Debts Recovery Tribunals and Appellate Tribunals

SMT PINKY MUNDRA vs SHRIKANTA PORWAL on 14 July 2025

<table border="1"><thead><tr><th data-bbox="73 136 178 173">DATE</th><th data-bbox="178 136 768 173">DESCRIPTION OF THE ORDER</th><th data-bbox="768 136 957 173">REMARK</th></tr></thead><tbody><tr><td data-bbox="73 173 178 960">आर.ए. 04/2024<br/>14.07.2025</td><td data-bbox="178 173 768 960"><p>आवेदक पक्ष के लिए श्री मनोज शाही अधिवक्ता।</p><p>उत्तरवादी क्रमांक 1 लगायत 3 के लिए श्री अक्षत अग्रवाल अधिवक्ता।</p><p>उत्तरवादी क्रमांक 4 के लिए श्री अदम्य बाजपेयी अधिवक्ता।</p><ol><li>1. इस आदेश के द्वारा आवेदक पक्ष की ओर से प्रस्तुत किये गये रिज्यू पिटीशन धारा 114 सहपाठित आदेश 47 नियम 1 सी.पी.सी. का निराकरण किया जा रहा है।</li><li>2. आवेदक पक्ष ने इस अधिकरण द्वारा एम.ए. नं. 45/2023 में पारित अंतिम आदेश दिनांक 04.03.2024 के विरुद्ध यह रिज्यू पिटीशन दिनांक 15.04.2024 को अधिकरण के समक्ष प्रस्तुत किया है, जो प्रथम दृष्ट्या अवधि बाधित होने से विलम्ब क्षमा भेत्तु पृथक आवेदन आई.ए. 8367/24 दिनांक 04.12.2024 को प्रस्तुत किया है।</li><li>3. इस रिज्यू पिटीशन का मुख्य आधार है की अधिकरण द्वारा निर्णित एस.ए.177/2015 में पारित अंतिम आदेश दिनांक 13.01.2023 के अनुसार बंधक सम्पत्ति का रिकत आधिपत्य नीलामी क्रेता पक्ष से वापस लेकर ऋणी पक्ष को वापस दिलाने के साथ-साथ नीलामी क्रेता द्वारा जमा की गई नीलामी राशि 9 प्रतिशत वार्षिक साधारण ब्याज के साथ 2 माह के अंदर नीलामी क्रेता को वापस किये जाने का आदेश दिया गया है, किन्तु एम.ए.45/2023 में पारित अंतिम आदेश दिनांक 04.03.2023 के माध्यम से सिक्योरिड एसेट का नीलामी क्रेता पक्ष से भौतिक आधिपत्य वापस लेने हेतु कमिश्नर नियुक्त कर दिया गया, किन्तु</li></ol><div style="text-align: center;"></div></td><td data-bbox="768 173 957 960"></td></tr></tbody></table>

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<table border="1"><thead><tr><th data-bbox="44 138 141 168">DATE</th><th data-bbox="141 138 734 168">DESCRIPTION OF THE ORDER</th><th data-bbox="734 138 916 168">REMARK</th></tr></thead><tbody><tr><td data-bbox="44 168 141 960"></td><td data-bbox="141 168 734 960"><p>नीलामी क्रेता को आदेशित राशि वापस दिलाने का आदेश नहीं दिया गया, जिस कारण नीलामी क्रेता का हित बुरी तरह प्रभावित हो रहा है। इस आधार पर इसी सीमा तक आदेश दिनांक 04.03.2024 के पुनरावलोकन का अनुरोध किया गया।</p><p>4. आवेदक पक्ष ने इस रिव्यू पिटीशन के प्रार्थना कालम में यह अनुरोध किया है की एस.ए. 177/2015 में पारित मूल आदेश दिनांक 13.01.2023 के अनुसार प्रथमतः नीलामी क्रेता पक्ष को नीलामी राशि का 9 प्रतिशत साधारण ब्याज के सहित वापस दिलायी जाय। तत्पश्चात सिक्योरिटी एसेट का भौतिक आधिपत्य वापस लिया चजाय, ताकि न्याय के उद्देश्य की पूर्ति हो सके।</p><p>5. उत्तरवादी पक्ष की मुख्य आपत्ति है कि प्रस्तुत पुनरावलोकन आवेदन अवधि बाधित है एवं माननीय डी.आर.ए.टी. के समक्ष अपील लम्बित है। इस कारण आवेदक पक्ष इस पुनरावलोकन आवेदक के माध्यम से कोई सहायता पाने का हकदार नहीं है।</p><p>6. रिव्यू पिटीशन के साथ इस अधिकरण द्वारा एस.ए.177/2015 में पारित अंतिम आदेश दिनांक 13.01.2023 की प्रति संलग्न है, जिसकी कण्डिका 53 (5) (6) के अनुसार बंधक सम्पत्ति वेयर हाउस का आधिपत्य ऋणी व्यक्तियों के पक्ष में पुनर्स्थापित किया गया है। साथ ही नीलामी क्रेता से 2 माह के अंदर आधिपत्य वापस लेकर ऋणी व्यक्तियों को वापस दिये जाने का निर्देश दिया गया। साथ ही कण्डिका 53 (7) के अनुसार उत्तरवादी बैंक को आदेशित किया गया है कि नीलामी क्रेता द्वारा जमा की गई विक्रय प्रतिफल की राशि जमा दिनांक से 9 प्रतिशत वार्षिक</p><div style="text-align: center; margin-top: 20px;"></div></td><td data-bbox="734 168 916 960"></td></tr></tbody></table>

