः पटाने की जवाबदारी प्रत्येक सर्टिफिकेट डेटर पर है तब ऋणी मेसर्स अन्पूर्ण इण्डस्ट्रीज भी अपीलार्थी के रूप में ऋणी व्यक्ति है एवं इस फर्म का प्रतिनिधित्व करने वाला व्यक्ति श्यामजी गुप्ता जो सर्टिफिकेट डेटर क्रमांक 8 स्वर्गीय श्री धनंजय प्रसाद का पुत्र है, वह भी ऋणी व्यक्ति के उत्तराधिकारी के नाते विधिक प्रावधानों के प्रकाश में ऋण पटाने के दायित्वाधीन होने से ऋणी व्यक्ति की श्रेणी में आता है।</p><p>12. धारा 59-ए सम्पत्ति हस्तांतरण अधिनियम के अनुसार बंधककर्ता वह व्यक्ति भी होता है जो बंधककर्ता के माध्यम से बंधक सम्पत्ति पर स्वत्व अर्जित करता है तो जब अपीलार्थी श्याम जी गुप्ता के पिता ने जिस सम्पत्ति को सिक्योर्ड क्रिडिटर बैंक के पक्ष में बंधक कर जमानत निष्पादित किया, उस सम्पत्ति के विषय में मूल जमानतदार धनंजय प्रसाद की मृत्यु हो जाने के पश्चात धनंजय प्रसाद के उत्तराधिकारी बंधककर्ता की हैसियत रखते थे एवं हिन्दु मिताक्षरा विधि द्वारा मुल्ला वाल्युम-1, 20वां संस्करण के अनुच्छेद 259 के</p></td><td data-bbox="768 151 948 893"></td></tr></tbody></table>
**CONTD. ORDER - SHEET**
<table border="1"><thead><tr><th data-bbox="53 115 155 150">DATE</th><th data-bbox="155 115 740 150">DESCRIPTION OF THE ORDER</th><th data-bbox="740 115 925 150">REMARK</th></tr></thead><tbody><tr><td data-bbox="53 150 155 892"></td><td data-bbox="155 150 740 892"><p>अनुसार पूर्वज द्वारा लिये गये ऋण को पटाने का पवित्र दायित्व, पुत्र, पौत्र एवं प्रपोत्र का होता है तो जब स्वर्गीय धनंजय प्रसाद ने जमानतदार की हैसियत से सिक्योर्ड क्रिडिटर द्वारा ऋणी फर्म को दिये गये ऋण का भुगतान करने का वचन दिया जिसके विरुद्ध इस अधिकरण द्वारा डिक्री पारित की गई तब स्वर्गीय धनंजय प्रसाद की मृत्यु के पश्चात अपीलार्थी श्याम जी गुप्ता स्वर्गीय श्री धनंजय प्रसाद के दायित्व अर्थात ऋण पटाने की जवाबदारी को पूरा करने के लिए विधिक रूप से बाध्य है एवं बंधक सम्पत्ति पर उत्तराधिकार अर्जित करने के कारण भी ऋणी व्यक्ति की हैसियत से ऋण पटाने के लिए उत्तरदायी है। इस दृष्टिकोण से इस पीठ का मत है कि अपीलार्थी श्याम जी गुप्ता व्यक्तिगत हैसियत से एवं ऋणी फर्म मेसर्स अन्नपूर्णा इण्डस्ट्रियल का प्रतिनिधित्व करने के हैसियत से भी ऋणी व्यक्ति की श्रेणी में है अर्थात अपीलार्थी फर्म एवं श्याम जी गुप्ता दोनों सिक्योर्ड क्रिडिटर उत्तरवादी बैंक को देय ऋण का भुगतान करने के लिए उत्तरदायी हैं।</p><p>13. अपीलार्थी पक्ष की ओर से <u>माननीय इलाहाबाद उच्च न्यायालय द्वारा वन कुमार जिंदल विरुद्ध बैंक ऑफ इंडिया, गोरखपुर एवं अन्य सिविल मिसलेनियस रिट पिटीशन नंबर – 70348/2006</u> में घोषित निर्णय दिनांक</p></td><td data-bbox="740 150 925 892"></td></tr></tbody></table>