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<table border="1"><thead><tr><th data-bbox="78 138 178 172">DATE</th><th data-bbox="178 138 768 172">DESCRIPTION OF THE ORDER</th><th data-bbox="768 138 951 172">REMARK</th></tr></thead><tbody><tr><td data-bbox="78 172 178 956"></td><td data-bbox="178 172 768 956"><p>साधारण ब्याज सहित 2 माह के अंदर नीलामी केता पक्ष को वापस करे।</p><p>7. एम.ए. 45/2023 में पारित आदेश दिनांक 04.03.2024 की प्रति (एनेक्चर ए/2) के अवलोकन से पाया जाता है की विविध आवेदन की सुनवाई के दौरान भी उत्तरवादी बैंक के द्वारा आपत्ति ली गई थी कि इस अधिकरण के अंतिम आदेश दिनांक 13.01.2023 के विरुद्ध माननीय डी.आर.ए.टी. इलाहाबाद के समक्ष अपील प्रस्तुत की गई है, किन्तु इस अधिकरण द्वारा आदेश दिनांक 04.03.2024 में यह टिप्पणी की गई की माननीय अपीलिय न्यायालय के समक्ष अपील प्रस्तुत कर देने मात्र से अंतिम आदेश का प्रभाव स्थगित नहीं होता, जब तक कि आदेश का निष्पादन एवं प्रभाव स्थगित किये जाने का कोई स्थगन आदेश पारित नहीं किया गया हो एवं इस टिप्पणी के साथ यह पाते हुए की निर्णित एस.ए. 177/ 2015 में पारित अंतिम आदेश दिनांक 13.01.2023 के विरुद्ध स्थगन आदेश पारित नहीं है। विविध आवेदन का गुण दोष पर निराकरण किया गया। परिणाम स्वरूप नीलामी केता पक्ष से सिक्योर्ड एसेट का रिक्त आधिपत्य वापस लेकर ऋणी पक्ष को प्रदान किये जानें का आदेश दिया गया एवं दी गई जानकारी के अनुसार ऋणी पक्ष को सिक्योर्ड एसेट का रिक्त आधिपत्य प्राप्त हो चुका है।</p><p>8. तो जब ऋणी पक्ष द्वारा प्रस्तुत किये गये आवेदन का माननीय डी.आर.ए.टी. के समक्ष अपील लम्बित रहने के दौरान स्थगन आदेश पारित न होने के कारण गुण दोष पर अंतिम रूप से निराकरण किया जाकर एस.ए. 177/2015 में पारित अंतिम आदेश दिनांक 13.01.2023 के अंश</p></td><td data-bbox="768 172 951 956"></td></tr></tbody></table>