**CONTD. ORDER - SHEET**
<table border="1"><thead><tr><th data-bbox="78 117 178 148">DATE</th><th data-bbox="178 117 764 148">DESCRIPTION OF THE ORDER</th><th data-bbox="764 117 944 148">REMARK</th></tr></thead><tbody><tr><td data-bbox="78 148 178 890"></td><td data-bbox="178 148 764 890"><p>07.09.2007 को सन्दर्भित कर तर्क रखा गया है कि अपीलार्थी श्याम जी गुप्ता जो ऋण संव्यवहार का पक्षकार नहीं है, थर्ड पार्टी के श्रेणी में है इस कारण धारा 30-ए आर.डी.बी. एक्ट 993 के प्रावधान प्री-डिपॉजिट के लिए बाध्य नहीं है। माननीय इलाहाबाद के उपरोक्त न्यायदृष्टांत पर पूरा आदर प्रकट करते हुए इस पीठ का मत है कि धारा 30-ए आर.डी.बी.एक्ट 1993 के प्रावधान दिनांक 01.09.2016 से प्रभावी हुए हैं अर्थात दिनांक 07.09.2007 को माननीय इलाहाबाद के द्वारा उक्त निर्णय घोषित किया गया है तब उक्त प्रावधान प्रभावी नहीं थे इस कारण इन प्रावधानों पर विचार करने का अवसर माननीय इलाहाबाद उच्च न्यायालय के समक्ष नहीं था। इस कारण अपीलार्थी पक्ष को इस प्रकरण में इस न्यायदृष्टांत से लाभांवित नहीं किया जा सकता फिर अपीलार्थी फर्म जो खुद रिकवरी सर्टिफिकेट में मुख्य ऋणी फर्म है, वह इस अपील प्रकरण में थर्ड पार्टी नहीं मानी जा सकती।</p><p>14. अपीलार्थी पक्ष द्वारा साथ ही माननीय उच्चतम न्यायालय के न्यायदृष्टांत विनायक पुरुषोत्तम दुबे विरुद्ध जयश्री पदमाकर भट्ट एवं अन्य सिविल अपील 7768-7769/2023 में घोषित निर्णय दिनांक 01 मार्च 2024 को सन्दर्भित करते हुए आपत्ति ली गई है कि अपीलार्थी पक्ष सम्पूर्ण बकाया</p></td><td data-bbox="764 148 944 890"></td></tr></tbody></table>
<table border="1"><thead><tr><th data-bbox="54 119 155 155">DATE</th><th data-bbox="155 119 743 155">DESCRIPTION OF THE ORDER</th><th data-bbox="743 119 926 155">REMARK</th></tr></thead><tbody><tr><td data-bbox="54 155 155 895"></td><td data-bbox="155 155 743 895"><p>ऋण पटाने के लिए उत्तरदायी नहीं है बल्कि विक्रय की गई सम्पत्ति के विक्रय मूल्य के अनुपात में उत्तरदायी है एवं तदानुसार अपीलार्थी पक्ष ने 29 लाख ( उन्नीस लाख) रुपये का डिमाण्ड ड्राफ्ट तैयार किया है जिसे जमा कर अपीलार्थी पक्ष विक्रय शुदा सम्पत्ति का बंधकमोचन का हकदार है, किन्तु धारा 30-ए आर.डी.बी.एक्ट 1993 के प्रावधानों के अनुसार बकाया ऋण का 50 प्रतिशत जमा करने की बाध्यता अपीलार्थी पक्ष पर नहीं है।</p><p>15. माननीय उच्चतम न्यायालय द्वारा उपरोक्त सन्दर्भित न्यायदृष्टांत में धारा 50 सी. पी.सी. के सन्दर्भ में अभिमत प्रतिपादित किया गया है कि ऋणी व्यक्ति का विधिक उत्तराधिकारी सिर्फ उसी सीमा तक उत्तरदायी होता है जिस अनुपात में मृत व्यक्ति की सम्पत्ति उसे प्राप्त हुई है, किन्तु इस प्रकरण में अपीलार्थी/आपत्तिकर्ता श्याम जी गुप्ता ने वसूली अधिकारी के समक्ष दिनांक 25.07.2024 को जो आपत्ति अभ्यावेदन प्रस्तुत किया उसमें इस सन्दर्भ में कोई उल्लेख नहीं है कि श्याम जी गुप्ता को उसके पिता सर्टिफिकेट डेटर क्रमांक 08 स्वर्गीय श्री धनंजय प्रसाद से उत्तराधिकार में कुल किन्तु सम्पत्ति प्राप्त हुई है। तो जब अपीलार्थी पक्ष ने प्रस्तुत किये गये आपत्ति अभ्यावेदन में ऐसा कोई अभिकथन नहीं किया कि मात्र 29 लाख (उन्नीस लाख) रुपये</p><div style="text-align: center;"></div></td><td data-bbox="743 155 926 895"></td></tr></tbody></table>
<table border="1"><thead><tr><th data-bbox="78 121 178 151">DATE</th><th data-bbox="178 121 763 151">DESCRIPTION OF THE ORDER</th><th data-bbox="763 121 942 151">REMARK</th></tr></thead><tbody><tr><td data-bbox="78 151 178 892"></td><td data-bbox="178 151 763 892"><p>मूल्य की सत्यपत्ति उसे उसके स्वर्गीय पिता श्री धनंजय प्रसाद गुप्ता से प्राप्त हुई है तब अपीलार्थी पक्ष धारा 50 सी.पी.सी. को सन्दर्भित कर धारा 30-ए आर.डी.बी.एक्ट 1993 की विधिक बाध्यता से मुक्त नहीं हो सकता अर्थात इस प्रकरण की परिस्थितियों में अपीलार्थी पक्ष को <u>माननीय उच्चतम न्यायालय के न्यायदृष्टांत विनायक पुरुषोत्तम दुबे विरुद्ध जयश्री पदमाकर भट्ट एवं अन्य विलि अपील 7768-7769/2023</u> में घोषित निर्णय दिनांक <u>01 मार्च 2024</u> से लाभांविता नहीं किया जा सकता।</p><p>16. उत्तरवादी बैंक के लिए प्रस्तुत किये गये लिखित तर्क के माध्यम से <u>माननीय उच्चतम न्यायालय द्वारा अल्लोकम पिटाप्या एवं अन्य विरुद्ध इलाहाबाद बैंक एवं अन्य ए.आई. आर. 2017 एस.सी. 3069 एवं इस अधिकरण द्वारा अपील एण्ड.डी.एन. नंबर 276/2023</u> में पारित आदेश दिनांक <u>21.06.2023</u> से उत्पन्न विविध याचिका क्रमांक <u>127/2024</u> सुनी मंगलानी विरुद्ध बैंक ऑफ बड़ौदा में माननीय मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय द्वारा पारित आदेश दिनांक <u>28.02.2024</u> एवं माननीय मद्रास उच्च न्यायालय द्वारा के. राधाकृष्णम विरुद्ध इण्डियन बैंक उब्ल्यु.पी.नंबर <u>16796/2017</u> में घोषित निर्णय दिनांक <u>17.09.2017</u> को सन्दर्भित करते हुए अपीलार्थी पक्ष पर धारा 30-ए आर.डी.बी.</p><div style="text-align: center;"></div></td><td data-bbox="763 151 942 892"></td></tr></tbody></table>