**CONTD. ORDER - SHEET**

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<table border="1"><thead><tr><th data-bbox="45 133 148 168">DATE</th><th data-bbox="148 133 738 168">DESCRIPTION OF THE ORDER</th><th data-bbox="738 133 924 168">REMARK</th></tr></thead><tbody><tr><td data-bbox="45 168 148 959"></td><td data-bbox="148 168 738 959"><p>भाग का निष्पादन कराया जा चुका है। ऋणी पक्ष को नीलामी क्रेता से वापस लेकर सिक्योर्ड एसेट का भौतिक आधिपत्य दिलाया जा चुका है, तब इस रिज्यु पिटीशन में उत्तरवादी पक्ष की यह अपत्ति स्वीकारने योग्य नहीं है कि माननीय डी.आर.ए.टी. के समक्ष लम्बित अपील अंतिम रूप से सुनी जाकर आदेश हेतु सुरक्षित है। इस कारण आवेदक पक्ष सहायता पाने का हकदार नहीं है। कारण की आज दिनांक तक उत्तरवादी पक्ष का यह कथन नहीं है की माननीय डी.आर.ए.टी. के द्वारा इस अधिकरण से निराकृत एस.ए. 177/2015 में पारित अंतिम आदेश दिनांक 13.011.2023 के विरुद्ध कोई स्थगन आदेश पारित किया गया है, अथवा अंतिम आदेश को अपास्त किया गया है।</p><p>9. इस कारण पीठ का मत है की जब ऋणी पक्ष ने एस.ए. 177/2015 के अंतिम आदेश दिनांक 13.01.2023 के अंतिम परिणाम का लाभ उठाते हुए नीलामी क्रेता पक्ष से सिक्योर्ड एसेट का भौतिक आधिपत्य वापस ले लिया है, तब उत्तरवादी बैंक का यह विधिक दायित्व है की नीलामी क्रेता पक्ष द्वारा जमा की गई विक्रय प्रतिफल राशि अधिकरण के आदेशानुसार जमा करने दिनांक से 9 प्रतिशत साधारण ब्याज के साथ तत्काल नीलामी क्रेता पक्ष को वापस करे, कारण की जिस क्षण नीलामी क्रेता पक्ष कय की गई सिक्योर्ड एसेट के उपभोग से वंचित हुआ है। तत्काल उसी क्षण नीलामी क्रेता को उसके द्वारा जमा की गई विक्रय प्रतिफल की राशि इस अधिकरण के आदेशानुसार उत्तरवादी बैंक से ब्याज सहित वापस पाने का विधिक हक प्राप्त हो गया है।</p><div style="text-align: center;"></div></td><td data-bbox="738 168 924 959"></td></tr></tbody></table>

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<table border="1"><thead><tr><th data-bbox="78 139 178 171">DATE</th><th data-bbox="178 139 768 171">DESCRIPTION OF THE ORDER</th><th data-bbox="768 139 956 171">REMARK</th></tr></thead><tbody><tr><td data-bbox="78 171 178 961"></td><td data-bbox="178 171 768 961"><p>10. जहां तक उत्तरवादी पक्ष की जो यह आपत्ति है कि प्रस्तुत पुनरावलोकन आवेदन अवधि बाधित है। इस कारण आवेदक पक्ष कोई सहायता पाने का हकदार नहीं है, तो इस विषय में इस पीठ का मत है की पुनरावलोकन आवेदन के माध्यम से यदि आवेदक पक्ष ने इस अधिकरण द्वारा एस.ए. 177/2015 में पारित अंतिम आदेश दिनांक 13.01.2023 अथवा विविध प्रकरण 45/2023 में पारित आदेश दिनांक 04.03.2024 में दिये गये निष्कर्ष को संशोधित करने, विलोपित करने, परिवर्तित करने का अनुरोध किया होता, तब प्रस्तुत आवेदन पुनरावलोकन आवेदन माना जाता, किन्तु आवेदक पक्ष ने इस आवेदन के माध्यम से इस अधिकरण के द्वारा निराकृत एस.ए. 177/2015 में पारित अंतिम आदेश दिनांक 13.01.2023 अथवा विविध आवेदन 45/2023 में पारित आदेश दिनांक 04.03.2024 में जो भी निष्कर्ष दिया गया है, उसे संशोधित करने, परिवर्तित करने, विलोपित करने का कोई अनुरोध नहीं किया है, बल्कि नीलामी क्रेता की हैसियत से रिब्यु पिटीशन के आवेदकगण के द्वारा कय की गई सिक्योर्ड एसेट के विषय में जो विक्रय प्रतिफल उत्तरवादी बैंक के अधीन जमा किया है, उस विक्रय प्रतिफल राशि को अधिकरण के आदेश दिनांक 13.01.2023 में दिये गये निर्देशानुसार वापस दिलाये जाने का अनुरोध किया है, तब वास्तव में आवेदक पक्ष द्वारा प्रस्तुत यह आवेदन रिब्यु पिटीशन न होकर एक विविध आवेदन है, तब प्रस्तुत आवेदन में धारा 114 सहपठित आदेश 47 नियम 1 सी.पी.सी. के प्रावधानों का उल्लेख कर रिब्यु पिटीशन लिखते हुए आवेदन प्रस्तुत करने से आवेदन का मूल</p><div data-bbox="415 910 545 955" style="text-align: center;"></div></td><td data-bbox="768 171 956 961"></td></tr></tbody></table>