<table border="1"><thead><tr><th data-bbox="61 122 158 154">DATE</th><th data-bbox="158 122 748 154">DESCRIPTION OF THE ORDER</th><th data-bbox="748 122 926 154">REMARK</th></tr></thead><tbody><tr><td data-bbox="61 154 158 895"></td><td data-bbox="158 154 748 895"><p>एक्ट 1993 के प्रावधानानुसार बकाया ऋण का 50 प्रतिशत जमा करने की बाध्यता का पक्ष रखा गया है।</p><p>17. तो जब इस अधिकरण के दृष्टिकोण से अपीलार्थी फर्म अन्नपूर्णा इण्डस्ट्रियल, रिकवरी सर्टिफिकेट की मुख्य ऋणी व्यक्ति है एवं फर्म का प्रतिनिधित्व श्याम जी गुप्ता सर्टिफिकेट डेटर क्रमांक 8, स्वर्गीय श्री धनंजय प्रसाद गुप्ता का पुत्र होकर अपने पिता के ऋण दायित्व के अधीन ऋण पटाने के लिए उत्तरदायी है अर्थात श्याम जी गुप्ता भी ऋणी व्यक्ति है तब अपीलार्थी पक्ष को धारा 30-ए आर.डी.बी.एक्ट 1993 के विधिक एवं आज्ञात्मक प्रावधानों का पालन करने की अनिवार्यता है। <b>माननीय उच्चतम न्यायालय द्वारा नारायण चन्द्र घोष विरुद्ध यू.को. बैंक एवं अन्य (2011) 4 एस. सी.सी. 548</b> के मामले में प्री-डिपॉजिट की शर्त को आज्ञात्मक आवश्यकता प्रतिपादित किया है। यद्यपि यह न्यायदृष्टांत धारा 18(1) सरफेसी एक्ट 2002 के अंतर्गत माननीय डी.आर.ए.टी. के समक्ष प्रस्तुत होने वाली अपील के सन्दर्भ में है, किन्तु सिद्धांतिक रूप से देखा जाये तो धारा 30-ए आर.डी.बी.एक्ट 1993 एवं धारा 18 सरफेसी एक्ट 2002 के अंतर्गत अपील की ग्राह्यता हेतु प्री-डिपॉजिट की शर्त समरूप है। इस दृष्टिकोण से इस पीठ का मत है कि धारा 30-ए आर.डी.बी.एक्ट 1993 के अंतर्गत</p></td><td data-bbox="748 154 926 895"></td></tr></tbody></table>
<table border="1"><thead><tr><th data-bbox="71 116 175 151">DATE</th><th data-bbox="175 116 761 151">DESCRIPTION OF THE ORDER</th><th data-bbox="761 116 947 151">REMARK</th></tr></thead><tbody><tr><td data-bbox="71 151 175 893"></td><td data-bbox="175 151 761 893"><p>प्रावधानित प्री-डिपॉजिट की अनिवार्यता धारा 30 आर.डी.बी.एक्ट 1993 के अंतर्गत प्रस्तुत की जाने वाली अपील को गुण दोष पर सुने जाने हेतु आज्ञात्मक पूर्ववर्ती शर्त है अर्थात वह व्यक्ति जिसके विरुद्ध सिक्योरिड क्रिडिटर को भुगतान योग्य ऋण के भुगतान की जवाबदारी है उसके द्वारा प्रस्तुत अपील तब तक सुने जाने योग्य नहीं होगी जब तक कि अधिकरण द्वारा निर्धारित देय ऋण का 50 प्रतिशत प्री-डिपॉजिट नहीं कर दिया जाता।</p><p>18. इस प्रकरण में प्रदान किये गये रिकवरी सर्टिफिकेट के अनुसार ऋणी पक्ष पर 7,44,27,670.83 पैसे (सात करोड़ चवालीस लाख सत्ताईस हजार छह सौ सत्तर रुपये तेरासी पैसे) दिनांक 01.04.2022 की स्थिति में ऋण देय था इसके अतिरिक्त भविष्यवर्ती ब्याज एवं अन्य प्रभार भी वसूलनीय है, किन्तु अधिकरण द्वारा निर्णय के माध्यम से निर्धारित देय राशि की मात्रा 7,44,27,670/- (सात करोड़ चवालीस लाख सत्ताईस हजार छह सौ सत्तर रुपये) की है। इसी राशि का 50 प्रतिशत अर्थात 3,72,13,835/- (तीन करोड़ बहत्तर लाख तेरह हजार आठ सौ पैंतीस रुपये) प्रस्तुत अपील गुण दोष पर सुने जाने हेतु ऋणी व्यक्ति अर्थात अपीलार्थी के लिए प्री-डिपॉजिट करने की अनिवार्यता है।</p></td><td data-bbox="761 151 947 893"></td></tr></tbody></table>