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<table border="1"><thead><tr><th data-bbox="42 134 145 171">DATE</th><th data-bbox="145 134 738 171">DESCRIPTION OF THE ORDER</th><th data-bbox="738 134 927 171">REMARK</th></tr></thead><tbody><tr><td data-bbox="42 171 145 960"></td><td data-bbox="145 171 738 960"><p>स्वरूप अथवा बाधित सहायता का सार नहीं बदलता, बल्कि न्यायालय अथवा अधिकरण को प्रस्तुत किये गये आवेदन की इबारत एवं की गई प्रार्थना के प्रकाश में यह देखना होता है कि वास्तव में आवेदन का उद्देश्य क्या है एवं प्रारूपित आवेदन किस स्वरूप का है। इस दृष्टिकोण से पीठ का मत है की उत्तरवादी पक्ष की यह आपत्ति स्वीकारने योग्य नहीं है कि आवेदक पक्ष द्वारा प्रस्तुत आवेदन अवधि बाधित है, कारण की आवेदक पक्ष को जब तक अधिकरण के द्वारा निर्णित एस.ए. 177/2015 में पारित अंतिम आदेश दिनांक 13.01.2023 के अनुरूप आदेशित विक्रय प्रतिफल की राशि ब्याज सहित उत्तरवादी बैंक से वापस नहीं मिल जाती, तब तक आवेदक पक्ष को इस अधिकरण के समक्ष आदेश दिनांक 13.01.2023 का पालन कराने हेतु आवेदन प्रस्तुत करने का निरंतर वाद कारण उपलब्ध है। इस दृष्टिकोण से आवेदक पक्ष द्वारा दिनांक 15.04.2024 को प्रस्तुत किया गया यह आवेदन, जो अभिवचन एवं प्रार्थना के प्रकाश में विविध आवेदन के स्वरूप का है, समय सीमा के अंदर है एवं गुण दोष पर निराकरण योग्य है।</p><p>11. फलस्वरूप आवेदक पक्ष द्वारा प्रस्तुत विलम्ब क्षमा आवेदन इन्फ्रक्चुअस निर्धारित करते हुए निराकृत किया जाता है।</p><p>12. विधिक परिस्थितियों का उल्लेख किया जाय, तो <u>माननीय उच्चतम न्यायालय के द्वारा नाहर इन्डस्ट्रियल इंटर प्राईजेज लिमिटेड विरुद्ध हांगकांग एवं संधाई बैंकिंग कार्पोरेशन (2009) 8 एस.सी.सी. 646</u> के मामले में प्रतिपादित अभिमत के अनुसार यह अधिकरण व्य.प्र.सं. मे वर्णित</p><div data-bbox="400 900 550 970" style="text-align: center;"></div></td><td data-bbox="738 171 927 960"></td></tr></tbody></table>

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<table border="1"><thead><tr><th data-bbox="78 138 178 171">DATE</th><th data-bbox="178 138 768 171">DESCRIPTION OF THE ORDER</th><th data-bbox="768 138 950 171">REMARK</th></tr></thead><tbody><tr><td data-bbox="78 171 178 960"></td><td data-bbox="178 171 768 960"><p>प्रक्रिया से नियंत्रित नहीं है, बल्कि नैसर्गिक न्याय सिद्धांतों का पालन करते हुए व्य.प्र.सं. में वर्णित प्रक्रिया से परे जाकर क्षेत्राधिकार का उपयोग कर सकता है। तो इस प्रकरण के दृष्टिकोण से देखा जाय तो नैसर्गिक न्याय सिद्धांत की पूर्ति इसी में है कि जिस नीलामी क्रेता से उसके द्वारा कय की गई सम्पत्ति को इस अधिकरण के द्वारा निर्णित एस.ए. 177/2015 में पारित अंतिम आदेश के पालन में वापस लेकर ऋणी पक्ष को वापस किया जा चुका है, तब नीलामी क्रेता को उसके द्वारा जमा की गई विक्रय प्रतिफल राशि ब्याज सहित तत्काल वापस मिलना चाहिए, किन्तु उत्तरवादी बैंक ने इस आड में की माननीय डी. आर.ए.टी. इलाहाबाद के समक्ष अपील लम्बित है, नीलामी क्रेता पक्ष द्वारा जमा की गई प्रतिफल राशि ब्याज सहित आज दिनांक तक वापस नहीं किया, जबकि उत्तरवादी बैंक इस अधिकरण के निर्देश का अक्षरशः पालन करने के लिए बाध्य है, तो जब इस अधिकरण को नैसर्गिक न्याय सिद्धांत की पूर्ति में व्य.प्र.सं. के प्रावधानों से परे जाकर आदेश पारित करने की अधिकारिता है एवं धारा 19 (25) आर.डी.बी. एक्ट 1993 में भी यह प्रावधानित है की अधिकरण अपने द्वारा पारित आदेश को प्रभावी ढंग से लागू करने के लिए एवं प्रक्रिया के दुरुपयोग को रोकने के लिए, साथ ही न्याय की पूर्ति के लिए आवश्यक आदेश पारित कर सकता है, एवं आवश्यक निर्देश दे सकता है। इस दृष्टिकोण से भी इस अधिकरण का मत है की जब माननीय डी.आर.ए.टी. के द्वारा इस अधिकरण से निर्णित एस.ए. 177/2015 के विरुद्ध प्रस्तुत अपील में कोई स्थगन आदेश पारित नहीं है एवं ऋणी पक्ष को सिक्योरिड एसेट</p></td><td data-bbox="768 171 950 960"></td></tr></tbody></table>

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<table border="1"><thead><tr><th data-bbox="44 134 145 171">DATE</th><th data-bbox="145 134 738 171">DESCRIPTION OF THE ORDER</th><th data-bbox="738 134 924 171">REMARK</th></tr></thead><tbody><tr><td data-bbox="44 171 145 960"></td><td data-bbox="145 171 738 960"><p>का भौतिक आधिपत्य वापस दिलाया जा चुका है, तब उत्तरवादी बैंक को आदेशित किया जाय की तत्काल नीलामी केता पक्ष द्वारा जमा विक्रय प्रतिफल राशि जमा दिनांक से 9 प्रतिशत वार्षिक साधारण ब्याज सहित तत्काल वापस करे। यह स्पष्ट किया जाता है की यदि उत्तरवादी बैंक इस निर्देश का पालन करने में असफल रहा, तब नीलामी केता पक्ष द्वारा इस आवेदन के माध्यम से जमा राशि पर 18 प्रतिशत वार्षिक दर से ब्याज दिलाये जाने का किया गया अनुरोध आगे विचारण हेतु खुला रहेगा।</p><p>13. उक्त टिप्पणी के साथ आवेदक पक्ष द्वारा प्रस्तुत आवेदन विविध आवेदन के रूप में स्वीकारते हुए उत्तरवादी बैंक को आदेशित एवं निर्देशित किया जाता है की नीलामी केता पक्ष अर्थात इस विविध आवेदन के आवेदकगण द्वारा जमा की गई <u>विक्रय प्रतिफल राशि जमा दिनांक से 9 प्रतिशत वार्षिक दर से साधारण ब्याज सहित तत्काल, अथवा अधिकतम 15 कार्य दिवस के अंदर जमाकर्ता नीलामी केता पक्ष को वापस करे।</u></p><p>14. स्पष्ट किया जाता है की यदि उत्तरवादी बैंक अधिकरण के द्वारा एस.ए. 177/15 में पारित अंतिम आदेश एवं इस आवेदन के माध्यम से दिये गये निर्देश का पालन करने में असफल रहता है, तब नीलामी केता पक्ष को उत्तरवादी बैंक के विरुद्ध विधि अनुकूल कार्यवाही करने की स्वतन्त्रता रहेगी। साथ ही स्पष्ट किया जाता है की वापस की जा रही नीलामी राशि माननीय डी. आर.ए.टी. इलाहाबाद के समक्ष लम्बित अपील के अंतिम आदेश के अध्याधीन रहेगी।</p><div style="text-align: center;"></div></td><td data-bbox="738 171 924 960"></td></tr></tbody></table>

**CONTD. ORDER - SHEET**

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<table border="1"><thead><tr><th data-bbox="81 138 178 171">DATE</th><th data-bbox="178 138 768 171">DESCRIPTION OF THE ORDER</th><th data-bbox="768 138 952 171">REMARK</th></tr></thead><tbody><tr><td data-bbox="81 171 178 961"></td><td data-bbox="178 171 768 961"><p>15. रजिस्ट्री को निर्देशित किया जाता है की पारित आदेश की निःशुल्क प्रति उभय पक्ष को तत्काल प्रदान की जाय।</p><p>16. उपरोक्तानुसार प्रकरण का अंतिम रूप से निराकरण किया गया।</p><p>17. उभय पक्ष अपना-अपना व्यय वहन करेंगे।</p><p>18. परिणाम दर्ज किया जाय।</p><p>19. अभिलेख अभिलेखागार में सुरक्षित रखा जाय।</p><p style="text-align: center;"><br/>(रामनिवासपटेल)<br/>पीठासीन अधिकारी<br/>डी.आर.टी म.प्र. एवं छत्तीसगढ़</p></td><td data-bbox="768 171 952 961"></td></tr></tbody></table>

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