<table border="1"><thead><tr><th data-bbox="54 123 151 154">DATE</th><th data-bbox="151 123 738 154">DESCRIPTION OF THE ORDER</th><th data-bbox="738 123 920 154">REMARK</th></tr></thead><tbody><tr><td data-bbox="54 154 151 895"></td><td data-bbox="151 154 738 895"><p>19. फलस्वरूप प्रथमतः यह निर्धारित किया जाता है कि अपीलार्थी ऋणी फर्म द्वारा प्रस्तुत अपील, धारा 30-ए आर.डी.बी.एक्ट 1993 के प्रावधानानुसार देय ऋणी राशि 7,44,27,670/- (सात करोड़ चवालीस लाख सत्ताईस हजार छह सौ सत्तर रुपये) का 50 प्रतिशत अर्थात् 3,72,13,835/- (तीन करोड़ बहत्तर लाख तेरह हजार आठ सौ पैंतीस रुपये) प्री-डिपॉजिट किये बिना गुण दोष पर सुने जाने योग्य नहीं है।</p><p>20. अतःप्रकरण रजिस्ट्री को वापस करते हुए निर्देशित किया जाता है कि अपीलार्थी पक्ष को आदेशित राशि 3,72,13,835/- (तीन करोड़ बहत्तर लाख तेरह हजार आठ सौ पैंतीस रुपये) आगामी 15 दिवस के अंदर जमा करने हेतु सूचित किया जाये एवं अपीलार्थी पक्ष द्वारा उक्त राशि जमा किये जाने पर अपील गुण दोष पर सुने जाने हेतु पीठ के समक्ष सुनवाई हेतु सूचीबद्ध की जाये, किन्तु यदि निर्धारित समयавधि में आदेशित राशि अपीलार्थी पक्ष जमा नहीं करता, तब धारा 30-ए आर.डी.बी.एक्ट 1993 के आज्ञात्मक प्रावधानों का पालन नहीं किये जाने के आधार पर प्रस्तुत अपील बेंच को सन्दर्भित किये बिना ही निरस्त समझी जायेगी।</p><p>21. तदानुसार अपील अभिलेख से खारिज कर अभिलेखागार में सुरक्षित जमा की जाये।</p><div style="text-align: center;"></div></td><td data-bbox="738 154 920 895"></td></tr></tbody></table>
**CONTD. ORDER - SHEET**
<table border="1"><thead><tr><th data-bbox="85 122 185 152">DATE</th><th data-bbox="185 122 771 152">DESCRIPTION OF THE ORDER</th><th data-bbox="771 122 948 152">REMARK</th></tr></thead><tbody><tr><td data-bbox="85 152 185 892"></td><td data-bbox="185 152 771 892"><p>22. रजिस्ट्री को निर्देशित किया जाता है कि वसूली अधिकारी का अभिलेख पारित आदेश की प्रति के साथ वापस किया जाये।</p><p>रजिस्ट्री के समक्ष सम्पूर्ण अभिलेख निर्देशानुसार कार्यवाही हेतु दिनांक 20.06.2025 को प्रस्तुत हो।</p><p style="text-align: center;"><br/>(राम निवास पटेल)<br/>पीठासीन अधिकारी<br/>डी.आर.टी.म.प्र.एवं छत्तीसगढ़<br/>(अतिरिक्त प्रभार डी.आर.टी.इलाहाबाद)</p></td><td data-bbox="771 152 948 892"></td></tr></tbody></table>